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Delhi NCR News: एक तरफ केस वापसी की तैयारी, दूसरी तरफ साजिश की जांच
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सरकार के औपचारिक आदेश का इंतजार कर रही दिल्ली पुलिस, संसद मार्च हिंसा में डिजिटल साक्ष्यों और संदिग्ध नेटवर्क की पड़ताल तेज
धनंजय मिश्रा
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर चले जेन-जी आंदोलन का राजनीतिक अध्याय भले समाप्त हो गया हो, लेकिन उससे जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है। एक ओर केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की तैयारी है, वहीं 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के पीछे साजिश की जांच अलग से जारी रहेगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एफआईआर वापसी और आपराधिक जांच दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं, जिनका दायरा भी अलग है।
सूत्रों के अनुसार, आंदोलन और संसद मार्च से जुड़े मामलों में नई दिल्ली जिले के पांच थानों में अब तक 15 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इन मामलों में आगे की कार्रवाई सरकार के औपचारिक आदेश के बाद होगी। यदि सरकार अभियोजन वापस लेने का निर्णय लेती है तो संबंधित विभाग आदेश जारी करेगा। इसके बाद लोक अभियोजक अदालत में अभियोजन वापस लेने का आवेदन देगा। अंतिम निर्णय अदालत के अधिकार क्षेत्र में होगा। तब तक सभी मामलों में मौजूदा कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
डिजिटल साक्ष्यों से साजिश की कड़ियां तलाश रहीं एजेंसियां
20 जुलाई की हिंसा के पीछे सुनियोजित साजिश की आशंका को लेकर स्पेशल सेल की आईएफएसओ समेत अन्य एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती विश्लेषण में पाकिस्तान और बांग्लादेश से संचालित कई सोशल मीडिया हैंडल्स की गतिविधियां सामने आई हैं। जांच टीम ड्रोन फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, मोबाइल वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का मिलान कर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। साथ ही डंप डाटा, डिजिटल ट्रैकिंग और मैनुअल सर्विलांस के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि घटनास्थल के वीडियो सबसे पहले किन व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया समूहों में साझा हुए और उन्हें किस नेटवर्क ने तेजी से प्रसारित किया।
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आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसियां कई लोगों की व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल संवाद का सत्यापन कर चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ संदेशों में प्रदर्शनकारियों को आक्रामक रुख अपनाने और पुलिस से टकराव के लिए उकसाने के संकेत मिले हैं। प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। अब तक 200 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस सभी की भूमिका का अलग-अलग सत्यापन कर रही है।
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धनंजय मिश्रा
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर चले जेन-जी आंदोलन का राजनीतिक अध्याय भले समाप्त हो गया हो, लेकिन उससे जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है। एक ओर केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की तैयारी है, वहीं 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के पीछे साजिश की जांच अलग से जारी रहेगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एफआईआर वापसी और आपराधिक जांच दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं, जिनका दायरा भी अलग है।
सूत्रों के अनुसार, आंदोलन और संसद मार्च से जुड़े मामलों में नई दिल्ली जिले के पांच थानों में अब तक 15 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इन मामलों में आगे की कार्रवाई सरकार के औपचारिक आदेश के बाद होगी। यदि सरकार अभियोजन वापस लेने का निर्णय लेती है तो संबंधित विभाग आदेश जारी करेगा। इसके बाद लोक अभियोजक अदालत में अभियोजन वापस लेने का आवेदन देगा। अंतिम निर्णय अदालत के अधिकार क्षेत्र में होगा। तब तक सभी मामलों में मौजूदा कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
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डिजिटल साक्ष्यों से साजिश की कड़ियां तलाश रहीं एजेंसियां
20 जुलाई की हिंसा के पीछे सुनियोजित साजिश की आशंका को लेकर स्पेशल सेल की आईएफएसओ समेत अन्य एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती विश्लेषण में पाकिस्तान और बांग्लादेश से संचालित कई सोशल मीडिया हैंडल्स की गतिविधियां सामने आई हैं। जांच टीम ड्रोन फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, मोबाइल वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का मिलान कर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। साथ ही डंप डाटा, डिजिटल ट्रैकिंग और मैनुअल सर्विलांस के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि घटनास्थल के वीडियो सबसे पहले किन व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया समूहों में साझा हुए और उन्हें किस नेटवर्क ने तेजी से प्रसारित किया।
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आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसियां कई लोगों की व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल संवाद का सत्यापन कर चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ संदेशों में प्रदर्शनकारियों को आक्रामक रुख अपनाने और पुलिस से टकराव के लिए उकसाने के संकेत मिले हैं। प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। अब तक 200 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस सभी की भूमिका का अलग-अलग सत्यापन कर रही है।