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Gurugram News: बिजली निगम को अतिरिक्त बिल और मानसिक प्रताड़ना के लिए देना होगा मुआवजा
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सात हजार रुपये लिए थे अतिरिक्त, 30 हजार रुपये के मुआवजे के साथ करने होंगे वापस
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बिजली निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए उपभोक्ता के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सेक्टर-17 सी निवासी सत्य वीर शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग की सदस्य ज्योति सिवाच की अदालत ने निगम को गलत तरीके से वसूले गए 7641 वापस करने के साथ-साथ 30,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
क्या है मामला
शिकायतकर्ता सत्य वीर शर्मा ने 2023 में अपने घर का लोड 5 किलोवाट से बढ़ाकर 11 किलोवाट कराया था। मार्च 2024 में उन्हें 38,505 का भारी-भरकम बिल भेजा गया। सिस्टम खराब होने का हवाला देकर निगम ने जुलाई 2024 तक बिल में सुधार नहीं किया, जिससे उपभोक्ता पर सरचार्ज का बोझ बढ़ता गया। साथ ही, सोलर पैनल मीटर की रीडिंग में भी लापरवाही बरती गई।
कोर्ट का आदेश
मामले की सुनवाई के दौरान निगम की ओर से कोई पेश नहीं हुआ। दस्तावेजों के आधार पर आयोग ने निगम को 7,641 की राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया। इसके अलावा, मानसिक परेशानी के लिए 30,000 रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 11,000 रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है।
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गुरुग्राम। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बिजली निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए उपभोक्ता के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सेक्टर-17 सी निवासी सत्य वीर शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग की सदस्य ज्योति सिवाच की अदालत ने निगम को गलत तरीके से वसूले गए 7641 वापस करने के साथ-साथ 30,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
क्या है मामला
शिकायतकर्ता सत्य वीर शर्मा ने 2023 में अपने घर का लोड 5 किलोवाट से बढ़ाकर 11 किलोवाट कराया था। मार्च 2024 में उन्हें 38,505 का भारी-भरकम बिल भेजा गया। सिस्टम खराब होने का हवाला देकर निगम ने जुलाई 2024 तक बिल में सुधार नहीं किया, जिससे उपभोक्ता पर सरचार्ज का बोझ बढ़ता गया। साथ ही, सोलर पैनल मीटर की रीडिंग में भी लापरवाही बरती गई।
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कोर्ट का आदेश
मामले की सुनवाई के दौरान निगम की ओर से कोई पेश नहीं हुआ। दस्तावेजों के आधार पर आयोग ने निगम को 7,641 की राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया। इसके अलावा, मानसिक परेशानी के लिए 30,000 रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 11,000 रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है।