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Delhi NCR News: 13,000 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ की तस्करी मामले में सिक्किम का व्यक्ति गिरफ्तार
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (विशेष प्रकोष्ठ) ने 13,000 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ की तस्करी मामले में सिक्किम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी तिलक प्रसाद शर्मा (40) थाईलैंड से मादक द्रव्य की तस्करी में शामिल था। यह गिरफ्तारी दो अक्टूबर 2024 को की गई एक बड़ी कार्रवाई से जुड़ी है, जब दिल्ली, गुजरात और पंजाब के कई स्थानों से लगभग 13,000 करोड़ रुपये मूल्य का कोकीन और गांजा जब्त किया गया था। स्पेशल सेल के पुलिस उपायुक्त अमित कौशिक ने बताया कि गिरोह का सरगना वीरेंद्र बसोया इस समय विदेश में है और उसके बेटे ऋषभ के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है। वह भी देश से बाहर है। मामले में जांच जारी है। अब तक, इस मामले में अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल के 17 सदस्यों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कई अन्य अभी भी फरार हैं। जांच के दौरान पता चला कि सिक्किम निवासी तिलक प्रसाद शर्मा कई बार थाईलैंड से भारत में थाई गांजे से भरे सूटकेस की तस्करी में सक्रिय रूप से शामिल था। दिल्ली पहुंचने के बाद, नशीले पदार्थों से भरे सूटकेस तुषार गोयल के सहयोगी हिमांशु को सौंप दिए जाते थे। बाद में तुषार गोयल के स्वामित्व वाले महिपालपुर के एक गोदाम से थाई गांजे वाले दो सूटकेस बरामद किए गए थे। जांच के दौरान पता चला कि अक्टूबर 2024 के पहले सप्ताह में दिल्ली में कार्टेल के मुख्य सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद कार्टेल के सरगना ने तिलक प्रसाद शर्मा को कानून प्रवर्तन की जांच और पकड़ से बचने के इरादे से अपना यात्रा मार्ग बदलने और थाईलैंड से श्रीलंका, फिर नेपाल और उसके बाद भारत जाने का निर्देश दिया। उसे नेपाल कस्टम्स ने हवाई अड्डे पर थाई गांजे के साथ पकड़ा और काठमांडू जेल, नेपाल में डाल दिया गया। स्थानीय पूछताछ में पता चला कि तिलक प्रसाद शर्मा नेपाल में अशांति के दौरान नेपाल जेल से भाग गया था और बाद में भारत लौट आया था। वापस आने के बाद छिपने की बार-बार जगहें बदलता रहा और गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनी पहचान छिपाता रहा। इसके बाद, सक्षम कोर्ट से तिलक प्रसाद शर्मा के खिलाफ एक नॉन-बेलेबल वारंट जारी किया गया।
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ऐसे किया गया गिरफ्तार
इंस्पेक्टर राहुल कुमार और विनीत कुमार तेवतिया की टीम, जिसमें एसआई शैलेश कुमार शामिल था, को 5 जनवरी को एनबीडब्ल्यू को लागू करने के लिए सिक्किम भेजा गया। आरोपी के पैतृक गांव पहुंचने पर पता चला कि उसके परिवार का कोई भी सदस्य वहां नहीं रहता था। आगे विश्वसनीय जानकारी मिली कि वह कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए अपने पैतृक गांव से लगभग 150 किलोमीटर दूर नामची ईस्ट में चला गया था। नामची ईस्ट, सिक्किम की स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी को नामची ईस्ट में ट्रैक किया गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसे एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया और ट्रांजिट रिमांड प्राप्त किया गया। बाद में, उसे दिल्ली की माननीय ट्रायल कोर्ट में पेश किया गया।
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दुबई में नशीले पदार्थ तस्करों के संपर्क में आया-
10 वीं के बाद फिटर ट्रेड में आईटीआई करने वाला तिलक प्रसाद शर्मा ने शुरू में सिक्किम में एक फार्मास्युटिकल्स कंपनी में मशीन ऑपरेटर के रूप में काम किया, जहां वह लगभग पांच साल तक कार्यरत रहा। 2023 में वह रोजगार की तलाश में कुछ स्थानीय युवाओं के साथ टूरिस्ट वीजा पर दुबई गया, लेकिन उसे नौकरी नहीं मिली। दुबई में रहने के दौरान वह एक संगठित अंतर्राष्ट्रीय नशीले पदार्थों की तस्करी सिंडिकेट के एक सदस्य के संपर्क में आया। इसके बाद तिलक प्रसाद शर्मा को थाईलैंड से भारत में थाई मारिजुआना वाले सामान को ले जाने के लिए एक कूरियर के रूप में भर्ती किया गया। उसने कार्टेल सदस्यों के निर्देशों पर थाईलैंड और भारत के बीच कई यात्राएं कीं। अक्टूबर, 2024 में, उसे नेपाल कस्टम्स ने एक अप्रत्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय मार्ग से यात्रा करते समय थाई मारिजुआना ले जाते हुए पकड़ा।
