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Noida News: प्लॉट पर मालिकाना हक बरकरार
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सिविल अदालत ने छपरौली बांगर गांव स्थित करीब 180 वर्ग गज के विवादित प्लॉट के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए वादी के पक्ष में निर्णय दिया है। न्यायालय में छपरौला बांगर निवासी वादी महेश ने अपने भाइयों राजेंद्र, विनोद, करतार और रामे के खिलाफ वाद दायर किया था। उनके पिता जयचंद ने अपने जीवनकाल में ही अपनी समस्त संपत्ति पांचों पुत्रों के बीच बराबर-बराबर बांट दी थी। सभी को उनके हिस्से की संपत्ति पर कब्जा भी दे दिया था। इसी बंटवारे में छपरौली बांगर स्थित लगभग 180 वर्ग गज का प्लॉट उसके हिस्से में आया था, जिस पर वो लंबे समय से काबिज है और वहां दुकानें बनाकर पीछे कमरों का निर्माण भी करा रहा है। विवादित प्लॉट मुख्य सड़क पर स्थित होने के कारण उसकी कीमत काफी बढ़ चुकी है। इसी कारण प्रतिवादी भाइयों की नीयत बदल गई और वे संपत्ति पर अपना दावा करने लगे। 27 फरवरी 2021 को जब वो अपनी पत्नी के साथ निर्माण कार्य करा रहा था, तब प्रतिवादी मौके पर पहुंचे और मजदूरों को भगा दिया। उन्होंने निर्माण कार्य रुकवा दिया। इसके बाद महेश ने न्यायालय की शरण ली। अदालत ने प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी किया, लेकिन प्रतिवादी न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सिविल अदालत ने छपरौली बांगर गांव स्थित करीब 180 वर्ग गज के विवादित प्लॉट के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए वादी के पक्ष में निर्णय दिया है। न्यायालय में छपरौला बांगर निवासी वादी महेश ने अपने भाइयों राजेंद्र, विनोद, करतार और रामे के खिलाफ वाद दायर किया था। उनके पिता जयचंद ने अपने जीवनकाल में ही अपनी समस्त संपत्ति पांचों पुत्रों के बीच बराबर-बराबर बांट दी थी। सभी को उनके हिस्से की संपत्ति पर कब्जा भी दे दिया था। इसी बंटवारे में छपरौली बांगर स्थित लगभग 180 वर्ग गज का प्लॉट उसके हिस्से में आया था, जिस पर वो लंबे समय से काबिज है और वहां दुकानें बनाकर पीछे कमरों का निर्माण भी करा रहा है। विवादित प्लॉट मुख्य सड़क पर स्थित होने के कारण उसकी कीमत काफी बढ़ चुकी है। इसी कारण प्रतिवादी भाइयों की नीयत बदल गई और वे संपत्ति पर अपना दावा करने लगे। 27 फरवरी 2021 को जब वो अपनी पत्नी के साथ निर्माण कार्य करा रहा था, तब प्रतिवादी मौके पर पहुंचे और मजदूरों को भगा दिया। उन्होंने निर्माण कार्य रुकवा दिया। इसके बाद महेश ने न्यायालय की शरण ली। अदालत ने प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी किया, लेकिन प्रतिवादी न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए।