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Delhi: जेटली स्टेडियम में एसटीपी के पानी से हो रही सिंचाई, 17 रेन वाटर हार्वेस्टिंग व रिचार्ज शाफ्ट तैयार

Tue, 30 Jun 2026 07:31 AM IST
Digvijay Singh नितिन राजपूत, अमर उजाला, दिल्ली
नितिन राजपूत, अमर उजाला, दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 30 Jun 2026 07:31 AM IST
सार

दिल्ली एवं जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) ने दावा किया है कि अरुण जेटली स्टेडियम में अब क्रिकेट मैदान की सिंचाई के लिए भूजल के बजाय सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से शोधित किए गए पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। 
 

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STP water is being used for irrigation at Jaitley Stadium with 17 rainwater harvesting and recharge shafts rea
अरुण जेटली स्टेडियम (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter

विस्तार

दिल्ली एवं जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) ने दावा किया है कि अरुण जेटली स्टेडियम में अब क्रिकेट मैदान की सिंचाई के लिए भूजल के बजाय सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से शोधित किए गए पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। 

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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल रिपोर्ट में एसोसिएशन ने कहा है कि अप्रैल 2024 से एसटीपी पूरी तरह संचालित है और पर्यावरण संरक्षण के लिए कई अन्य कदम भी उठाए गए हैं।डीडीसीए के सचिव अशोक शर्मा ने बताया कि स्टेडियम परिसर में वर्षा जल संरक्षण के लिए 17 रेन वाटर हार्वेस्टिंग एवं रिचार्ज शाफ्ट बनाए गए हैं। 
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इनका प्रत्येक वर्ष मानसून से पहले नियमित रखरखाव किया जाता है, ताकि वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण और भूजल पुनर्भरण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की अनुमति के बाद केवल दो ट्यूबवेल ही संचालित किए जा रहे हैं, जबकि तीसरे ट्यूबवेल को सील कर दिया गया है। दोनों अधिकृत ट्यूबवेल पर पानी की निकासी और भूजल स्तर की निगरानी के लिए फ्लो मीटर, पीजोमीटर और  डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर लगाए गए हैं।
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शर्मा के अनुसार, पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन की निगरानी के लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के पूर्व वैज्ञानिक मुकेश कुमार गर्ग को पर्यावरण विशेषज्ञ नियुक्त किया गया है। उन्होंने एनजीटी में दावा किया है कि एसोसिएशन ने अधिकरण के सभी निर्देशों का पालन कर लिया है। साथ ही, 16 अप्रैल 2026 को जारी कारण बताओ नोटिस वापस लेने का अनुरोध भी किया है।

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