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Noida News: बिना ठोस आधार स्वास्थ्य बीमा क्लेम खारिज नहीं कर सकती कंपनी
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जिला उपभोक्ता आयोग
बिना ठोस आधार स्वास्थ्य बीमा क्लेम खारिज नहीं कर सकती कंपनी
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। बीमा कंपनी बिना ठोस और पर्याप्त आधार के इलाज का दावा खारिज नहीं कर सकती। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने स्वास्थ्य बीमा दावों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को बीमित के इलाज पर हुए खर्च का भुगतान 30 दिनों के भीतर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित करने का आदेश दिया है।
ग्रेटर नोएडा के जुनपत गांव निवासी सचिन ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी से अपने और अपने पिता के लिए पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। 15 दिसंबर 2022 को सचिन की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें बीटा-2 स्थित कुमार अस्पताल में भर्ती कराया गया। 19 दिसंबर तक चले इलाज के बाद अस्पताल ने 43 हजार रुपये का बिल बनाया। भर्ती के दौरान बीमा कंपनी ने पहले 34,100 रुपये के कैशलेस उपचार को मंजूरी दी, लेकिन बाद में यह स्वीकृति निरस्त कर दी। सचिन ने जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर कर इलाज पर हुए खर्च की प्रतिपूर्ति की मांग की।
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दावा किया कि मेडिकल दस्तावेजों में कई विसंगतियां थीं। कंपनी के अनुसार रिकॉर्ड में बुखार न होने के बावजूद पैरासिटामोल इंजेक्शन दिए जाने, तापमान संबंधी विवरण में असंगतियां और अन्य त्रुटियां पाई गईं। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद माना कि शिकायतकर्ता ने वैध स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। अचानक डेंगू होने और स्वास्थ्य बिगड़ने पर चिकित्सक ने उन्हें भर्ती होने की सलाह दी थी। आयोग ने कहा कि मरीज को भर्ती करने की आवश्यकता का निर्णय चिकित्सक की विशेषज्ञता का विषय है और रिकॉर्ड से ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि शिकायतकर्ता ने बीमारी छिपाई या बीमा कंपनी के साथ धोखाधड़ी की। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीमा कंपनी ने बिना पर्याप्त कारण बीमा दावा अस्वीकार कर सेवा में कमी की है। इसलिए कंपनी 30 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को इलाज पर हुए 56,372 रुपये का भुगतान छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित करेगी।
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बिना ठोस आधार स्वास्थ्य बीमा क्लेम खारिज नहीं कर सकती कंपनी
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। बीमा कंपनी बिना ठोस और पर्याप्त आधार के इलाज का दावा खारिज नहीं कर सकती। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने स्वास्थ्य बीमा दावों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को बीमित के इलाज पर हुए खर्च का भुगतान 30 दिनों के भीतर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित करने का आदेश दिया है।
ग्रेटर नोएडा के जुनपत गांव निवासी सचिन ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी से अपने और अपने पिता के लिए पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। 15 दिसंबर 2022 को सचिन की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें बीटा-2 स्थित कुमार अस्पताल में भर्ती कराया गया। 19 दिसंबर तक चले इलाज के बाद अस्पताल ने 43 हजार रुपये का बिल बनाया। भर्ती के दौरान बीमा कंपनी ने पहले 34,100 रुपये के कैशलेस उपचार को मंजूरी दी, लेकिन बाद में यह स्वीकृति निरस्त कर दी। सचिन ने जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर कर इलाज पर हुए खर्च की प्रतिपूर्ति की मांग की।
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सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दावा किया कि मेडिकल दस्तावेजों में कई विसंगतियां थीं। कंपनी के अनुसार रिकॉर्ड में बुखार न होने के बावजूद पैरासिटामोल इंजेक्शन दिए जाने, तापमान संबंधी विवरण में असंगतियां और अन्य त्रुटियां पाई गईं। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद माना कि शिकायतकर्ता ने वैध स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। अचानक डेंगू होने और स्वास्थ्य बिगड़ने पर चिकित्सक ने उन्हें भर्ती होने की सलाह दी थी। आयोग ने कहा कि मरीज को भर्ती करने की आवश्यकता का निर्णय चिकित्सक की विशेषज्ञता का विषय है और रिकॉर्ड से ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि शिकायतकर्ता ने बीमारी छिपाई या बीमा कंपनी के साथ धोखाधड़ी की। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीमा कंपनी ने बिना पर्याप्त कारण बीमा दावा अस्वीकार कर सेवा में कमी की है। इसलिए कंपनी 30 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को इलाज पर हुए 56,372 रुपये का भुगतान छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित करेगी।
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