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Delhi: द्वारका मल्टी-स्पोर्ट्स एरिना को एनजीटी का झटका, डीम्ड पर्यावरण मंजूरी का दावा खारिज; की सख्त टिप्पणी

अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 23 Apr 2026 02:50 AM IST
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सार

अधिकरण ने स्पष्ट कहा कि पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त किए बिना किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सकता और डीम्ड क्लियरेंस का सहारा लेकर पर्यावरण कानूनों से बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

NGT sets back Dwarka Multi-Sports Arena, rejects claim for deemed environmental clearance
एनजीटी - फोटो : संवाद
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विस्तार

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली के द्वारका सेक्टर-19बी में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मल्टी-स्पोर्ट्स एरिना परियोजना को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए परियोजना प्रस्तावकों के डीम्ड एनवायरनमेंट क्लियरेंस यानी मानी गई पर्यावरणीय मंजूरी के दावे को खारिज कर दिया है। अधिकरण ने स्पष्ट कहा कि पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त किए बिना किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सकता और डीम्ड क्लियरेंस का सहारा लेकर पर्यावरण कानूनों से बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती। साथ ही एनजीटी ने अवैध पेड़ कटाई, अनधिकृत निर्माण गतिविधियों और पर्यावरणीय उल्लंघनों की जांच कर कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए हैं।

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यह परियोजना वर्ल्डस्ट्रीट स्पोर्ट्स सेंटर लि. और ओमेक्स लि. द्वारा विकसित की जा रही है। द्वारका स्पोर्ट्स एरिना प्रोजेक्ट, जिसे ओमेक्स स्टेट के नाम से भी जाना जाता है,सेक्टर -19बी में 50 एकड़ से अधिक भूमि पर प्रस्तावित है। इसे एक अत्याधुनिक फाइव-इन-वन डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है।परियोजना में 30,000 दर्शकों की क्षमता वाला क्रिकेट और फुटबॉल स्टेडियम, रिटेल स्पेस, होटल और विभिन्न खेल सुविधाएं शामिल हैं। इनमें स्विमिंग और बैडमिंटन जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं।एनजीटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि परियोजना को अब तक केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है। परिवेश पोर्टल पर उपलब्ध स्थिति के अनुसार परियोजना से संबंधित आवश्यक दस्तावेज अभी लंबित हैं और अंतिम मंजूरी जारी नहीं की गई है।
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अधिकरण ने कहा कि डिम्ड एनवायरनमेंट क्लियरेंस कोई अलग प्रकार की मंजूरी नहीं है, बल्कि यह एक सीमित कानूनी स्थिति है, जिसे केवल तभी स्वीकार किया जा सकता है जब पर्यावरणीय मंजूरी की सभी आवश्यक शर्तें पूरी तरह पूरी हो चुकी हों।परियोजना प्रस्तावकों ने पर्यावरणीय प्रभाव आकलन यानी ईआईए अधिसूचना 2006 के क्लॉज 8(iii) के तहत डिम्ड ईसी का दावा किया था।एनजीटी ने इस दावे को अस्वीकार करते हुए कहा कि यह प्रावधान तभी लागू होता है जब आवेदन पूरी तरह जमा किया गया हो, सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हों और विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति यानी ईएसी की स्पष्ट, बिना शर्त और अंतिम सिफारिश उपलब्ध हो।पीठ ने कहा कि इस मामले में ईएसी की सिफारिश शर्तों के साथ थी। इसमें लगभग 2000 पेड़ों की कटाई से पहले आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य बताया गया था। इसलिए इसे पूर्ण और बिना शर्त स्वीकृति नहीं माना जा सकता।

अवैध पेड़ कटाई और निर्माण गतिविधियों पर सख्त टिप्पणी
एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि बिना अनुमति पेड़ों की कटाई के प्रमाण सामने आए हैं, जिनमें सैटेलाइट इमेजरी भी शामिल है। इसके अलावा परियोजना स्थल पर अनधिकृत निर्माण गतिविधियां भी पाई गई हैं।अधिकरण ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि डिम्ड क्लियरेंस का उपयोग पर्यावरणीय कानूनों को दरकिनार करने के लिए नहीं किया जा सकता। पीठ ने दोहराया कि किसी भी परियोजना में निर्माण कार्य शुरू करने से पहले पर्यावरणीय स्वीकृति अनिवार्य है।पीठ ने कहा, 2006 की ईआईए अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परियोजनाएं और गतिविधियां तभी निर्माण कार्य प्रारंभ करें जब परियोजना प्रस्तावक ने पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त कर ली हो। इसी कारण अधिसूचना के पैरा 2 में नियामक प्राधिकरण से पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य किया गया है।

डीम्ड परमिशन नियमों से ऊपर नहीं
अधिकरण ने अपने आदेश में यह भी कहा कि 2006 की अधिसूचना की पूरी व्यवस्था इस अनिवार्य शर्त में किसी प्रकार की ढील या छूट की अनुमति नहीं देती। इसलिए यह स्पष्ट और निर्विवाद कानूनी दायित्व है कि परियोजना प्रस्तावक किसी भी परियोजना संबंधी गतिविधि को शुरू करने से पहले पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करे।पीठ ने कहा, डिम्ड परमिशन नियमों और विनियमों के विपरीत नहीं हो सकती। कोई भी डिम्ड परमिशन संबंधित नियमों और विनियमों के खिलाफ जाकर वैध नहीं मानी जा सकती।

जांच और कार्रवाई के लिए 8 सप्ताह का समय
एनजीटी ने डीएफओ को तत्काल साइट निरीक्षण कर अवैध पेड़ कटाई की जांच करने और 8 सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।इसके साथ ही दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति यानी डीपीसीसी को परियोजना में हुए पर्यावरणीय उल्लंघनों का आकलन कर दंडात्मक कार्रवाई करने को कहा गया है। वहीं केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को परियोजना पर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है।पीठ ने सभी संबंधित प्राधिकरणों को तीन महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही अधिकरण ने मामले का निस्तारण कर दिया।

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