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Gurugram News: बेहाल हुए बेजुबान
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पक्षियों के अस्पताल में कोराइजा, डायरिया और चिकेन पॉक्स का शिकार होकर आ रहे पक्षी
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। नौतपा यानी साल के सबसे ज्यादा गर्म नौ दिन की शुरुआत हो चुकी है। मनुष्यों के लिए गर्मी से बचाव के कई उपाय हैं लेकिन बेजुबान पशु पक्षियों के लिए यह समय और ज्यादा मुश्किल हो गया है। जैकबपुरा स्थित पक्षी अस्पताल में गर्मी के कारण बेहोश होकर लाए जाने वाले पक्षियों की संख्या रोजाना 9 से 10 हो गई है।
अस्पताल में पक्षियों की देखरेख करने वाले डाॅ. राजकुमार ने बताया कि काफी संख्या में कबूतर, गौरया, शार्दूल व तोते के बच्चे गर्मी से बेहोश होने के कारण लोग लेकर आ रहे हैं। इसके अलावा पक्षियों में चिकन पॉक्स, कोराइजा (आंखों की बीमारी), डायरिया भी पाया जा रहा है। गर्मी के मौसम में पक्षियों में होने वाले आंखों के इंफेक्शन के कारण पक्षी अंधे भी हो जाता है।
अपने घर में दो मिट्टी के बड़े पात्र खरीदें, एक छत पर पक्षियों के लिए रख दें और एक घर के बाहर कुत्तों के लिए रख दें। ऐसी जगह पानी रखें जहां छाया हो। पक्षियों का कलरव बना रहेगा। कुत्ते नहीं काटेंगे। इस मौसम में सबसे अच्छा यही कार्य है। गर्मी का कहर पशु-पक्षियों के लिए काल बन रहा है। -डॉ. एसपी गौतम, चेयरमैन एनिमल वेलफेयर डॉक्टर्स फोरम
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। नौतपा यानी साल के सबसे ज्यादा गर्म नौ दिन की शुरुआत हो चुकी है। मनुष्यों के लिए गर्मी से बचाव के कई उपाय हैं लेकिन बेजुबान पशु पक्षियों के लिए यह समय और ज्यादा मुश्किल हो गया है। जैकबपुरा स्थित पक्षी अस्पताल में गर्मी के कारण बेहोश होकर लाए जाने वाले पक्षियों की संख्या रोजाना 9 से 10 हो गई है।
अस्पताल में पक्षियों की देखरेख करने वाले डाॅ. राजकुमार ने बताया कि काफी संख्या में कबूतर, गौरया, शार्दूल व तोते के बच्चे गर्मी से बेहोश होने के कारण लोग लेकर आ रहे हैं। इसके अलावा पक्षियों में चिकन पॉक्स, कोराइजा (आंखों की बीमारी), डायरिया भी पाया जा रहा है। गर्मी के मौसम में पक्षियों में होने वाले आंखों के इंफेक्शन के कारण पक्षी अंधे भी हो जाता है।
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अपने घर में दो मिट्टी के बड़े पात्र खरीदें, एक छत पर पक्षियों के लिए रख दें और एक घर के बाहर कुत्तों के लिए रख दें। ऐसी जगह पानी रखें जहां छाया हो। पक्षियों का कलरव बना रहेगा। कुत्ते नहीं काटेंगे। इस मौसम में सबसे अच्छा यही कार्य है। गर्मी का कहर पशु-पक्षियों के लिए काल बन रहा है। -डॉ. एसपी गौतम, चेयरमैन एनिमल वेलफेयर डॉक्टर्स फोरम