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Delhi NCR News: आरटीई के तहत पढ़ने वाले बच्चों के सामाजिक-भावनात्मक विकास पर होगा अध्ययन
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-सीबीएसई की प्रबंध समिति ने एनजीओ के जरिए शोध कराने की दी मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । स्कूलों में शिक्षा के अधिकार(आरटीई) के तहत पढ़ने वाले बच्चों के सामाजिक-भावनात्मक विकास पर अध्ययन होगा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) यह अध्ययन एनजीओ के माध्यम से कराएगा। यह अध्ययन बच्चों की शैक्षणिक प्रगति और परिवारों पर पड़े प्रभाव का भी आकलन करेगा। सीबीएसई की प्रबंध समिति ने एनजीओ के जरिए शोध कराने को मंजूरी दे दी है।
आरटीई के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्लयूएस) और वंचित समूह के बच्चों के लिए दाखिले स्तर पर 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं। उन्हें आठवीं कक्षा तक नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है।
अध्ययन में 10 लाख की आएगी लागत
सीबीएसई की प्रबंध समिति की बैठक में सदस्यों ने इस बात पर चिंता जताई कि मिश्रित (ब्लेंडेड) कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को भाषाई बदलाव, साथियों से तुलना, सामाजिक भेदभाव और पहचान से जुड़ी कई मनोवैज्ञानिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में प्रबंध समिति ने अध्ययन का फैसला किया है। इसमें 10 लाख रुपये की अनुमानित लागत आएगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । स्कूलों में शिक्षा के अधिकार(आरटीई) के तहत पढ़ने वाले बच्चों के सामाजिक-भावनात्मक विकास पर अध्ययन होगा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) यह अध्ययन एनजीओ के माध्यम से कराएगा। यह अध्ययन बच्चों की शैक्षणिक प्रगति और परिवारों पर पड़े प्रभाव का भी आकलन करेगा। सीबीएसई की प्रबंध समिति ने एनजीओ के जरिए शोध कराने को मंजूरी दे दी है।
आरटीई के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्लयूएस) और वंचित समूह के बच्चों के लिए दाखिले स्तर पर 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं। उन्हें आठवीं कक्षा तक नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है।
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अध्ययन में 10 लाख की आएगी लागत
सीबीएसई की प्रबंध समिति की बैठक में सदस्यों ने इस बात पर चिंता जताई कि मिश्रित (ब्लेंडेड) कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को भाषाई बदलाव, साथियों से तुलना, सामाजिक भेदभाव और पहचान से जुड़ी कई मनोवैज्ञानिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में प्रबंध समिति ने अध्ययन का फैसला किया है। इसमें 10 लाख रुपये की अनुमानित लागत आएगी।