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Delhi NCR News: दिल्ली में 86% जगहों पर सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल
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पर्यावरण संगठन टॉक्सिक्स लिंक के अध्ययन में हुआ खुलासा
दिल्ली, मुंबई, गुवाहाटी और भुवनेश्वर के 560 स्थानों का हुआ अध्ययन
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली । सिंगल-यूज प्लास्टिक (एसयूपी) पर बैन के बावजूद दिल्ली में इसका पालन सख्ती से नहीं हो रहा है। पर्यावरण संगठन टॉक्सिक्स लिंक के अध्ययन के अनुसार, सर्वे की गई दिल्ली की 86 प्रतिशत जगहों पर इसका इस्तेमाल हो रहा है। यह शोध अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच दिल्ली, मुंबई, गुवाहाटी और भुवनेश्वर के 560 स्थानों पर की गई। रिपोर्ट के अनुसार, चारों शहरों में औसतन 84 प्रतिशत जगहों पर प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग पाया गया।
उल्लंघन में भुवनेश्वर सबसे आगे
उल्लंघन के मामले में भुवनेश्वर सबसे आगे रहा। यहां 89 प्रतिशत जगहों पर सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग होता पाया गया। वहीं, दिल्ली में 86 प्रतिशत, मुंबई में 85 प्रतिशत और गुवाहाटी में 76 प्रतिशत स्थानों पर बैन का उल्लंघन देखने को मिला।
शोध में सड़क किनारे ठेले, जूस स्टॉल, छोटे रेस्टोरेंट और स्थानीय बाजारों में इनका उपयोग सबसे ज्यादा देखा गया। रिपोर्ट के अनुसार, बैन लागू करने में सबसे बड़ी दिक्कत उपभोक्ताओं की आदत और विकल्पों की कीमत है। शोधकर्ताओं को 91 प्रतिशत छोटे दुकानदारों ने बताया कि ग्राहक अभी भी प्लास्टिक बैग की ही मांग करते हैं।
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दिल्ली, मुंबई, गुवाहाटी और भुवनेश्वर के 560 स्थानों का हुआ अध्ययन
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली । सिंगल-यूज प्लास्टिक (एसयूपी) पर बैन के बावजूद दिल्ली में इसका पालन सख्ती से नहीं हो रहा है। पर्यावरण संगठन टॉक्सिक्स लिंक के अध्ययन के अनुसार, सर्वे की गई दिल्ली की 86 प्रतिशत जगहों पर इसका इस्तेमाल हो रहा है। यह शोध अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच दिल्ली, मुंबई, गुवाहाटी और भुवनेश्वर के 560 स्थानों पर की गई। रिपोर्ट के अनुसार, चारों शहरों में औसतन 84 प्रतिशत जगहों पर प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग पाया गया।
उल्लंघन में भुवनेश्वर सबसे आगे
उल्लंघन के मामले में भुवनेश्वर सबसे आगे रहा। यहां 89 प्रतिशत जगहों पर सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग होता पाया गया। वहीं, दिल्ली में 86 प्रतिशत, मुंबई में 85 प्रतिशत और गुवाहाटी में 76 प्रतिशत स्थानों पर बैन का उल्लंघन देखने को मिला।
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शोध में सड़क किनारे ठेले, जूस स्टॉल, छोटे रेस्टोरेंट और स्थानीय बाजारों में इनका उपयोग सबसे ज्यादा देखा गया। रिपोर्ट के अनुसार, बैन लागू करने में सबसे बड़ी दिक्कत उपभोक्ताओं की आदत और विकल्पों की कीमत है। शोधकर्ताओं को 91 प्रतिशत छोटे दुकानदारों ने बताया कि ग्राहक अभी भी प्लास्टिक बैग की ही मांग करते हैं।