School Education: देश के 65 शिक्षा बोर्डों के लिए एक समान फ्रेमवर्क की सिफारिश, संसदीय समिति ने क्या कहा?
Education Boards: देशभर के विभिन्न शिक्षा बोर्डों में एकरूपता लाने को लेकर संसदीय समिति ने महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। समिति ने नई शिक्षा नीति का हवाला देते हुए कहा है कि देश के 65 शिक्षा बोर्डों को एक समान शैक्षणिक फ्रेमवर्क का पालन करने पर विचार करना चाहिए, ताकि छात्रों को समान गुणवत्ता की शिक्षा मिल सके।
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NEP: एक संसदीय समिति ने नई शिक्षा नीति के अनुसार सभी 65 शिक्षा बोर्डों के कामकाज, मूल्यांकन के तरीकों और कॉमन करिकुलम (साझा पाठ्यक्रम) को एक जैसा बनाने के लिए एक समान राष्ट्रीय रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की मांग की है।
यह सिफारिश बुधवार को लोकसभा में पेश की गई एस्टीमेट्स कमेटी (2026-27) की दसवीं रिपोर्ट (अठारहवीं लोकसभा) का हिस्सा है। यह रिपोर्ट "देश में सस्ती और अच्छी शिक्षा देने के लिए बजट और नीतिगत पहलुओं, जिसमें सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन की समीक्षा भी शामिल है" पर आधारित है।
देश में 65 शिक्षा बोर्ड, लेकिन मानकों में है बड़ा अंतर
समिति ने बताया कि भारत में स्कूल शिक्षा के 65 बोर्ड काम कर रहे हैं, जिन्हें राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर चलने वाले रेगुलर और ओपन स्कूल बोर्डों में बांटा गया है।
समिति ने कहा, "राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख बोर्ड सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (27,000 से ज्यादा स्कूलों के साथ), काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (2,300 से ज्यादा स्कूलों के साथ) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग हैं।"
समिति ने आगे कहा, "राष्ट्रीय स्तर के बोर्डों के अलावा, हर राज्य में स्टेट बोर्ड हैं, और भारत में इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (IB) और कैम्ब्रिज असेसमेंट इंटरनेशनल एजुकेशन (CAIE) जैसे इंटरनेशनल बोर्ड भी काम करते हैं।"
समिति ने देखा कि जहां CBSE और CISCE जैसे बड़े केंद्रीय बोर्ड हजारों स्कूलों में क्वालिटी कंट्रोल के मजबूत सिस्टम बनाए रखते हैं, वहीं कई राज्य और ओपन स्कूलिंग सिस्टम अलग-अलग मूल्यांकन के तरीकों, पाठ्यक्रम के मानकों और कामकाज की दक्षता के साथ काम कर रहे हैं।
समिति ने यह भी देखा कि प्राइवेट एजुकेशन बोर्ड की स्थापना और विस्तार को नियंत्रित करने वाला कोई जरूरी रेगुलेटरी सिस्टम मौजूद नहीं है।
क्या सभी 65 शिक्षा बोर्डों के लिए बनेगा एक समान नियामक ढांचा?
समिति ने कहा, "समिति का मानना है कि निगरानी की इस कमी से छात्रों के भविष्य और देश भर में सेकेंडरी एजुकेशन के मानकीकरण के लिए सीधा खतरा पैदा हो सकता है।"
समिति ने आगे कहा कि इससे "उन छात्रों की जानकारी में अंतर आ सकता है जिन्हें यूनिवर्सिटी और प्रोफेशनल एजुकेशन में सीट पाने के लिए मुकाबला करना होता है"।
इसे देखते हुए, समिति ने जोरदार सिफारिश की कि शिक्षा मंत्रालय नई शिक्षा नीति (NEP), 2020 के अनुसार सभी 65 एजुकेशन बोर्ड के कामकाज, मूल्यांकन के मानदंडों और सामान्य पाठ्यक्रम को एक जैसा बनाने के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय रेगुलेटरी ढांचा बनाए।
समिति ने यह भी सिफारिश की कि अनधिकृत प्राइवेट स्कूलों और बोर्ड की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए, मंत्रालय को किसी भी नए बोर्ड को मंज़ूरी देने से पहले एक सख्त, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम अनिवार्य करना चाहिए।
इसने यह भी सिफारिश की कि मंत्रालय एक पब्लिक डिजिटल रिपॉजिटरी शुरू करे जिसमें सभी मौजूदा मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय, राज्य और अंतरराष्ट्रीय बोर्ड की जानकारी हो, ताकि छात्रों को गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों से बचाया जा सके।
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