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Noida News: यूआईडी के छात्रों का कमाल, सुरक्षा, संस्कृति और कनेक्शन को जोड़ते इनोवेटिव एप
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यूआईडी के छात्रों का कमाल, सुरक्षा, संस्कृति और कनेक्शन को जोड़ते इनोवेटिव एप
तीसरे साल के छात्रों ने अपने एप किए पेश
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एप ने खींचा ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (यूआईडी) के बी.डेस छात्रों ने अपनी रचनात्मक सोच और सामाजिक समझ से कमाल के एप बनाए हैं, जो कई समस्याओं का समाधान बनकर निकले हैं। छात्रों द्वारा विकसित किए गए एप्लीकेशन आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों, महिलाओं की सुरक्षा, सांस्कृतिक जुड़ाव और सामाजिक कनेक्शन को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इन सभी प्रोजेक्ट्स को हाल ही में सबमिट किया गया है और आने वाले समय में इन्हें लॉन्च करने की तैयारी है।
महिलाओं को कैब में मिलेगी सुरक्षा (फोटो)
गाजियाबाद की रहने वाली आर्या शर्मा ने बताया कि इस एप को बनाने का आइडिया मुझे खुद के अनुभव से मिला। मैं हर दिन कैब से ही नोएडा आती हूं। कई बार ऐसा हुआ कि कैब बुक करने के बाद ड्राइवर के पास मेरा कांटेक्ट नंबर रह गया। इसके बाद कई बार वह मुझे कॉल करके परेशान करते थे। मेरी एक दोस्त को कैब वाले ने सड़क पर उतार दिया था। वह कहती हैं कि हम एक ऐसे देश में रहते हैं जहां जब हम घर से निकलते हैं तो 7 बजे तक घर आने के लिए कह दिया जाता है। इस दौरान ट्रैवल करने से भी लड़कियां बचती हैं। हमारे तीसरे साल के प्रेक्टिकल में हमको एप बनाने को कह दिया फिर मैंने इसी समस्या का समाधान करने के लिए इस सेफ एप को बना दिया जो सिर्फ महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसे हर कोई आसानी से इस्तेमाल कर सकती हैं।
कस्टम जॉब पोस्ट करने की सुविधा (फोटो)
बी.डेस तृतीय वर्ष के छात्र गौतम (22) ने गिग एप विकसित किया है, जो इस समय मार्केट में चल रहे सर्विस एप्स की सीमाओं को तोड़ने का प्रयास है। यह ऐप केवल फिक्स्ड कैटेगरी तक सीमित न रहकर यूजर्स को कस्टम जॉब पोस्ट करने की सुविधा देता है। गाजियाबाद और नोएडा जैसे शहरी इलाकों में रहने वाले स्टूडेंट्स, वर्किंग प्रोफेशनल्स और परिवारों को अक्सर छोटे-मोटे कामों के लिए तुरंत मदद की जरूरत होती है। क्विक गिग इसी जरूरत को ध्यान में रखकर बनाया गया है। वह कहते हैं कि उनके एप में यूजर काम का विवरण, समय, फोटो और लोकेशन डाल सकता है, जबकि वेरिफाइड लोकल सर्विस प्रोवाइडर उस काम पर बोली लगाते हैं। सुरक्षित पेमेंट, बुकिंग ट्रैकिंग, रेटिंग सिस्टम और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन जैसी सुविधाएं इसे भरोसेमंद बनाती हैं।
संस्कृति को विरासत से जोड़ने की पहल (फोटो)
बी.डेस की छात्रा जोया ने भारतीय संस्कृति और विरासत को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जीवंत रूप देने के उद्देश्य से विरासत को संजो को रखकर डिजाइन किया है। जोया बताती हैं कि आज की युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ना चाहती है लेकिन उनके पास ऐसा कोई सिंगल और आकर्षक प्लेटफॉर्म नहीं है। विरासत एप क्षेत्रीय परंपराओं, लोककथाओं, खान-पान और रीति-रिवाजों को एक साथ लाता है। यूजर ऑडियो-वीडियो के माध्यम से न केवल संस्कृति को जान सकते हैं, बल्कि अपना ज्ञान भी साझा कर सकते हैं। यह एप एक आर्काइव नहीं, बल्कि एक जीवित सांस्कृतिक स्पेस के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसका टारगेट ऑडियंस 17 से 25 वर्ष के युवा हैं। इसके मोनेटाइजेशन की भी योजना बनाई गई है।
हॉबी पार्टनर ढूंढना होगा आसान (फोटो)
बी.डेस छात्र दीपक सक्सेना ने होब्ब्यो नामक एक एप बनाया है, जो लोगों को उनके आसपास हॉबी पार्टनर ढूंढने में मदद करता है। यह एप स्पोर्ट्स, योगा, फोटोग्राफी और म्यूजिक जैसी गतिविधियों में रुचि रखने वाले लोगों को रियल टाइम मैप पर जोड़ता है। यूजर अपनी लोकेशन के अनुसार 20 किलोमीटर के दायरे में सर्च कर सकते हैं और चैटिंग व कम्युनिटी फीचर्स के जरिए सुरक्षित रूप से जुड़ सकते हैं।
वर्जन
इन छात्रों के ये इनोवेटिव एप न केवल तकनीकी कौशल को दर्शाते हैं, बल्कि समाज की वास्तविक जरूरतों को समझने की उनकी क्षमता को भी उजागर कर रहे हैं। हर बार बच्चों के नए आइडिया हमारे लिए भी गर्व का विषय है। - डॉ. कुमार संभव, निदेशक यूपीआईडी
