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Gurugram News: 14 हजार यूनिटेक खरीदारों को 17 अगस्त का इंतजार, अधर में फंसे घर
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। 15 साल से घर का इंतजार कर रहे 14,000 परिवारों की उम्मीद सुप्रीम कोर्ट के 17 अगस्त को आने वाले फैसले पर टिकी है। 2011 में सुनील (बदला हुआ नाम) ने जिंदगी भर की जमा-पूंजी लगाकर यूनिटेक में एक फ्लैट बुक कराया था। पंद्रह साल बीत गए, फ्लैट आज भी अधूरा है। सुनील अकेले नहीं हैं, उनके जैसे हजारों खरीदार इस इंतजार में फंसे हैं।
इनमें कई तो अपने घर का सपना पूरा होते देखे बिना ही दुनिया छोड़ चुके हैं। इन खरीदारों की उम्मीद सुप्रीम कोर्ट के दो अहम फैसलों पर टिकी है। इनमें यूनिटेक में नए सीएमडी की नियुक्ति और कंपनी की संपत्तियों की नीलामी से मिलने वाली रकम को निर्माण कार्य में लगाने की मंज़ूरी है, जिसे कोर्ट पहले ही 17 अगस्त 2022 के अपने आदेश में हरी झंडी दे चुका है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को होनी है।
इसमें गुरुग्राम में निर्वाणा कंट्री -2, ईस्पेस, एक्सक्यूजिट और अंथिया फ्लोर्स के खरीदार शामिल हैं, जिन्होंने वर्ष 2010-11 में अपने घर बुक किए थे और उन्हें 2013-14 में घर मिल जाने थे। यूनिटेक 14000 फ्लैट बायर्स में से गुरुग्राम के करीब 5300 खरीदार हैं, जिन्हें 17 अगस्त के फैसले का इंतजार है। बिल्डर के दिवालिया घोषित होने के बाद उनके प्रोजेक्ट ठप हो गए थे। फिर सुप्रीम कोर्ट ने खरीदारों के घर किसी भी हाल में पूरे करने के आदेश दिए मगर कंपनी के सीएमडी का कार्यकाल खत्म होने के बाद खरीदारों को इसका लाभ नहीं मिल पाया।
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खरीदारों के अनुसार कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) ने सीएमडी पद के लिए अपने उम्मीदवार का नाम कोर्ट को भेज दिया है, लेकिन मंजूरी अभी अटकी है। देरी की कीमत भारी पड़ सकती है, क्योंकि सिर्फ सीएमडी ही ठेकेदारों के बड़े बिल पास कर सकते हैं, और कई बिल पहले से लंबित हैं। समय पर भुगतान न हुआ तो ठेकेदारों के सामने नकदी संकट खड़ा हो सकता है, जिससे निर्माण कार्य फिर ठप पड़ सकता है।
नीलामी पर रोक ने बढ़ाई मुश्किल
घरों को पूरा करने के लिए करीब 9,000 से 9,500 करोड़ रुपये चाहिए, जिसे इन्हीं नीलामियों से जुटाया जाना था लेकिन फरवरी 2026 में बैंकों और वित्तीय संस्थानों की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने इन नीलामियों पर ही रोक लगा दी। खरीदारों का कहना है कि वे आज इसी वजह से मुसीबत में हैं कि इन बैंकों ने लापरवाही से कर्ज बांटा और निगरानी में ढिलाई बरती, जिसका फायदा उठाकर यूनिटेक के पुराने प्रबंधन ने बड़ा घोटाला किया, जो अब अदालत में साबित हो चुका है। इसी घोटाले के चलते सरकार को कंपनी का बोर्ड अपने हाथ में लेना पड़ा था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। 15 साल से घर का इंतजार कर रहे 14,000 परिवारों की उम्मीद सुप्रीम कोर्ट के 17 अगस्त को आने वाले फैसले पर टिकी है। 2011 में सुनील (बदला हुआ नाम) ने जिंदगी भर की जमा-पूंजी लगाकर यूनिटेक में एक फ्लैट बुक कराया था। पंद्रह साल बीत गए, फ्लैट आज भी अधूरा है। सुनील अकेले नहीं हैं, उनके जैसे हजारों खरीदार इस इंतजार में फंसे हैं।
इनमें कई तो अपने घर का सपना पूरा होते देखे बिना ही दुनिया छोड़ चुके हैं। इन खरीदारों की उम्मीद सुप्रीम कोर्ट के दो अहम फैसलों पर टिकी है। इनमें यूनिटेक में नए सीएमडी की नियुक्ति और कंपनी की संपत्तियों की नीलामी से मिलने वाली रकम को निर्माण कार्य में लगाने की मंज़ूरी है, जिसे कोर्ट पहले ही 17 अगस्त 2022 के अपने आदेश में हरी झंडी दे चुका है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को होनी है।
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इसमें गुरुग्राम में निर्वाणा कंट्री -2, ईस्पेस, एक्सक्यूजिट और अंथिया फ्लोर्स के खरीदार शामिल हैं, जिन्होंने वर्ष 2010-11 में अपने घर बुक किए थे और उन्हें 2013-14 में घर मिल जाने थे। यूनिटेक 14000 फ्लैट बायर्स में से गुरुग्राम के करीब 5300 खरीदार हैं, जिन्हें 17 अगस्त के फैसले का इंतजार है। बिल्डर के दिवालिया घोषित होने के बाद उनके प्रोजेक्ट ठप हो गए थे। फिर सुप्रीम कोर्ट ने खरीदारों के घर किसी भी हाल में पूरे करने के आदेश दिए मगर कंपनी के सीएमडी का कार्यकाल खत्म होने के बाद खरीदारों को इसका लाभ नहीं मिल पाया।
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खरीदारों के अनुसार कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) ने सीएमडी पद के लिए अपने उम्मीदवार का नाम कोर्ट को भेज दिया है, लेकिन मंजूरी अभी अटकी है। देरी की कीमत भारी पड़ सकती है, क्योंकि सिर्फ सीएमडी ही ठेकेदारों के बड़े बिल पास कर सकते हैं, और कई बिल पहले से लंबित हैं। समय पर भुगतान न हुआ तो ठेकेदारों के सामने नकदी संकट खड़ा हो सकता है, जिससे निर्माण कार्य फिर ठप पड़ सकता है।
नीलामी पर रोक ने बढ़ाई मुश्किल
घरों को पूरा करने के लिए करीब 9,000 से 9,500 करोड़ रुपये चाहिए, जिसे इन्हीं नीलामियों से जुटाया जाना था लेकिन फरवरी 2026 में बैंकों और वित्तीय संस्थानों की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने इन नीलामियों पर ही रोक लगा दी। खरीदारों का कहना है कि वे आज इसी वजह से मुसीबत में हैं कि इन बैंकों ने लापरवाही से कर्ज बांटा और निगरानी में ढिलाई बरती, जिसका फायदा उठाकर यूनिटेक के पुराने प्रबंधन ने बड़ा घोटाला किया, जो अब अदालत में साबित हो चुका है। इसी घोटाले के चलते सरकार को कंपनी का बोर्ड अपने हाथ में लेना पड़ा था।