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Noida News: लीड- तेजी से बढ़ते तापमान से सूखने लगी गेहूं की फसल
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-गेहूं उत्पादन में गिरावट की आशंका से अन्नदाता के माथे पर चिंता की लकीरें
-विशेषज्ञों ने भी माना, तापमान से फसल का दाना होगा प्रभावित
दिनेश देशवाल
नूंह। मार्च माह की शुरुआत से ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। आधा मार्च आते-आते गर्मी ने पूरी तरह जोर पकड़ लिया है। इसका असर जहां आम जनजीवन पर दिखाई देने लगा है। सबसे अधिक चिंता किसानों को सता रही है, क्योंकि बढ़ती गर्मी का सीधा प्रभाव गेहूं की फसल पर पड़ रहा है। कई इलाकों में गेहूं की फसल सूखने लगी है। इससे उसके दाने की मोटाई कम होने की आशंका है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो इस बार गेहूं के उत्पादन में गिरावट देखने को मिल सकती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
जिले में बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो मार्च के दूसरे सप्ताह के लिहाज से काफी अधिक माना जा रहा है। यदि पिछले दस वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार तापमान में स्पष्ट बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। वर्ष 2025 में 12 मार्च के आसपास तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा था, जबकि 2024 में 32 से 34 डिग्री, 2023 में 31 से 33 डिग्री, 2022 में 30 से 32 डिग्री और 2021 में 31 से 33 डिग्री के बीच तापमान दर्ज किया गया था। इसी तरह 2020 में 28 से 30 डिग्री, 2019 में 29 से 31 डिग्री, 2018 में 30 से 32 डिग्री, 2017 में 31 से 33 डिग्री तथा 2016 में 30 से 32 डिग्री के आसपास तापमान रहा था। इन आंकड़ों की तुलना में इस वर्ष तापमान सामान्य से काफी अधिक है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।
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दाना बनने की अवस्था में है गेहूं : विशेषज्ञ
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं की फसल इस समय दाना बनने की अवस्था में है और यह चरण उत्पादन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। कृषि विज्ञान केंद्र शिकोहपुर के कृषि विशेषज्ञ डॉ. हरिंद्र सिंह दहिया के अनुसार, बढ़ते तापमान के कारण फसल में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इससे पौधों को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती और गेहूं के दाने का सही तरीके से विकास नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप दाने सिकुड़ने लगते हैं और उनका वजन कम हो जाता है, जिससे प्रति एकड़ उत्पादन घट सकता है। उन्होंने बताया कि इस बार तापमान अधिक रहने के कारण फसल जल्दी पकने की संभावना भी बढ़ गई है, जिससे कटाई समय से पहले शुरू हो सकती है।
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सावधानियां बरतने की सलाह
विशेषज्ञों ने किसानों को कुछ सावधानियां बरतने की सलाह भी दी है। जिन खेतों में गेहूं की फसल में अभी दाना बनना शुरू हुआ है या पौधों की लंबाई कम है, वहां हवा कम होने के समय हल्की सिंचाई करना फायदेमंद रहेगा। इसके साथ ही फसल को अतिरिक्त पोषण देने के लिए एनपीके 13:0:45 का 2 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा 4 किलोग्राम यूरिया को 100 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करने से भी फसल को लाभ मिल सकता है। हालांकि जिन खेतों में फसल पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी है, वहां सिंचाई नहीं करने की सलाह दी गई है, क्योंकि इससे फसल गिरने का खतरा बढ़ सकता है।
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पिछले साल की तुलना में अधिक है तापमान : डॉ. मंजीत
मौसम विशेषज्ञ डॉ. मंजीत का कहना है कि पिछले कई वर्षों की तुलना में इस बार मार्च के शुरुआती दिनों में ही तापमान काफी अधिक दर्ज किया जा रहा है। इसके पीछे जलवायु परिवर्तन एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि बढ़ता प्रदूषण, पेड़ों की लगातार कटाई और बदलते मौसम चक्र के कारण तापमान में असामान्य बढ़ोतरी हो रही है।
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अच्छी पैदावार की उम्मींद धूमिल
किसानों का कहना है कि इस बार गेहूं की फसल शुरुआती दौर में काफी अच्छी दिखाई दे रही थी और अच्छी पैदावार की उम्मीद भी थी। गांव आलदोका के किसान बुधराम ने आशंका जताई कि यदि मौसम इसी तरह गर्म बना रहा तो प्रति एकड़ करीब 4 से 5 क्विंटल तक उत्पादन कम हो सकता है। वहीं गांव सालाहेड़ी के किसान जुहुरुद्दीन का कहना है कि बढ़ती गर्मी के साथ-साथ मौसम के अचानक बदलने का भी खतरा बना रहता है। यदि इस समय बारिश हो जाती है तो तैयार फसल के गिरने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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-विशेषज्ञों ने भी माना, तापमान से फसल का दाना होगा प्रभावित
