Chandra Grahan 2026: दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में कब दिखेगा चंद्र ग्रहण? ये रहा सटीक समय और कारण
धार्मिक मान्यताओं के चलते कई लोग ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप और स्नान आदि भी करते हैं। हालांकि वैज्ञानिक इसे एक खगोलीय घटना मानते हैं, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है।
विस्तार
इस साल का पहला चंद्रग्रहण आज लग चुका है। ग्रहण के 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाएगा। जिसमें सभी मांगलिक कार्य वर्जित होंगे। चंद्रग्रहण की शुरूआत मंगलवार दोपहर 3:20 बजे से हुई और शाम को 6:46 बजे समापन होगा। वहीं सूतक काल नौ घंटे पहले सुबह 6:20 बजे शुरू होगा। साल का पहला चंद्रग्रहण है जो सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जगह बनाएगा।
लोगों में उत्सुकता बढ़ी
इस बीच दिल्ली-एनसीआर में चंद्र ग्रहण को लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है। खगोल प्रेमियों से लेकर आम श्रद्धालुओं तक सभी की नजरें आसमान पर टिकी रहेंगी। इस बार चंद्र ग्रहण का समय शहरों के अनुसार कुछ मिनटों के अंतर से अलग-अलग रहेगा, जिससे लोगों में इसे लेकर खास दिलचस्पी है।
नोएडा-दिल्ली में ग्रहण का समय
दिल्ली में चंद्र ग्रहण शाम 6 बजकर 22 मिनट पर लगा। सूर्यास्त के आस-पास लगे इस ग्रहण देखने के लिए लोग खुले स्थानों और छतों का रुख करते हुए दिखाई दिए। वहीं, नोएडा में ग्रहण 6 बजकर 20 मिनट पर प्रारंभ हुआ।
गाजियाबाद और गुरुग्राम में चंद्र ग्रहण का समय
गाजियाबाद में चंद्र ग्रहण 6 बजकर 25 मिनट से शुरू हुआ, जो एनसीआर में सबसे बाद का समय माना जा रहा है। दूसरी ओर, गुरुग्राम में यह 6 बजकर 02 मिनट पर शुरू हुआ, यानी यहां सबसे पहले ग्रहण दिखाई दिया।
क्यों होता है ग्रहण के समय में अंतर
खगोलविदों के अनुसार कुछ मिनटों का यह अंतर भौगोलिक स्थिति और देशांतर के फर्क के कारण होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रहण को नंगी आंखों से देखा जा सकता है, लेकिन दूरबीन या टेलीस्कोप से देखने पर इसका दृश्य और स्पष्ट होगा।
बंद रहेंगे मंदिरों के कपाट
धार्मिक मान्यताओं के चलते कई लोग ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप और स्नान आदि भी करते हैं। हालांकि वैज्ञानिक इसे एक खगोलीय घटना मानते हैं, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं ताकि पूजा करने वाले लोग भगवान की प्रतिमा और शुभ चिह्नों को स्पर्श न कर सकें। बताया कि इस समय खाना पकाना या भोजन करना भी वर्जित होता है। इसमें पूजा, हवन यज्ञ और नए काम की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। सूतक काल से पहले अपने घर में मौजूद तरल पदार्थों जल, दूध, घी, तेल, अचार, शहद में कुशा और तुलसी डालना अच्छा होता है।