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Gurugram News: परिणाम के बाद अभिभावक बनें बच्चों का संबल
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अपेक्षा से कम अंक आने पर न टूटे विद्यार्थी, अभिभावक भी बदलें सोच
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा 10वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया है। इस परिणाम ने जहां कई घरों में खुशियों का माहौल ला दिया है, वहीं दूसरी ओर अपेक्षा के अनुरूप अंक न मिलने से अनेक छात्र-छात्राएं अत्यधिक मानसिक तनाव और निराशा के दौर से गुजर रहे हैं। परिणाम आने के बाद बच्चों पर समाज और परिवार की उम्मीदों का भारी दबाव साफ देखा जा सकता है।
शिक्षाविदों और स्कूल प्रधानाचार्यों के अनुसार, परीक्षा के प्राप्तांक किसी भी छात्र के जीवन और उसकी असीमित योग्यताओं का अंतिम पैमाना नहीं हो सकते। आज के इस संवेदनशील समय में अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। माता-पिता को चाहिए कि वे कम अंक आने पर बच्चों को कोसने या दूसरों से उनकी तुलना करने के बजाय उनका हौसला बढ़ाएं।
नंबर नहीं, भविष्य मायने रखता है
बच्चों को यह समझने की जरूरत है कि एक परीक्षा उनका भविष्य तय नहीं करती। अगर अंक कम आए हैं तो उसे सीख मानकर आगे बढ़ना चाहिए। -प्रदीप, पीएम श्री गर्वमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-4/7
परिणाम के समय कई बच्चे मानसिक तनाव में आ जाते हैं। ऐसे समय में उन्हें डांटने की नहीं बल्कि समझने और उनका आत्मविश्वास बढ़ाने की जरूरत होती है।-शिवदत्त, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, अर्जुन नगर
हर बच्चे की क्षमता अलग होती है। केवल अंकों के आधार पर किसी विद्यार्थी को आंकना सही नहीं है। बच्चों को उनकी रूचि के अनुसार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। -मंजू रानी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बुढ़ेड़ा
असफलता जीवन का अंत नहीं है। कई बार कम अंक ही बच्चों को और बेहतर करने की प्रेरणा देते हैं। विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। -संगीता, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, खोह
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा 10वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया है। इस परिणाम ने जहां कई घरों में खुशियों का माहौल ला दिया है, वहीं दूसरी ओर अपेक्षा के अनुरूप अंक न मिलने से अनेक छात्र-छात्राएं अत्यधिक मानसिक तनाव और निराशा के दौर से गुजर रहे हैं। परिणाम आने के बाद बच्चों पर समाज और परिवार की उम्मीदों का भारी दबाव साफ देखा जा सकता है।
शिक्षाविदों और स्कूल प्रधानाचार्यों के अनुसार, परीक्षा के प्राप्तांक किसी भी छात्र के जीवन और उसकी असीमित योग्यताओं का अंतिम पैमाना नहीं हो सकते। आज के इस संवेदनशील समय में अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। माता-पिता को चाहिए कि वे कम अंक आने पर बच्चों को कोसने या दूसरों से उनकी तुलना करने के बजाय उनका हौसला बढ़ाएं।
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नंबर नहीं, भविष्य मायने रखता है
बच्चों को यह समझने की जरूरत है कि एक परीक्षा उनका भविष्य तय नहीं करती। अगर अंक कम आए हैं तो उसे सीख मानकर आगे बढ़ना चाहिए। -प्रदीप, पीएम श्री गर्वमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-4/7
परिणाम के समय कई बच्चे मानसिक तनाव में आ जाते हैं। ऐसे समय में उन्हें डांटने की नहीं बल्कि समझने और उनका आत्मविश्वास बढ़ाने की जरूरत होती है।-शिवदत्त, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, अर्जुन नगर
हर बच्चे की क्षमता अलग होती है। केवल अंकों के आधार पर किसी विद्यार्थी को आंकना सही नहीं है। बच्चों को उनकी रूचि के अनुसार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। -मंजू रानी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बुढ़ेड़ा
असफलता जीवन का अंत नहीं है। कई बार कम अंक ही बच्चों को और बेहतर करने की प्रेरणा देते हैं। विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। -संगीता, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, खोह