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Gurugram News: युद्ध विराम के बाद भी नहीं संभला कारोबार, गोदामों में अटका माल
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स्थानीय बाजारों में मांग घटने से प्रभावित हुआ व्यापार
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच तनाव में कमी आने के बावजूद स्थानीय बाजारों में सुस्ती छाई हुई है। जिले के कारोबार पर इसका नकारात्मक असर अभी भी साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। स्थानीय बाजारों में मांग घटने के कारण व्यापारियों का माल अभी भी गोदामों में ही पड़ा हुआ है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण सप्लाई चेन और उपभोक्ता मांग दोनों प्रभावित हुई हैं। भले ही युद्ध विराम हो गया हो लेकिन बाजार अभी तक सामान्य स्थिति में नहीं लौट पाया है। जिले के कई थोक और खुदरा व्यापारियों के गोदाम माल से भरे पड़े हैं। बिक्री कम होने के कारण नया माल मंगाने में भी व्यापारी हिचकिचा रहे हैं। इससे बाजार में ठहराव की स्थिति बनी हुई है। दुकानदारों का मानना है कि पिछले कुछ हफ्तों से बिक्री में 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा और होलसेल सामान के व्यापार पर इसका ज्यादा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लगेगा। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के स्थिर होने के बाद ही बाजार में सुधार की उम्मीद है।
बाहर से आने वाले ऑर्डर हुए बंद
पहले जहां रोजाना अच्छी बिक्री हो जाती थी, अब ग्राहक बहुत कम आ रहे हैं। गोदाम में माल भरा पड़ा है और खर्चे लगातार बढ़ रहे हैं। -राकेश आहुजा, कपड़ा व्यापारी
युद्ध के चलते लोगों ने खरीदारी टाल दी थी। अब भी ग्राहक जरूरी सामान ही खरीद रहे हैं, जिससे हमारे स्टॉक की खपत नहीं हो पा रही है। -बाल किशन, होलसेल व्यापारी
बाहर से आने वाले ऑर्डर लगभग बंद हो गए हैं। माल अटका हुआ है और भुगतान भी समय पर नहीं मिल रहा, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। -मुकेश अग्रवाल, जनरल स्टोर संचालक
अब तो रोजमर्रा के सामान की बिक्री भी नहीं हो रही है, इससे मुनाफा घट गया है। नए ऑर्डर भी नहीं आ रहे हैं, जिस कारण पैसा बाजार में रुक गया है। -अमर सिंह, कारोबारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच तनाव में कमी आने के बावजूद स्थानीय बाजारों में सुस्ती छाई हुई है। जिले के कारोबार पर इसका नकारात्मक असर अभी भी साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। स्थानीय बाजारों में मांग घटने के कारण व्यापारियों का माल अभी भी गोदामों में ही पड़ा हुआ है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण सप्लाई चेन और उपभोक्ता मांग दोनों प्रभावित हुई हैं। भले ही युद्ध विराम हो गया हो लेकिन बाजार अभी तक सामान्य स्थिति में नहीं लौट पाया है। जिले के कई थोक और खुदरा व्यापारियों के गोदाम माल से भरे पड़े हैं। बिक्री कम होने के कारण नया माल मंगाने में भी व्यापारी हिचकिचा रहे हैं। इससे बाजार में ठहराव की स्थिति बनी हुई है। दुकानदारों का मानना है कि पिछले कुछ हफ्तों से बिक्री में 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा और होलसेल सामान के व्यापार पर इसका ज्यादा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लगेगा। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के स्थिर होने के बाद ही बाजार में सुधार की उम्मीद है।
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बाहर से आने वाले ऑर्डर हुए बंद
पहले जहां रोजाना अच्छी बिक्री हो जाती थी, अब ग्राहक बहुत कम आ रहे हैं। गोदाम में माल भरा पड़ा है और खर्चे लगातार बढ़ रहे हैं। -राकेश आहुजा, कपड़ा व्यापारी
युद्ध के चलते लोगों ने खरीदारी टाल दी थी। अब भी ग्राहक जरूरी सामान ही खरीद रहे हैं, जिससे हमारे स्टॉक की खपत नहीं हो पा रही है। -बाल किशन, होलसेल व्यापारी
बाहर से आने वाले ऑर्डर लगभग बंद हो गए हैं। माल अटका हुआ है और भुगतान भी समय पर नहीं मिल रहा, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। -मुकेश अग्रवाल, जनरल स्टोर संचालक
अब तो रोजमर्रा के सामान की बिक्री भी नहीं हो रही है, इससे मुनाफा घट गया है। नए ऑर्डर भी नहीं आ रहे हैं, जिस कारण पैसा बाजार में रुक गया है। -अमर सिंह, कारोबारी