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खूनी हाईवे बनेगा सुरक्षित फोरलेन : दिल्ली-अलवर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पैमाइश तेज
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पैमाइश करते कर्मचारी।
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- 480 करोड़ की परियोजना को मिली रफ्तार, सड़क हादसों में कमी आने के आसार
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नूंह से अलवर सीमा तक जाने वाले दिल्ली-अलवर राष्ट्रीय राजमार्ग 248ए को फोरलेन बनाने का काम अब गति पकड़ रहा है। लंबे समय से लंबित इस परियोजना पर अब तेजी से पैमाइश का काम चल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत इस योजना से न सिर्फ सड़क हादसों में कमी आने की उम्मीद है, बल्कि क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलेगी।
दिल्ली-अलवर राष्ट्रीय राजमार्ग 248ए के उन्नयन को केंद्र सरकार ने वर्ष 2024-25 के वार्षिक प्लान में शामिल किया है। 31 मार्च 2025 को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए करीब 480.44 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया। यह मार्ग गुरुग्राम से लेकर अलवर सीमा तक लगभग 46 किलोमीटर लंबा है, जिसे अब फोरलेन में विकसित किया जाएगा।
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वन विभाग से मिली सशर्त अनुमति :
इस परियोजना के रास्ते में आने वाली सबसे बड़ी बाधा वन भूमि की अनुमति थी, जो अब दूर हो चुकी है। वन विभाग ने सशर्त मंजूरी देते हुए लगभग 113 एकड़ वन भूमि के डायवर्जन की अनुमति प्रदान कर दी है। इससे निर्माण कार्य में आने वाली प्रशासनिक रुकावटें खत्म हो गई हैं और काम ने रफ्तार पकड़ ली है।
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खूनी हाईवे की पहचान से मिलेगी मुक्ति :
यह मार्ग लंबे समय से खूनी हाईवे के नाम से कुख्यात रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले डेढ़ दशक में इस सड़क पर करीब 2200 लोगों की जान जा चुकी है। संकरी सड़क, भारी ट्रैफिक और अपर्याप्त सुरक्षा उपायों के कारण यहां अक्सर गंभीर हादसे होते रहे हैं। फोरलेन बनने के बाद इस काले इतिहास पर विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
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- व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा :
सड़क के चौड़ीकरण से क्षेत्र में यातायात सुगम होगा, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, बेहतर कनेक्टिविटी के कारण पर्यटन के अवसर भी बढ़ेंगे। नूंह और आसपास के क्षेत्रों के लिए यह परियोजना आर्थिक विकास का नया द्वार खोल सकती है।
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दो साल में पूरा करने का लक्ष्य :
निर्माण एजेंसी को इस परियोजना को दो वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि निर्धारित समय में कार्य पूरा होने पर क्षेत्र की यातायात व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हो जाएगी।
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स्थानीय लोगों की उम्मीदें बढ़ीं :
लंबे समय से इस सड़क के सुधार की मांग कर रहे स्थानीय लोगों में अब खुशी का माहौल है। उनका मानना है कि फोरलेन बनने से न केवल हादसों में कमी आएगी, बल्कि रोजमर्रा की आवाजाही भी आसान और सुरक्षित हो जाएगी।
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जल्द ही पैमाइश का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद पेड़ों की कटाई का कार्य शुरू हो जाएगा। कोशिश है कि जल्द सभी कामों को निपटाया जाए और चौड़ीकरण का कार्य शुरू करा दिया जाए।
- प्रदीप सिंधु, एक्सईएन लोक निर्माण विभाग।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नूंह से अलवर सीमा तक जाने वाले दिल्ली-अलवर राष्ट्रीय राजमार्ग 248ए को फोरलेन बनाने का काम अब गति पकड़ रहा है। लंबे समय से लंबित इस परियोजना पर अब तेजी से पैमाइश का काम चल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत इस योजना से न सिर्फ सड़क हादसों में कमी आने की उम्मीद है, बल्कि क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलेगी।
दिल्ली-अलवर राष्ट्रीय राजमार्ग 248ए के उन्नयन को केंद्र सरकार ने वर्ष 2024-25 के वार्षिक प्लान में शामिल किया है। 31 मार्च 2025 को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए करीब 480.44 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया। यह मार्ग गुरुग्राम से लेकर अलवर सीमा तक लगभग 46 किलोमीटर लंबा है, जिसे अब फोरलेन में विकसित किया जाएगा।
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वन विभाग से मिली सशर्त अनुमति :
इस परियोजना के रास्ते में आने वाली सबसे बड़ी बाधा वन भूमि की अनुमति थी, जो अब दूर हो चुकी है। वन विभाग ने सशर्त मंजूरी देते हुए लगभग 113 एकड़ वन भूमि के डायवर्जन की अनुमति प्रदान कर दी है। इससे निर्माण कार्य में आने वाली प्रशासनिक रुकावटें खत्म हो गई हैं और काम ने रफ्तार पकड़ ली है।
खूनी हाईवे की पहचान से मिलेगी मुक्ति :
यह मार्ग लंबे समय से खूनी हाईवे के नाम से कुख्यात रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले डेढ़ दशक में इस सड़क पर करीब 2200 लोगों की जान जा चुकी है। संकरी सड़क, भारी ट्रैफिक और अपर्याप्त सुरक्षा उपायों के कारण यहां अक्सर गंभीर हादसे होते रहे हैं। फोरलेन बनने के बाद इस काले इतिहास पर विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
- व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा :
सड़क के चौड़ीकरण से क्षेत्र में यातायात सुगम होगा, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, बेहतर कनेक्टिविटी के कारण पर्यटन के अवसर भी बढ़ेंगे। नूंह और आसपास के क्षेत्रों के लिए यह परियोजना आर्थिक विकास का नया द्वार खोल सकती है।
दो साल में पूरा करने का लक्ष्य :
निर्माण एजेंसी को इस परियोजना को दो वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि निर्धारित समय में कार्य पूरा होने पर क्षेत्र की यातायात व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हो जाएगी।
स्थानीय लोगों की उम्मीदें बढ़ीं :
लंबे समय से इस सड़क के सुधार की मांग कर रहे स्थानीय लोगों में अब खुशी का माहौल है। उनका मानना है कि फोरलेन बनने से न केवल हादसों में कमी आएगी, बल्कि रोजमर्रा की आवाजाही भी आसान और सुरक्षित हो जाएगी।
जल्द ही पैमाइश का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद पेड़ों की कटाई का कार्य शुरू हो जाएगा। कोशिश है कि जल्द सभी कामों को निपटाया जाए और चौड़ीकरण का कार्य शुरू करा दिया जाए।
- प्रदीप सिंधु, एक्सईएन लोक निर्माण विभाग।