{"_id":"6a6dfa5005beb354ae04717b","slug":"gang-that-stole-bikes-in-two-minutes-busted-six-arrested-noida-news-c-1-noi1095-4564837-2026-08-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: दो मिनट में बाइक चुराने वाले गिरोह का पर्दाफाश, छह गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: दो मिनट में बाइक चुराने वाले गिरोह का पर्दाफाश, छह गिरफ्तार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली-एनसीआर में था सक्रिय, 15 बाइक बरामद बरामद
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। कोतवाली सेक्टर-20 पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय एक वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। इसमें शामिल बदमाश महज दो मिनट में बाइक चुराते थे। पुलिस ने छह बदमाशों को गिरफ्तार कर निशानदेही पर 15 चोरी की बाइक बरामद की है। पुलिस गिरोह के अन्य बदमाशों की तलाश कर रही है।
एसीपी प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों की पहचान फर्रुखाबाद निवासी राजीव चौहान, गाजियाबाद के खोड़ा निवासी अजय कुमार, फर्रुखाबाद निवासी सचिन कुमार, बरौला निवासी कृष्णा उर्फ शेरा, बांदा निवासी विजय कुमार और राजस्थान के करौली निवासी बृजेश कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने गिरोह के एक अन्य सदस्य राहुल, निवासी राजस्थान, को फरार घोषित किया है।
जांच में सामने आया कि गिरोह का संचालन राजीव चौहान करता था, जो दिल्ली के नांगलोई में रह रहा था। उसके खिलाफ वाहन चोरी समेत करीब 20 मुकदमे दर्ज हैं। वहीं अजय, सचिन और कृष्णा उर्फ शेरा के खिलाफ पांच-पांच, विजय कुमार के खिलाफ छह तथा बृजेश कुमार के खिलाफ पांच आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपी कई बार जेल जा चुके हैं, लेकिन रिहा होने के बाद दोबारा इसी अपराध में सक्रिय हो गए। पुलिस के मुताबिक, अधिकतर वाहन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बिना दस्तावेज सस्ते दाम पर खपाए जाते थे। जिन वाहनों की बिक्री नहीं हो पाती थी, उन्हें खोलकर इंजन, टायर, बैटरी और अन्य पार्ट्स अलग-अलग बेच दिए जाते थे।
विज्ञापन
ऐसे चलता था चोरी का पूरा नेटवर्क
गिरोह के सदस्य पहले भीड़भाड़ में खड़ी बाइकों को निशाना बनाते थे। चोरी के तुरंत बाद वाहन को किसी सुनसान स्थान पर छिपा देते थे ताकि पुलिस की निगरानी से बचा जा सके। इसके बाद परिचितों और बिचौलियों के माध्यम से खरीदार खोजे जाते थे। हक मिलने पर बाइक आठ से 12 हजार रुपये के बीच बेच दी जाती थी। यदि कुछ दिनों तक ग्राहक नहीं मिलता, तो बाइक को खोलकर उसके इंजन, बैटरी, टायर और अन्य पुर्जे अलग-अलग बेच दिए जाते थे। इस तरह गिरोह एक ही वाहन से कई माध्यमों से कमाई करता था।
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। कोतवाली सेक्टर-20 पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय एक वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। इसमें शामिल बदमाश महज दो मिनट में बाइक चुराते थे। पुलिस ने छह बदमाशों को गिरफ्तार कर निशानदेही पर 15 चोरी की बाइक बरामद की है। पुलिस गिरोह के अन्य बदमाशों की तलाश कर रही है।
एसीपी प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों की पहचान फर्रुखाबाद निवासी राजीव चौहान, गाजियाबाद के खोड़ा निवासी अजय कुमार, फर्रुखाबाद निवासी सचिन कुमार, बरौला निवासी कृष्णा उर्फ शेरा, बांदा निवासी विजय कुमार और राजस्थान के करौली निवासी बृजेश कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने गिरोह के एक अन्य सदस्य राहुल, निवासी राजस्थान, को फरार घोषित किया है।
विज्ञापन
जांच में सामने आया कि गिरोह का संचालन राजीव चौहान करता था, जो दिल्ली के नांगलोई में रह रहा था। उसके खिलाफ वाहन चोरी समेत करीब 20 मुकदमे दर्ज हैं। वहीं अजय, सचिन और कृष्णा उर्फ शेरा के खिलाफ पांच-पांच, विजय कुमार के खिलाफ छह तथा बृजेश कुमार के खिलाफ पांच आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपी कई बार जेल जा चुके हैं, लेकिन रिहा होने के बाद दोबारा इसी अपराध में सक्रिय हो गए। पुलिस के मुताबिक, अधिकतर वाहन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बिना दस्तावेज सस्ते दाम पर खपाए जाते थे। जिन वाहनों की बिक्री नहीं हो पाती थी, उन्हें खोलकर इंजन, टायर, बैटरी और अन्य पार्ट्स अलग-अलग बेच दिए जाते थे।
विज्ञापन
ऐसे चलता था चोरी का पूरा नेटवर्क
गिरोह के सदस्य पहले भीड़भाड़ में खड़ी बाइकों को निशाना बनाते थे। चोरी के तुरंत बाद वाहन को किसी सुनसान स्थान पर छिपा देते थे ताकि पुलिस की निगरानी से बचा जा सके। इसके बाद परिचितों और बिचौलियों के माध्यम से खरीदार खोजे जाते थे। हक मिलने पर बाइक आठ से 12 हजार रुपये के बीच बेच दी जाती थी। यदि कुछ दिनों तक ग्राहक नहीं मिलता, तो बाइक को खोलकर उसके इंजन, बैटरी, टायर और अन्य पुर्जे अलग-अलग बेच दिए जाते थे। इस तरह गिरोह एक ही वाहन से कई माध्यमों से कमाई करता था।