Greater Noida: जिम्स में आउटसोर्स कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान बवाल, निदेशक की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज
ग्रेटर नोएडा में कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में आउटसोर्स कर्मचारियों की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में कासना कोतवाली पुलिस ने बुधवार को प्राथमिकी दर्ज की है।
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ग्रेटर नोएडा में कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में आउटसोर्स कर्मचारियों की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में कासना कोतवाली पुलिस ने बुधवार को प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने मामले में संस्थान के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ राकेश गुप्ता की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज की है।
बता दें कि आंदोलन के 11वें दिन बुधवार देर रात धरना समाप्त कराने को लेकर पुलिस और कर्मचारियों के बीच हुए विवाद के बाद गुरुवार सुबह स्थिति और तनावपूर्ण हो गई थी। कर्मचारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग, धक्का-मुक्की और महिला कर्मचारियों के साथ अभद्रता के आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह असत्य और निराधार बताया है। आउटसोर्स कर्मचारी पिछले 10 दिनों से नियमितीकरण अथवा संविदा पर समायोजन तथा हाल ही में निकाली गई भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने समेत अन्य मांगों को लेकर जिम्स परिसर में धरना दे रहे थे। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी अधिकांश मांगों पर संस्थान प्रबंधन सहमत हो चुका है, लेकिन नियमितीकरण के मुद्दे पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।
बुधवार को कर्मचारियों, जिम्स प्रशासन, जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के बीच करीब 28 घंटे तक वार्ता चली, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। वार्ता विफल होने के बाद कर्मचारी फिर से धरना स्थल पर बैठ गए थे। इसके बाद देर रात पुलिस और प्रशासनिक टीम धरना स्थल पर पहुंची, जहां कर्मचारियों को हटाने का प्रयास किया गया। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
कर्मचारियों का आरोप है कि देर रात धरना स्थल की बिजली और सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए। साथ ही मुख्य और इमरजेंसी गेट भी बंद कर दिए गए, जिससे वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विरोध करने पर पुलिस ने बल प्रयोग किया और कई कर्मचारियों को जबरन वहां से हटाया गया। उनका आरोप है कि महिला कर्मचारियों के साथ भी धक्का-मुक्की की गई और वीडियो बना रहे लोगों के मोबाइल छीनने का प्रयास किया गया।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, पहले उन्हें ओपीडी-17 के सामने बैठाया गया और बाद में रात करीब साढ़े 12 बजे बसों में बैठाकर पुलिस लाइन ले जाया गया। देर रात हुई कार्रवाई के बाद गुरुवार सुबह जब कुछ कर्मचारी फिर से अपनी मांगों को लेकर जिम्स परिसर में एकत्रित होने लगे तो पुलिस ने उन्हें वहां से हटाने का प्रयास किया। इसी दौरान एक महिला कर्मचारी नाले में गिर गई। कर्मचारियों का आरोप है कि पुलिस के दौड़ाने के कारण यह घटना हुई। उनका कहना है कि महिला के नाले में गिरने के बाद पुलिसकर्मियों ने उसकी मदद करने के बजाय वहां से हटना उचित समझा। बाद में साथी कर्मचारियों ने ही महिला को बाहर निकाला। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात कही जा रही है।
कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि जिम्स के एम ब्लॉक स्थित हॉस्टल में रहने वाले आंदोलनकारी कर्मचारियों को पुलिस तलाश कर हिरासत में लेने का प्रयास कर रही है। इससे कर्मचारियों में रोष और बढ़ गया है। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि कुछ कर्मचारी धरना समाप्त करने के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन उनके साथी कर्मचारियों ने उन्हें रोकने के लिए खींचतान और धक्का-मुक्की शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए संबंधित लोगों को वहां से हटाया।
वहीं कोतवाली पुलिस का कहना है कि लंबे समय से कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा स्थायी नियुक्ति की मांग को लेकर विगत दिनों से हड़ताल की जा रही थी। पुलिस प्रशासन और जिम्स प्रबंधन द्वारा लगातार उनसे संवाद कर उनसे वार्ता और समझाने का प्रयास किया जा रहा था। ये संविदा कर्मी जिम्स अस्पताल के अंदर मुख्य हॉल में बैठकर प्रदर्शन कर रहे थे, जिससे दिन-प्रतिदिन आने वाले मरीजों को अत्यंत कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था और चिकित्सा सेवाएं बाधित हो रही थी। पुलिस व प्रशासन द्वारा लगातार इनसे अनुरोध किया जा रहा था कि आप सभी अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार व हॉल से अन्यंत्र स्थानांतरित होकर अपना धरना प्रदर्शन कर सकते हैं किंतु इन सभी के द्वारा हठधर्मिता अपनाते हुए स्थान परिवर्तन करने के अनुरोध को अस्वीकार करते हुए हंगामा करना प्रारंभ कर दिया।
उल्लेखनीय है कि इस प्रकार की अशांति व हंगामा अस्पताल के मुख्य भवन के अंदर इनके द्वारा की जा रही थी। चिकित्सा सेवाएं अनवरत जारी रहे, इस उद्देश्य से पुलिस द्वारा इनसे पुनः अस्पताल के अंदर ही दूसरे स्थान पर स्थानांतरित होने का अनुरोध किया गया। जिस पर कुछ कर्मी तैयार होकर जाने लगे किंतु कुछ कर्मियों और अन्य व्यक्तियों द्वारा खींचातानी, धक्का मुक्की की जाने लगी, जिसपर पुलिस कर्मियों द्वारा उन्हें रोककर वहां से स्थनांतरित कर दिया गया। पुलिस द्वारा मारपीट व लाठीचार्ज के लगाए गए आरोप पुर्णतः असत्य एवं निराधार है। पुलिस के उच्चाधिकारी मौके पर मौजूद हैं। शांति व्यवस्था स्थापित है। संबंधित पक्षों से वार्ता कर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।
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