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पेपर लीक प्रदर्शन: सड़कों पर शोर थमा, मगर न्यायिक गलियारों में गूंजता रहेगा आंदोलन; कुछ फैसले बन सकते हैं नजीर
Mon, 27 Jul 2026 02:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा
गौरव बाजपेई, नई दिल्ली
गौरव बाजपेई, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 27 Jul 2026 02:07 AM IST
सार
जंतर-मंतर पर चले धरना-प्रदर्शन से जुड़े कई अहम मामले अभी अदालत में लंबित हैं। इन पर आने वाले फैसले न सिर्फ नीट विवाद, बल्कि भविष्य में छात्र आंदोलनों, शांतिपूर्ण प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण नजीर बन सकते हैं।
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- फोटो : adobestock
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विस्तार
नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन भले ही सड़कों से थम गया हो, लेकिन इसकी कानूनी लड़ाई अब दिल्ली हाईकोर्ट और विशेष अदालतों में जारी रहेगी। जंतर-मंतर पर चले धरना-प्रदर्शन से जुड़े कई अहम मामले अभी अदालत में लंबित हैं। इन पर आने वाले फैसले न सिर्फ नीट विवाद, बल्कि भविष्य में छात्र आंदोलनों, शांतिपूर्ण प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण नजीर बन सकते हैं।
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दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं में प्रदर्शनकारियों की निजता, पुलिस की कार्रवाई, इंटरनेट सेवाएं बंद करने और पेपर लीक से जुड़े मामलों पर सुनवाई चल रही है। जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष की याचिका में जंतर-मंतर पर निरंतर निगरानी को चुनौती दी गई है। आरोप है कि पुलिस ने स्थायी निगरानी टावर लगाकर प्रदर्शनकारियों, खासकर महिलाओं की गतिविधियों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की, जो निजता के अधिकार का उल्लंघन है। इस मामले में सोमवार को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करेगी।
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20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान पुलिस की बल प्रयोग की कार्रवाई भी अदालत के दायरे में है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। साथ ही सीसीटीवी फुटेज और अन्य वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
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जंतर-मंतर क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं बंद करने के गृह मंत्रालय के आदेशों को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में आदेशों को संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के विपरीत बताते हुए भविष्य में ऐसे सभी आदेश सार्वजनिक करने की मांग की गई है। दूसरी ओर, प्रदर्शन के पीछे विदेशी फंडिंग और साजिश की एनआईए जांच कराने तथा प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली जनहित याचिकाएं हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है।
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में विशेष फास्ट ट्रैक अदालत का गठन किया गया है। यह अदालत नीट-यूजी पेपर लीक, प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, संगठित नकल, परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप और इससे जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई करेगी। दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी अनु ग्रोवर बलिगा को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने शनिवार से कार्यभार संभाल लिया है। अब निगाहें अदालतों के फैसलों पर हैं। इन्हीं से तय होगा कि पेपर लीक रोकने के लिए बनाए गए नए कानूनी ढांचे का असर कितना प्रभावी साबित होता है और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता व जवाबदेही किस हद तक मजबूत हो पाती है।
अब तक अदालतों में क्या-क्या हुआ
पुलिस कार्रवाई पर कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया, हर वीडियो सुरक्षित रखने का आदेश दिया। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। अदालत ने घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
निगरानी पर उठाए गए सवालों पर अदालत के रुख पर रहेगी सबकी नजर
आइशी घोष की याचिका में आरोप है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की लगातार वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की गई। स्थायी निगरानी टावर लगाने और महिला प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग को निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है।
इंटरनेट बंदी को दी गई चुनाैती
जंतर-मंतर क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं बंद करने के गृह मंत्रालय के आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि आदेश कानूनी और सांविधानिक मानकों के अनुरूप नहीं हैं। साथ ही भविष्य में ऐसे सभी आदेश सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी पेपर लीक मामलों की सुनवाई
राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में गठित विशेष अदालत सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करेगी। इसमें नीट-यूजी पेपर लीक, भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, संगठित नकल, परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप और जांच एजेंसियों की ओर से दर्ज संबंधित मामले शामिल होंगे।