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Gurugram News: कच्चे माल और रसद का संकट छोटे दवा उद्योगों पर अस्तित्व का खतरा
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गुरुग्राम (संवाद)। दवा निर्माण करने वाली कंपनियों के संगठन ने एलपीजी किल्लत को लेकर चिंता जताई है। फार्मा उद्योग के अखिल भारतीय संगठन फेडरेशन ऑफ फार्मा आंत्रप्रेन्योर्स के चेयरमैन और गुरुग्राम के उद्यमी बोधराज सिकरी ने सरकार से फार्मा कंपनियों को सहयोग करने की मांग की है। उन्होेंने मांग की है कि फार्मा सेक्टर के लिए लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जरूरी केमिकल्स के आयात शुल्क में अस्थायी रियायत मिलनी चाहिए। एक तरफ एलपीजी (तरल पेट्रोलियम गैस) और रसायनों की बढ़ती कमी है, तो दूसरी तरफ लॉजिस्टिक्स (माल ढुलाई) की बाधाओं ने दवा उत्पादन की कमर तोड़ दी है। इस संकट का सबसे गहरा असर लघु और मध्यम स्तर की (स्मॉल स्केल) इकाइयों पर पड़ रहा है।
दवा बनाने के लिए सिर्फ मुख्य सॉल्ट (एपीआई) ही काफी नहीं होता उसमें एक्सपिएंट्स (जैसे स्टेबलाइजर्स, फिलर्स और सॉल्वैंट्स) की भी बड़ी भूमिका होती है। एलपीजी से जुड़े पेट्रोकेमिकल डेरिवेटिव्स का उपयोग कई दवाओं की कोटिंग और निर्माण प्रक्रिया में होता है। वर्तमान में इन रसायनों की कमी के कारण उत्पादन ठप होने की कगार पर है।
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