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Noida News: फलायर करोड़ों की रेनीवेल योजना फाइलों में सफल, धरातल पर मेवात के गांव आज भी प्यासे
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नीमखेड़ा गांव में नहीं पहुंचा रेनीवेल का पानी, टैंकरों के सहारे जीवन जीने को मजबूर ग्रामीण
सद्दाम हुसैन
पिनगवां। सरकार द्वारा मेवात क्षेत्र में पेयजल संकट को दूर करने के उद्देश्य से रेनीवेल परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। आज भी जिले के कई गांव इस महत्वाकांक्षी योजना से वंचित हैं। कागजों में जहां गांवों तक पानी पहुंच चुका है, वहीं हकीकत में ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि लोगों को मजबूरी में महंगे दामों पर टैंकरों से पानी खरीदकर अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है।
पिनगवां खंड के गांव नीमखेड़ा में रेनीवेल का पानी न पहुंचने से ग्रामीणों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। गांव में पीने के पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। पानी की किल्लत के कारण दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं पशुओं के लिए पानी जुटाना भी बड़ी चुनौती बन गया है। ग्रामीण साकिर, कमाल, रजमल और जान मोहम्मद ने बताया कि गांव में कई बार रेनीवेल परियोजना के तहत पानी सप्लाई शुरू होने की बात कही गई, लेकिन आज तक गांव की पाइपलाइनों में पानी नहीं पहुंचा। मजबूरी में ग्रामीणों को 1200 से 1500 रुपये तक खर्च कर टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है। यह स्थिति गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए भारी आर्थिक बोझ बन चुकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। गांव में सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द रेनिवेल परियोजना के तहत नीमखेड़ा गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू की जाए, ताकि उन्हें टैंकरों पर निर्भर न रहना पड़े। मेवात जैसे जल संकटग्रस्त क्षेत्र में रेनिवेल परियोजना को जीवनदायिनी योजना माना जा रहा था, लेकिन यदि यही स्थिति बनी रही तो लोगों का भरोसा सरकारी योजनाओं से उठता चला जाएगा। जरूरत है कि प्रशासन कागजी दावों से बाहर निकलकर धरातल पर वास्तविक काम करे और प्यासे गांवों तक पानी पहुंचाए।
…….
गांव का पानी टैंक खराब है चेंबर के लिए एस्टीमेट भेज रखा है जल्द एप्रूवल मिलने की उम्मीद है। एप्रूवल मिलने के बाद नया चेंबर बनाया जाएगा।
- वासुदेव राठौड़ कनिष्ठ अभियंता जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग
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सद्दाम हुसैन
पिनगवां। सरकार द्वारा मेवात क्षेत्र में पेयजल संकट को दूर करने के उद्देश्य से रेनीवेल परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। आज भी जिले के कई गांव इस महत्वाकांक्षी योजना से वंचित हैं। कागजों में जहां गांवों तक पानी पहुंच चुका है, वहीं हकीकत में ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि लोगों को मजबूरी में महंगे दामों पर टैंकरों से पानी खरीदकर अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है।
पिनगवां खंड के गांव नीमखेड़ा में रेनीवेल का पानी न पहुंचने से ग्रामीणों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। गांव में पीने के पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। पानी की किल्लत के कारण दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं पशुओं के लिए पानी जुटाना भी बड़ी चुनौती बन गया है। ग्रामीण साकिर, कमाल, रजमल और जान मोहम्मद ने बताया कि गांव में कई बार रेनीवेल परियोजना के तहत पानी सप्लाई शुरू होने की बात कही गई, लेकिन आज तक गांव की पाइपलाइनों में पानी नहीं पहुंचा। मजबूरी में ग्रामीणों को 1200 से 1500 रुपये तक खर्च कर टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है। यह स्थिति गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए भारी आर्थिक बोझ बन चुकी है।
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ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। गांव में सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द रेनिवेल परियोजना के तहत नीमखेड़ा गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू की जाए, ताकि उन्हें टैंकरों पर निर्भर न रहना पड़े। मेवात जैसे जल संकटग्रस्त क्षेत्र में रेनिवेल परियोजना को जीवनदायिनी योजना माना जा रहा था, लेकिन यदि यही स्थिति बनी रही तो लोगों का भरोसा सरकारी योजनाओं से उठता चला जाएगा। जरूरत है कि प्रशासन कागजी दावों से बाहर निकलकर धरातल पर वास्तविक काम करे और प्यासे गांवों तक पानी पहुंचाए।
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गांव का पानी टैंक खराब है चेंबर के लिए एस्टीमेट भेज रखा है जल्द एप्रूवल मिलने की उम्मीद है। एप्रूवल मिलने के बाद नया चेंबर बनाया जाएगा।
- वासुदेव राठौड़ कनिष्ठ अभियंता जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग