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खुद पर और भारत की संस्थाओं पर भरोसा रखें, भविष्य आपको गढ़ना है: एलजी
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-किरोड़ीमल कॉलेज के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में बोले एलजी, कहा-मैं भी दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्र रहा
-एलजी ने इनक्यूबेशन सेंटर का किया उद्घाटन, शोध, नवाचार और उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में छात्रों से खुद पर, भारत की संस्थाओं और देश में उपलब्ध अवसरों पर भरोसा रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भविष्य छात्रों के हाथ में है और उन्हें उत्कृष्टता के साथ ईमानदारी, अनुशासन और जनसेवा की भावना को भी जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
उपराज्यपाल ने अपने छात्र जीवन को याद करते हुए कहा कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय के ही छात्र रहे हैं। उन्होंने स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई दिल्ली में ही पूरी की। देश-विदेश में जो भी योगदान दे सके, उसकी नींव दिल्ली विश्वविद्यालय ने ही रखी। इसलिए छात्रों को अपनी क्षमता और देश की शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास रखना चाहिए।
किरोड़ीमल कॉलेज की उपलब्धियों की सराहना
उन्होंने कहा कि किरोड़ीमल कॉलेज सात दशक से अधिक समय से दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शामिल है। इसकी पहचान केवल शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करने से बनी है जिन्होंने प्रशासन, विज्ञान, शिक्षा, उद्योग, कला और जनसेवा के क्षेत्र में देश का नाम रोशन किया है। किसी भी संस्थान की वास्तविक पहचान उसके भवनों या रैंकिंग से नहीं, बल्कि वहां से निकलने वाले विद्यार्थियों से होती है।
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शोध और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
कार्यक्रम के दौरान उपराज्यपाल ने किरोड़ीमल कॉलेज के इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया। साथ ही चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के तहत शोध पत्र प्रकाशित करने वाले विद्यार्थियों और उनके शिक्षकों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विश्वविद्यालयों को शोध, नवाचार और उद्यमिता के केंद्र के रूप में आगे बढ़ना होगा। विज्ञान भवन में नई लिफ्ट का उद्घाटन करते हुए उन्होंने इसे समावेशी और सुगम परिसर की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
जिज्ञासा और जनसेवा की भावना अपनाने की सलाह
उपराज्यपाल ने छात्रों से बौद्धिक जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच और स्वतंत्र विचार विकसित करने को कहा। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता तभी सार्थक होगी, जब उसके साथ ईमानदारी, अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी जुड़ी हो। उन्होंने नए विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका शैक्षणिक सफर सीखने, सेवा और उत्कृष्टता से भरपूर होना चाहिए।
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-एलजी ने इनक्यूबेशन सेंटर का किया उद्घाटन, शोध, नवाचार और उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में छात्रों से खुद पर, भारत की संस्थाओं और देश में उपलब्ध अवसरों पर भरोसा रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भविष्य छात्रों के हाथ में है और उन्हें उत्कृष्टता के साथ ईमानदारी, अनुशासन और जनसेवा की भावना को भी जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
उपराज्यपाल ने अपने छात्र जीवन को याद करते हुए कहा कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय के ही छात्र रहे हैं। उन्होंने स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई दिल्ली में ही पूरी की। देश-विदेश में जो भी योगदान दे सके, उसकी नींव दिल्ली विश्वविद्यालय ने ही रखी। इसलिए छात्रों को अपनी क्षमता और देश की शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास रखना चाहिए।
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किरोड़ीमल कॉलेज की उपलब्धियों की सराहना
उन्होंने कहा कि किरोड़ीमल कॉलेज सात दशक से अधिक समय से दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शामिल है। इसकी पहचान केवल शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करने से बनी है जिन्होंने प्रशासन, विज्ञान, शिक्षा, उद्योग, कला और जनसेवा के क्षेत्र में देश का नाम रोशन किया है। किसी भी संस्थान की वास्तविक पहचान उसके भवनों या रैंकिंग से नहीं, बल्कि वहां से निकलने वाले विद्यार्थियों से होती है।
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शोध और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
कार्यक्रम के दौरान उपराज्यपाल ने किरोड़ीमल कॉलेज के इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया। साथ ही चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के तहत शोध पत्र प्रकाशित करने वाले विद्यार्थियों और उनके शिक्षकों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विश्वविद्यालयों को शोध, नवाचार और उद्यमिता के केंद्र के रूप में आगे बढ़ना होगा। विज्ञान भवन में नई लिफ्ट का उद्घाटन करते हुए उन्होंने इसे समावेशी और सुगम परिसर की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
जिज्ञासा और जनसेवा की भावना अपनाने की सलाह
उपराज्यपाल ने छात्रों से बौद्धिक जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच और स्वतंत्र विचार विकसित करने को कहा। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता तभी सार्थक होगी, जब उसके साथ ईमानदारी, अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी जुड़ी हो। उन्होंने नए विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका शैक्षणिक सफर सीखने, सेवा और उत्कृष्टता से भरपूर होना चाहिए।