{"_id":"69beab570d65d86bfc05834f","slug":"workers-wandering-from-door-to-door-for-gas-cylinders-gurgaon-news-c-24-1-gur1002-82711-2026-03-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: गैस सिलिंडर के लिए दर-दर भटक रहे मजदूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: गैस सिलिंडर के लिए दर-दर भटक रहे मजदूर
विज्ञापन
विज्ञापन
गैस एजेंसियों के चक्कर काटने के बावजूद खाली हाथ लौटना पड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
बादशाहपुर। पिछले कई दिन से क्षेत्र में गैस सिलिंडरों की भारी किल्लत के चलते मजदूरों का आरोप है कि गैस एजेंसियों के चक्कर काटने के बावजूद उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। कई बार घंटों लाइन में लगने के बाद पता चलता है कि बुकिंग बंद है तो कहीं एजेंसियां ही बंद मिल रही हैं।
दो वक्त की रोटी बनाना हुआ मुश्किल
पिछले तीन दिन से सुबह काम पर जाने के बजाय गैस की दुकान पर जा रहा हूं लेकिन हर बार शटर गिरा मिलता है। घर में चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है, जिसमे काम पर पहुंचने में देरी हो रही हैं। - शनि कुमार, मजदूर
एजेंसी जाने पर कहा जाता है कि अभी बुकिंग नहीं हो रही। ऑनलाइन का हमें पता नहीं और ऑफलाइन कोई सुन नहीं रहा। दो वक्त की रोटी बनाना मुश्किल हो गया है। - सतीश, मजदूर
एक दिन काम छोड़ने का मतलब है 500 रुपये का नुकसान। तीन दिन से सिलेंडर के चक्कर में चक्कर काट रहा हूं, न सिलिंडर मिल पा रहा है और न दिहाड़ी पर जा पा रहे हैं। - हंसराज, मजदूर
चाय बनाने के लिए सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं, जिस कारण दुकान पर काम ठप पड़ा हुआ है। जल्द गैस सिलिंडर मिलने शुरू नहीं हुए हैं तो दुकान बंद कर गांव वापस जाना पड़ेगा। - अनिल, दुकानदार
Trending Videos
संवाद न्यूज एजेंसी
बादशाहपुर। पिछले कई दिन से क्षेत्र में गैस सिलिंडरों की भारी किल्लत के चलते मजदूरों का आरोप है कि गैस एजेंसियों के चक्कर काटने के बावजूद उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। कई बार घंटों लाइन में लगने के बाद पता चलता है कि बुकिंग बंद है तो कहीं एजेंसियां ही बंद मिल रही हैं।
दो वक्त की रोटी बनाना हुआ मुश्किल
पिछले तीन दिन से सुबह काम पर जाने के बजाय गैस की दुकान पर जा रहा हूं लेकिन हर बार शटर गिरा मिलता है। घर में चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है, जिसमे काम पर पहुंचने में देरी हो रही हैं। - शनि कुमार, मजदूर
विज्ञापन
विज्ञापन
एजेंसी जाने पर कहा जाता है कि अभी बुकिंग नहीं हो रही। ऑनलाइन का हमें पता नहीं और ऑफलाइन कोई सुन नहीं रहा। दो वक्त की रोटी बनाना मुश्किल हो गया है। - सतीश, मजदूर
एक दिन काम छोड़ने का मतलब है 500 रुपये का नुकसान। तीन दिन से सिलेंडर के चक्कर में चक्कर काट रहा हूं, न सिलिंडर मिल पा रहा है और न दिहाड़ी पर जा पा रहे हैं। - हंसराज, मजदूर
चाय बनाने के लिए सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं, जिस कारण दुकान पर काम ठप पड़ा हुआ है। जल्द गैस सिलिंडर मिलने शुरू नहीं हुए हैं तो दुकान बंद कर गांव वापस जाना पड़ेगा। - अनिल, दुकानदार