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बासमती ऑर्गेनिक केंद्र: पीलीभीत में बनेगा देश का पहला ट्रेनिंग सेंटर, किसानों को मिलेगी नई तकनीक की ट्रेनिंग
आईएएनएस, दिल्ली
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Thu, 30 Apr 2026 01:22 PM IST
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सार
पीलीभीत के टांडा बिजैसी में देश का पहला बासमती ऑर्गेनिक ट्रेनिंग और डेमो फार्म विकसित होगा। सात एकड़ में बनने वाला यह केंद्र किसानों को प्रशिक्षण, नई बासमती किस्मों के परीक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा देने में मदद करेगा।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : AI
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विस्तार
केंद्र सरकार ने गुरुवार को बताया कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के टांडा बिजैसी में बासमती और ऑर्गेनिक ट्रेनिंग सेंटर सह डेमो फार्म के लिए जमीन का 70 साल का लीज समझौता अंतिम रूप से तय कर दिया गया है। यह केंद्र करीब सात एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा।
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सरकारी बयान के अनुसार, इस केंद्र में ऑडिटोरियम, बासमती और जैविक खेती पर आधारित म्यूजियम व गैलरी, कॉन्फ्रेंस रूम, प्रयोगशाला और ऑर्गेनिक खेती से जुड़े इनपुट के भंडारण की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह केंद्र बासमती और जैविक खेती करने वाले किसानों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास में मदद करेगा। साथ ही यह कृषि विशेषज्ञों और छात्रों के लिए रिसोर्स सेंटर के रूप में भी कार्य करेगा।
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यह देश का पहला बासमती ऑर्गेनिक ट्रेनिंग और डेमोंस्ट्रेशन फार्म होगा, जहां पारंपरिक और ऑर्गेनिक दोनों प्रकार की बासमती खेती को शामिल किया जाएगा। स्थान की दृष्टि से यह केंद्र उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसानों व संबंधित हितधारकों को लाभ पहुंचाने वाला माना जा रहा है।
इस केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर बासमती परीक्षण के लिए ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट्स (AICRP) केंद्र के रूप में नामित किया गया है। इसके साथ ही पीलीभीत, उत्तर प्रदेश के बासमती जीआई जोन का तीसरा एआईसीआरपी केंद्र बन गया है। इससे क्षेत्र की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप नई बासमती किस्मों के व्यवस्थित परीक्षण और मूल्यांकन में मदद मिलेगी।
वहीं, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भारत की पहली एआई आधारित बासमती धान सर्वे परियोजना (2026-2028) का भी शुभारंभ किया। यह परियोजना एपीडा (APEDA) द्वारा ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (AIREA) के सहयोग से लागू की जाएगी।
यह परियोजना करीब 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करेगी। इसके तहत 1.5 लाख से अधिक ग्राउंड ट्रुथ प्वाइंट्स से डेटा एकत्र किया जाएगा और 5 लाख से अधिक किसानों से संपर्क किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य सटीक फसल आकलन, किस्मों की पहचान, वैज्ञानिक सलाह सेवाएं और बेहतर निर्यात योजना को बढ़ावा देना है। यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के बयान में दी गई।
भारत का भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पाद बासमती चावल का निर्यात वर्ष 2025-26 में 5.67 अरब डॉलर का रहा, जबकि निर्यात मात्रा करीब 65 लाख मीट्रिक टन दर्ज की गई।मध्य पूर्व, यूरोप और उत्तर अमेरिका के बाजारों में मजबूत उपस्थिति के साथ यह क्षेत्र भारत के कृषि निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है।