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नई दिल्ली।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (विशेष प्रकोष्ठ) ने 13,000 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ की तस्करी मामले में सिक्किम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी तिलक प्रसाद शर्मा (40) थाईलैंड से मादक द्रव्य की तस्करी में शामिल था। यह गिरफ्तारी दो अक्टूबर 2024 को की गई एक बड़ी कार्रवाई से जुड़ी है, जब दिल्ली, गुजरात और पंजाब के कई स्थानों से लगभग 13,000 करोड़ रुपये मूल्य का कोकीन और गांजा जब्त किया गया था। स्पेशल सेल के पुलिस उपायुक्त अमित कौशिक ने बताया कि गिरोह का सरगना वीरेंद्र बसोया इस समय विदेश में है और उसके बेटे ऋषभ के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है। वह भी देश से बाहर है। मामले में जांच जारी है। अब तक, इस मामले में अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल के 17 सदस्यों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कई अन्य अभी भी फरार हैं। जांच के दौरान पता चला कि सिक्किम निवासी तिलक प्रसाद शर्मा कई बार थाईलैंड से भारत में थाई गांजे से भरे सूटकेस की तस्करी में सक्रिय रूप से शामिल था। दिल्ली पहुंचने के बाद, नशीले पदार्थों से भरे सूटकेस तुषार गोयल के सहयोगी हिमांशु को सौंप दिए जाते थे। बाद में तुषार गोयल के स्वामित्व वाले महिपालपुर के एक गोदाम से थाई गांजे वाले दो सूटकेस बरामद किए गए थे। जांच के दौरान पता चला कि अक्टूबर 2024 के पहले सप्ताह में दिल्ली में कार्टेल के मुख्य सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद कार्टेल के सरगना ने तिलक प्रसाद शर्मा को कानून प्रवर्तन की जांच और पकड़ से बचने के इरादे से अपना यात्रा मार्ग बदलने और थाईलैंड से श्रीलंका, फिर नेपाल और उसके बाद भारत जाने का निर्देश दिया। उसे नेपाल कस्टम्स ने हवाई अड्डे पर थाई गांजे के साथ पकड़ा और काठमांडू जेल, नेपाल में डाल दिया गया। स्थानीय पूछताछ में पता चला कि तिलक प्रसाद शर्मा नेपाल में अशांति के दौरान नेपाल जेल से भाग गया था और बाद में भारत लौट आया था। वापस आने के बाद छिपने की बार-बार जगहें बदलता रहा और गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनी पहचान छिपाता रहा। इसके बाद, सक्षम कोर्ट से तिलक प्रसाद शर्मा के खिलाफ एक नॉन-बेलेबल वारंट जारी किया गया।
ऐसे किया गया गिरफ्तार
इंस्पेक्टर राहुल कुमार और विनीत कुमार तेवतिया की टीम, जिसमें एसआई शैलेश कुमार शामिल था, को 5 जनवरी को एनबीडब्ल्यू को लागू करने के लिए सिक्किम भेजा गया। आरोपी के पैतृक गांव पहुंचने पर पता चला कि उसके परिवार का कोई भी सदस्य वहां नहीं रहता था। आगे विश्वसनीय जानकारी मिली कि वह कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए अपने पैतृक गांव से लगभग 150 किलोमीटर दूर नामची ईस्ट में चला गया था। नामची ईस्ट, सिक्किम की स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी को नामची ईस्ट में ट्रैक किया गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसे एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया और ट्रांजिट रिमांड प्राप्त किया गया। बाद में, उसे दिल्ली की माननीय ट्रायल कोर्ट में पेश किया गया।
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दुबई में नशीले पदार्थ तस्करों के संपर्क में आया-
10 वीं के बाद फिटर ट्रेड में आईटीआई करने वाला तिलक प्रसाद शर्मा ने शुरू में सिक्किम में एक फार्मास्युटिकल्स कंपनी में मशीन ऑपरेटर के रूप में काम किया, जहां वह लगभग पांच साल तक कार्यरत रहा। 2023 में वह रोजगार की तलाश में कुछ स्थानीय युवाओं के साथ टूरिस्ट वीजा पर दुबई गया, लेकिन उसे नौकरी नहीं मिली। दुबई में रहने के दौरान वह एक संगठित अंतर्राष्ट्रीय नशीले पदार्थों की तस्करी सिंडिकेट के एक सदस्य के संपर्क में आया। इसके बाद तिलक प्रसाद शर्मा को थाईलैंड से भारत में थाई मारिजुआना वाले सामान को ले जाने के लिए एक कूरियर के रूप में भर्ती किया गया। उसने कार्टेल सदस्यों के निर्देशों पर थाईलैंड और भारत के बीच कई यात्राएं कीं। अक्टूबर, 2024 में, उसे नेपाल कस्टम्स ने एक अप्रत्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय मार्ग से यात्रा करते समय थाई मारिजुआना ले जाते हुए पकड़ा।