दिनेश देशवाल
नूंह। मार्च माह की शुरुआत से ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। आधा मार्च आते-आते गर्मी ने पूरी तरह जोर पकड़ लिया है। इसका असर जहां आम जनजीवन पर दिखाई देने लगा है। सबसे अधिक चिंता किसानों को सता रही है, क्योंकि बढ़ती गर्मी का सीधा प्रभाव गेहूं की फसल पर पड़ रहा है। कई इलाकों में गेहूं की फसल सूखने लगी है। इससे उसके दाने की मोटाई कम होने की आशंका है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो इस बार गेहूं के उत्पादन में गिरावट देखने को मिल सकती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
जिले में बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो मार्च के दूसरे सप्ताह के लिहाज से काफी अधिक माना जा रहा है। यदि पिछले दस वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार तापमान में स्पष्ट बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। वर्ष 2025 में 12 मार्च के आसपास तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा था, जबकि 2024 में 32 से 34 डिग्री, 2023 में 31 से 33 डिग्री, 2022 में 30 से 32 डिग्री और 2021 में 31 से 33 डिग्री के बीच तापमान दर्ज किया गया था। इसी तरह 2020 में 28 से 30 डिग्री, 2019 में 29 से 31 डिग्री, 2018 में 30 से 32 डिग्री, 2017 में 31 से 33 डिग्री तथा 2016 में 30 से 32 डिग्री के आसपास तापमान रहा था। इन आंकड़ों की तुलना में इस वर्ष तापमान सामान्य से काफी अधिक है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।
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दाना बनने की अवस्था में है गेहूं : विशेषज्ञ
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं की फसल इस समय दाना बनने की अवस्था में है और यह चरण उत्पादन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। कृषि विज्ञान केंद्र शिकोहपुर के कृषि विशेषज्ञ डॉ. हरिंद्र सिंह दहिया के अनुसार, बढ़ते तापमान के कारण फसल में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इससे पौधों को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती और गेहूं के दाने का सही तरीके से विकास नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप दाने सिकुड़ने लगते हैं और उनका वजन कम हो जाता है, जिससे प्रति एकड़ उत्पादन घट सकता है। उन्होंने बताया कि इस बार तापमान अधिक रहने के कारण फसल जल्दी पकने की संभावना भी बढ़ गई है, जिससे कटाई समय से पहले शुरू हो सकती है।
सावधानियां बरतने की सलाह
विशेषज्ञों ने किसानों को कुछ सावधानियां बरतने की सलाह भी दी है। जिन खेतों में गेहूं की फसल में अभी दाना बनना शुरू हुआ है या पौधों की लंबाई कम है, वहां हवा कम होने के समय हल्की सिंचाई करना फायदेमंद रहेगा। इसके साथ ही फसल को अतिरिक्त पोषण देने के लिए एनपीके 13:0:45 का 2 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा 4 किलोग्राम यूरिया को 100 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करने से भी फसल को लाभ मिल सकता है। हालांकि जिन खेतों में फसल पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी है, वहां सिंचाई नहीं करने की सलाह दी गई है, क्योंकि इससे फसल गिरने का खतरा बढ़ सकता है।
पिछले साल की तुलना में अधिक है तापमान : डॉ. मंजीत
मौसम विशेषज्ञ डॉ. मंजीत का कहना है कि पिछले कई वर्षों की तुलना में इस बार मार्च के शुरुआती दिनों में ही तापमान काफी अधिक दर्ज किया जा रहा है। इसके पीछे जलवायु परिवर्तन एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि बढ़ता प्रदूषण, पेड़ों की लगातार कटाई और बदलते मौसम चक्र के कारण तापमान में असामान्य बढ़ोतरी हो रही है।
अच्छी पैदावार की उम्मींद धूमिल
किसानों का कहना है कि इस बार गेहूं की फसल शुरुआती दौर में काफी अच्छी दिखाई दे रही थी और अच्छी पैदावार की उम्मीद भी थी। गांव आलदोका के किसान बुधराम ने आशंका जताई कि यदि मौसम इसी तरह गर्म बना रहा तो प्रति एकड़ करीब 4 से 5 क्विंटल तक उत्पादन कम हो सकता है। वहीं गांव सालाहेड़ी के किसान जुहुरुद्दीन का कहना है कि बढ़ती गर्मी के साथ-साथ मौसम के अचानक बदलने का भी खतरा बना रहता है। यदि इस समय बारिश हो जाती है तो तैयार फसल के गिरने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।