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तीसरे साल के छात्रों ने अपने एप किए पेश
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एप ने खींचा ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (यूआईडी) के बी.डेस छात्रों ने अपनी रचनात्मक सोच और सामाजिक समझ से कमाल के एप बनाए हैं, जो कई समस्याओं का समाधान बनकर निकले हैं। छात्रों द्वारा विकसित किए गए एप्लीकेशन आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों, महिलाओं की सुरक्षा, सांस्कृतिक जुड़ाव और सामाजिक कनेक्शन को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इन सभी प्रोजेक्ट्स को हाल ही में सबमिट किया गया है और आने वाले समय में इन्हें लॉन्च करने की तैयारी है।
महिलाओं को कैब में मिलेगी सुरक्षा (फोटो)
गाजियाबाद की रहने वाली आर्या शर्मा ने बताया कि इस एप को बनाने का आइडिया मुझे खुद के अनुभव से मिला। मैं हर दिन कैब से ही नोएडा आती हूं। कई बार ऐसा हुआ कि कैब बुक करने के बाद ड्राइवर के पास मेरा कांटेक्ट नंबर रह गया। इसके बाद कई बार वह मुझे कॉल करके परेशान करते थे। मेरी एक दोस्त को कैब वाले ने सड़क पर उतार दिया था। वह कहती हैं कि हम एक ऐसे देश में रहते हैं जहां जब हम घर से निकलते हैं तो 7 बजे तक घर आने के लिए कह दिया जाता है। इस दौरान ट्रैवल करने से भी लड़कियां बचती हैं। हमारे तीसरे साल के प्रेक्टिकल में हमको एप बनाने को कह दिया फिर मैंने इसी समस्या का समाधान करने के लिए इस सेफ एप को बना दिया जो सिर्फ महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसे हर कोई आसानी से इस्तेमाल कर सकती हैं।
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कस्टम जॉब पोस्ट करने की सुविधा (फोटो)
बी.डेस तृतीय वर्ष के छात्र गौतम (22) ने गिग एप विकसित किया है, जो इस समय मार्केट में चल रहे सर्विस एप्स की सीमाओं को तोड़ने का प्रयास है। यह ऐप केवल फिक्स्ड कैटेगरी तक सीमित न रहकर यूजर्स को कस्टम जॉब पोस्ट करने की सुविधा देता है। गाजियाबाद और नोएडा जैसे शहरी इलाकों में रहने वाले स्टूडेंट्स, वर्किंग प्रोफेशनल्स और परिवारों को अक्सर छोटे-मोटे कामों के लिए तुरंत मदद की जरूरत होती है। क्विक गिग इसी जरूरत को ध्यान में रखकर बनाया गया है। वह कहते हैं कि उनके एप में यूजर काम का विवरण, समय, फोटो और लोकेशन डाल सकता है, जबकि वेरिफाइड लोकल सर्विस प्रोवाइडर उस काम पर बोली लगाते हैं। सुरक्षित पेमेंट, बुकिंग ट्रैकिंग, रेटिंग सिस्टम और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन जैसी सुविधाएं इसे भरोसेमंद बनाती हैं।
संस्कृति को विरासत से जोड़ने की पहल (फोटो)
बी.डेस की छात्रा जोया ने भारतीय संस्कृति और विरासत को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जीवंत रूप देने के उद्देश्य से विरासत को संजो को रखकर डिजाइन किया है। जोया बताती हैं कि आज की युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ना चाहती है लेकिन उनके पास ऐसा कोई सिंगल और आकर्षक प्लेटफॉर्म नहीं है। विरासत एप क्षेत्रीय परंपराओं, लोककथाओं, खान-पान और रीति-रिवाजों को एक साथ लाता है। यूजर ऑडियो-वीडियो के माध्यम से न केवल संस्कृति को जान सकते हैं, बल्कि अपना ज्ञान भी साझा कर सकते हैं। यह एप एक आर्काइव नहीं, बल्कि एक जीवित सांस्कृतिक स्पेस के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसका टारगेट ऑडियंस 17 से 25 वर्ष के युवा हैं। इसके मोनेटाइजेशन की भी योजना बनाई गई है।
हॉबी पार्टनर ढूंढना होगा आसान (फोटो)
बी.डेस छात्र दीपक सक्सेना ने होब्ब्यो नामक एक एप बनाया है, जो लोगों को उनके आसपास हॉबी पार्टनर ढूंढने में मदद करता है। यह एप स्पोर्ट्स, योगा, फोटोग्राफी और म्यूजिक जैसी गतिविधियों में रुचि रखने वाले लोगों को रियल टाइम मैप पर जोड़ता है। यूजर अपनी लोकेशन के अनुसार 20 किलोमीटर के दायरे में सर्च कर सकते हैं और चैटिंग व कम्युनिटी फीचर्स के जरिए सुरक्षित रूप से जुड़ सकते हैं।
वर्जन
इन छात्रों के ये इनोवेटिव एप न केवल तकनीकी कौशल को दर्शाते हैं, बल्कि समाज की वास्तविक जरूरतों को समझने की उनकी क्षमता को भी उजागर कर रहे हैं। हर बार बच्चों के नए आइडिया हमारे लिए भी गर्व का विषय है। - डॉ. कुमार संभव, निदेशक यूपीआईडी