Water Crisis: भीषण गर्मी में पानी के लिए तड़प रहे दिल्ली के लोग, संकट गहराया; टैंकर भी नहीं बुझा पा रहे प्यास
बढ़ती पेयजल मांग के बीच गिरते यमुना के जलस्तर ने दिल्ली जल बोर्ड के जल शोधन संयंत्रों की क्षमता में गिरावट ने समस्या को और भयावह बना दिया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजधानी में पारे के तेवर तल्ख होते ही पानी का संकट गहराने लगा है। बढ़ती पेयजल मांग के बीच गिरते यमुना के जलस्तर ने दिल्ली जल बोर्ड के जल शोधन संयंत्रों की क्षमता में गिरावट ने समस्या को और भयावह बना दिया है। वजीराबाद रिजर्वायर में पानी सूख गया है, जिससे संयंत्रों तक कच्चा पानी पहुंच नहीं रहा है। नतीजतन दिल्ली के कई इलाकों में पानी को लेकर हाहाकार जैसी स्थिति बन गई है। खासकर कालोनियों, जेजे बस्तियों और गांवों में हालात बहुत खराब हो चुके है। लोग टैंकरों के पीछे दौड़ रहे हैं लेकिन उन्हें पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा।
जल बोर्ड के मुताबिक, यमुना के वजीराबाद बैराज के रिजर्वायर का जलस्तर 674.5 फीट से या इससे ज्यादा होना चाहिए जो घटकर 669.5 फीट पहुंच गया। जलाशय तकरीबन सूख गया है। इससे वजीराबाद और चंद्रावल जल शोधन संयंत्रों तक पर्याप्त कच्चा पानी नहीं पहुंच पा रहा। हालांकि इससे निपटने के लिए जल बोर्ड यमुना में नए चैनल बना रहा है ताकि थोड़ा-बहुत पानी प्लांट तक पहुंचाया जा सके। लेकिन राजधानी की जरूरत के मुताबिक यह कवायद नाकाफी है। वजीराबाद और चंद्रावल दोनों संयंत्र क्षमता से कम पर चल रहे हैं। वजीराबाद संयंत्र की क्षमता करीब 134-138 एमजीडी और चंद्रावल की करीब 98-99 एमजीडी है। कच्चे पानी की कमी के कारण उत्पादन में 10 से 25 प्रतिशत तक कटौती दर्ज की गई।
इन इलाकों पर बड़ी मार
दोनों प्लांट में कमी का असर नई दिल्ली, मध्य, उत्तरी दिल्ली के कई इलाकों में देखने को मिल रहा है। अन्य संयंत्रों में से भी उनसे जुड़े इलाकों में पानी कम पहुंच रहा है। विशेषकर पश्चिम दिल्ली, उत्तर पश्चिमी दिल्ली और दक्षिण पश्चिमी दिल्ली के इलाकों में कम दबाव, अनियमित सप्लाई और सूखी टोटियों की शिकायतें सामने आई है। कुछ गांवों और कॉलोनियों में कई दिनों से सप्लाई नियमित नहीं है। इसके चलते टैंकरों पर निर्भर होना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में टैंकर भी पर्याप्त मात्रा में नहीं भेजे जा रहे है।
पानी की मांग और आपूर्ति का बढ़ा अंतर
जल बोर्ड के अनुसार, दिल्ली में सामान्य दिनों में भी पानी की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर रहता है। गर्मियों में यह संकट और गहरा जाता है। इस समय राजधानी में पानी की अनुमानित मांग करीब 1300 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) तक पहुंच गई है, जबकि उत्पादन और आपूर्ति करीब 900 एमजीडी के आसपास है। यानी प्रतिदिन लगभग 400 एमजीडी का अंतर बना हुआ है।
हरियाणा ने दिया अतिरिक्त पानी का भरोसा
दिल्ली सरकार की पहल के बावजूद हरियाणा से दिल्ली को पर्याप्त पानी नहीं मिला है। दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार, दिल्ली सरकार ने हरियाणा सरकार से बात की है। इसके बाद मंगलवार रात हरियाणा से करीब 980 क्यूसेक पानी रिलीज किया गया। इसमें से कैरियर लाइन चैनल (सीएलसी) नहर में करीब 443 क्यूसेक और डीएसबी (दिल्ली सब-ब्रांच) नहर में 537 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। जल बोर्ड अफसरों का कहना है कि पहले की तुलना में करीब 20-22 क्यूसेक पानी अधिक है। इससे थोड़ी बहुत राहत मिलने की उम्मीद है।
आंकड़े...
- दिल्ली में पानी की मांग: 1300 एमजीडी
- वर्तमान आपूर्ति/उत्पादन: लगभग 900 एमजीडी
- दैनिक कमी: 400 एमजीडी से ज्यादा
- वजीराबाद जलस्तर: सामान्य 674.5 फीट के मुकाबले करीब 669.5 फीट
- प्रभावित संयंत्र: वजीराबाद और चंद्रावल जल शोधक संयंत्र
- उत्पादन में कटौती: 10 से 25 प्रतिशत
पानी की आस में उड़ गई रात की नींद और दिन का सुकून
सुबह से बर्तन लेकर बैठ जाते हैं। टैंकर कब आएगा कुछ पता नहीं होता। कई बार तो झगड़े की नौबत आ जाती है, लेकिन मजबूरी है क्योंकि पानी के बिना तो घर चल नहीं सकता।
-लीलावती
घर में पानी बिल्कुल नहीं आता, इसलिए यहां आकर इंतजार करना पड़ता है। धूप और गर्मी में घंटों खड़े रहना बहुत मुश्किल होता है। रात की नींद और दिन का चैन सब खो गया है।
-रमादेवी