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Delhi NCR News: विवाहित जिम ट्रेनर को दी जमानत, कोर्ट ने कहा-अपराध से अलग है नैतिकता
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक विवाहित जिम ट्रेनर को रेप और ब्लैकमेलिंग के मामले में जमानत दे दी। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की एकलपीठ ने टिप्पणी की कि नैतिकता को अपराध से अलग रखना चाहिए, खासकर व्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला होने पर। अदालत ने कहा कि आरोपी द्वारा पेश किए फोटो और वीडियो से प्रथम दृष्टया लगता है कि दोनों के बीच संबंध सहमति वाले थे। शिकायतकर्ता (एक वकील) ने आरोप लगाया था कि वह दिल्ली के एक जिम में आरोपी से मिली। दोनों के बीच दोस्ती हुई। महिला का आरोप है कि आरोपी ने ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर उसे बेहोश किया, फिर गाजियाबाद के एक ओयो होटल में ले जाकर बलात्कार किया और बिना सहमति के फोटो खींचे। बाद में उन फोटोज के जरिए ब्लैकमेल कर बार-बार शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया और 65 हजार की रकम भी वसूली। आरोपी ने अदालत में दावा किया कि पूरा संबंध सहमति पर आधारित था और रिश्ता खराब होने के बाद झूठी शिकायत की गई। उसने अदालत में फोटो और वीडियो क्लिप पेश किए, जिनमें दोनों रोमांटिक मुद्रा में दिख रहे थे।
न्यायमूर्ति कठपालिया ने कहा कि शिकायतकर्ता वयस्क हैं और प्रैक्टिसिंग वकील हैं। जांच में आरोपी के फोन से कोई आपत्तिजनक फोटो या वीडियो बरामद नहीं हुए। अदालत ने राज्य पक्ष की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि विवाहित व्यक्ति होने और अलग धर्म के होने के कारण आरोपी को जमानत नहीं मिलनी चाहिए।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक विवाहित जिम ट्रेनर को रेप और ब्लैकमेलिंग के मामले में जमानत दे दी। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की एकलपीठ ने टिप्पणी की कि नैतिकता को अपराध से अलग रखना चाहिए, खासकर व्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला होने पर। अदालत ने कहा कि आरोपी द्वारा पेश किए फोटो और वीडियो से प्रथम दृष्टया लगता है कि दोनों के बीच संबंध सहमति वाले थे। शिकायतकर्ता (एक वकील) ने आरोप लगाया था कि वह दिल्ली के एक जिम में आरोपी से मिली। दोनों के बीच दोस्ती हुई। महिला का आरोप है कि आरोपी ने ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर उसे बेहोश किया, फिर गाजियाबाद के एक ओयो होटल में ले जाकर बलात्कार किया और बिना सहमति के फोटो खींचे। बाद में उन फोटोज के जरिए ब्लैकमेल कर बार-बार शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया और 65 हजार की रकम भी वसूली। आरोपी ने अदालत में दावा किया कि पूरा संबंध सहमति पर आधारित था और रिश्ता खराब होने के बाद झूठी शिकायत की गई। उसने अदालत में फोटो और वीडियो क्लिप पेश किए, जिनमें दोनों रोमांटिक मुद्रा में दिख रहे थे।
न्यायमूर्ति कठपालिया ने कहा कि शिकायतकर्ता वयस्क हैं और प्रैक्टिसिंग वकील हैं। जांच में आरोपी के फोन से कोई आपत्तिजनक फोटो या वीडियो बरामद नहीं हुए। अदालत ने राज्य पक्ष की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि विवाहित व्यक्ति होने और अलग धर्म के होने के कारण आरोपी को जमानत नहीं मिलनी चाहिए।
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