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Delhi: यासीन मलिक की सुप्रीम कोर्ट में पेशी को लेकर तिहाड़ जेल प्रशासन की कार्रवाई, चार अधिकारी निलंबित

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sat, 22 Jul 2023 01:45 PM IST
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सार

यासीन मलिक को कल सुप्रीम कोर्ट में पेशी से जुड़े मामले मे तिहाड़ जेल प्रशासन ने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।

Tihar Jail Administration suspends four officials in connection with Yasin Malik's appearance in Supreme Court
तिहाड़ जेल - फोटो : amar ujala
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विस्तार

आतंकी फंडिंग मामले में तिहाड़ जेल संख्या सात में सजा काट रहे जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट प्रमुख यासीन मलिक की सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत पेशी करने के मामले में जेल अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल प्रशासन ने जेल नंबर सात में तैनात चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित किए गए अधिकारियों में एक उपाधीक्षक, दो सहायक अधीक्षक व एक हेड वार्डर शामिल हैं।

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मामले की आंतरिक जांच में पता चला है कि यासीन मलिक को बिना प्रोडक्शन वारंट के सुनवाई के लिए भेजा गया था। इस मामले में जेल अधिकारियों से इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई है इसकी जांच जारी है। आतंकी फंडिंग मामले में आजीवन सजा काट रहा यासीन मलिक इस वक्त तिहाड़ जेल नंबर सात में बंद है। मलिक को जम्मू कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाना था। कैदी की वर्चुअल पेशी भी संभव है। बावजूद इसके मलिक को शुक्रवार सुप्रीम अदालत में पेश किया गया।
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अदालत की नाराजगी के बाद जेल महानिदेशक संजय बेनीवाल ने इसकी विस्तृत जांच के आदेश दिए। जांच की जिम्मेदारी उप-महानिरीक्षक (मुख्यालय) (कारागार) राजीव सिंह को सौंपी। इन्हें तीन दिन के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया। जेल सूत्रों का कहना है कि इस मामले को लेकर जेल अधिकारियों की रात भर बैठक चली। प्रारंभिक जांच में जेल संख्या सात के चार अधिकारियों की लापरवाही सामने आई। इन चारों अधिकारियों की ही जिम्मेदारी थी कि वह कैदी को अदालत में पेश करें।

हर जेल में कैदियों को अदालत में पेश करने का विभाग
जेल सूत्रों का कहना है कि हर एक जेल में एक यूटी (अंडर ट्रायल) विभाग होता है। जहां तैनात अधिकारी जेल में बंद कैदियों की पेशी के लिए अदालत से आने वाले प्रोडक्शन वारंट की तामील करते हैं। विभाग की ओर से ही कैदियों और इन्हें ले जाने वाले दिल्ली पुलिस के थर्ड बटालियन को सूचित किया जाता है। जांच के दौरान पता चला है कि अनेक स्तरों पर गलती हुई है। जेल के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि नियमों के मुताबिक कैदी की अदालत में अचानक पेशी नहीं होती है। पेशी से पहले दिल्ली पुलिस की तीसरी बटालियन को कैदियों के नाम और उनकी सुरक्षा के बारे में बताया जाता है। ताकि सुरक्षा के लिहाज से थर्ड बटालियन को कैदियों की सुरक्षा इंतजाम में कोई दिक्कत न हो।

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