AI Summit Protest: युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु हुए तिहाड़ से रिहा, बाहर आते ही सरकार पर बोला बड़ा हमला
उदय भानु चिब ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी व्यापार समझौता भारतीय किसानों के हितों के विपरीत है। उन्होंने इस समझौते को देश के कृषि क्षेत्र के लिए हानिकारक बताया। युवा कांग्रेस का मानना है कि ऐसे समझौते किसानों की आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव डालेंगे।
विस्तार
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानू चिब और उनके नौ साथियों को राहत देते हुए जेल से रिहा करने का आदेश जारी किया। ये सभी दिल्ली में आयोजित ‘एआई समिट’ के दौरान विरोध प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिए गए थे और वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद थे।
रिहाई के बाद हुए हमलवार
रिहाई के बाद जेल से बाहर आने पर अध्यक्ष उदय भानु चिब ने अमेरिकी व्यापार समझौते को किसानों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि युवा कांग्रेस देश के किसानों के लिए संघर्ष करेगी। यह संघर्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में किया जाएगा।
यह किसानों के हक की लड़ाई
चिब ने बताया कि युवा कांग्रेस ने देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया है। उन्होंने इसे अपना लोकतांत्रिक अधिकार बताया। युवा कांग्रेस इस मुद्दे पर अपनी आवाज मजबूती से उठाएगी। उन्होंने कहा कि यह किसानों के हक की लड़ाई है। चिब ने अपने इस प्रयास को सत्य की जीत बताया। संगठन किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वे ऐसे किसी भी व्यापार समझौते का विरोध करेंगे। यह समझौता किसानों को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।
अमेरिकी व्यापार समझौते का विरोध
उदय भानु चिब ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी व्यापार समझौता भारतीय किसानों के हितों के विपरीत है। उन्होंने इस समझौते को देश के कृषि क्षेत्र के लिए हानिकारक बताया। युवा कांग्रेस का मानना है कि ऐसे समझौते किसानों की आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव डालेंगे। यह समझौता किसानों के भविष्य के लिए खतरा है। इसलिए वे इस समझौते के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं।
किसानों के लिए संघर्ष
युवा कांग्रेस राहुल गांधी के नेतृत्व में किसानों के हक के लिए लड़ेगी। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है। संगठन किसानों की आवाज को सरकार तक पहुंचाएगा। वे किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक किसानों को न्याय नहीं मिल जाता।
ये था पूरा मामला
20 फरवरी 2026 को भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शर्टलेस होकर प्रदर्शन किया था। इस घटना में सुरक्षा भंग करने और कथित राष्ट्र-विरोधी नारे लगाने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने 14 लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब भी शामिल थे।
चिब को 23 फरवरी को पूछताछ के लिए बुलाया गया और 24 फरवरी को गिरफ्तार किया। उन्हें चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। 28 फरवरी की देर रात करीब 3:30 बजे ड्यूटी मजिस्ट्रेट वंशिका मेहता ने उन्हें जमानत दे दी थी। मजिस्ट्रेट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता संवैधानिक मूल्य है और पुलिस ने आगे हिरासत की कोई ठोस वजह नहीं बताई।
हालांकि, उसी शाम एडिशनल सेशंस जज अमित बंसल ने पुलिस की याचिका पर एकपक्षीय सुनवाई कर जमानत पर रोक लगा दी और इसे दुर्लभ मामला बताते हुए जमानत आदेश पर स्टे दे दिया। इसके खिलाफ चिब ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। 2 मार्च 2026 को न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई की।
कोर्ट ने सेशंस कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी और कहा कि सेशंस जज ने आदेश पारित करते समय कोई उचित विचार-विमर्श नहीं किया। न्यायमूर्ति बनर्जी ने टिप्पणी की, आदेश में कहीं भी यह नहीं बताया गया कि यह दुर्लभ मामला क्यों है। पहले लाइन में स्टे मांगा और आखिरी लाइन में स्टे दे दिया।