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टाइफाइड का दुर्लभ मामला: युवती के कूल्हे में पहुंचा संक्रमण, समय रहते उपचार से हुई ठीक; ये लक्षण न करें अनदेखा

Sun, 26 Jul 2026 10:07 PM IST
Akash Dubey सिमरन, अमर उजाला, नई दिल्ली
सिमरन, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Akash Dubey Updated Sun, 26 Jul 2026 10:07 PM IST
सार

साल्मोनेला टाइफी ने एक स्वस्थ युवती का कूल्हा संक्रमित किया। सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने दुर्लभ सेप्टिक आर्थराइटिस का एंटीबायोटिक से सफल इलाज किया।

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Rare case of typhoid Infection spreads to young woman s hip
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI

विस्तार

टाइफाइड का कारण बनने वाला बैक्टीरिया साल्मोनेला टाइफी आमतौर पर बुखार और पेट के संक्रमण के लिए जाना जाता है। लेकिन, एक दुर्लभ मामले में बैक्टीरिया ने स्वस्थ युवती के कूल्हे के जोड़ को संक्रमित कर दिया। सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने समय रहते बीमारी की पहचान कर एंटीबायोटिक से मरीज को ठीक कर दिया।

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22 वर्षीय युवती को करीब दो सप्ताह से पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, जी मिचलाने, भूख न लगने और तेज बुखार की शिकायत थी। बाद में उसके बाएं कूल्हे में तेज दर्द शुरू हो गया, जिसके कारण उसे चलने-फिरने में परेशानी होने लगी। बुखार 104 डिग्री फारेनहाइट से अधिक पहुंच गया और कंपकंपी भी होने लगी।

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वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. रुषिका सक्सेना के अनुसार, जांच के दौरान खून में संक्रमण के संकेत मिले। ब्लड टेस्ट में सफेद रक्त कोशिकाओं और सूजन से जुड़े संकेतकों का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया। वहीं, एमआरआई जांच में कूल्हे के आसपास संक्रमण और सूजन की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने आशंका जताई कि संक्रमण बढ़ने पर जोड़ को नुकसान पहुंच सकता है और सर्जरी करनी पड़ सकती है। मरीज के ब्लड कल्चर में साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया पाया गया।

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बीमारी से पहले युवती ने तीन सप्ताह तक उपवास रखा था। डॉक्टरों का मानना है कि लंबे समय तक सीमित आहार लेने से शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता पर असर पड़ा हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि तेज बुखार के साथ अगर किसी जोड़ में अचानक दर्द, सूजन या चलने में परेशानी हो तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

साल्मोनेला टाइफी से सेप्टिक आर्थराइटिस होना दुर्लभ
डॉक्टरों ने उसे हर 12 घंटे में नस के जरिए एंटीबायोटिक सेफ्ट्रिएक्सोन देना शुरू किया। इलाज शुरू होने के बाद मरीज के बुखार में कमी आई, दर्द कम हुआ और चलने-फिरने की क्षमता में सुधार हुआ। कुछ समय तक उसे दवाएं देकर छुट्टी दे दी गई। डॉक्टर के अनुसार, साल्मोनेला से हड्डियों और जोड़ों में संक्रमण होना सामान्य नहीं है। ऐसे मामले अधिकतर उन लोगों में देखे जाते हैं जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है या जो सिकल सेल बीमारी, एचआईवी, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे होते हैं। स्वस्थ इम्यून सिस्टम वाले व्यक्ति में साल्मोनेला टाइफी से सेप्टिक आर्थराइटिस दुर्लभ है।

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