'हंटर' सविता भाभी और वासुगिरी का तड़का
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अनुराग कश्यप की बोल्ड और सेक्स सीन से भरपूर फिल्म 'हंटर' रिलीज होने के लिए तैयार है लेकिन फिल्म आने से पहले ही अपने बोल्ड और बिंदाग डॉयलाग को लेकर चर्चा में आ गई है।
कहा जा रहा है कि कैसे नए सैंसर बोर्ड ने फिल्म के ट्रेलर में इतने बोल्ड संवादों को ओके कर दिया। अनुराग कश्यप ने भले ही फिल्म को कामदेव को समर्पित कर दिया हो लेकिन सवाल उठ सकते हैं कि फिल्म के कथित सेक्स प्रधान दृश्यों के साथ साथ बेबाक संवादों को फिल्म में रखना कितना जरूरी था।
एक सीन में हीरो लड़की से कहता है 'तृप्ति मैं वासु हूं, मेरे टाइप के लड़कों को #$^%^% कहते हैं.', एक दूसरे सीन में हीरो बड़ी शान से बता रहा है कि वो इस वासुगिरी के बिजनेस में 14 साल से है।
दरअसल ए ग्रेड मिलने से ही फिल्मकार का दायित्व खत्म नहीं हो जाता वो ट्रेलर में क्या परोस रहा है और सैंसर बोर्ड ने ट्रेलर को संवादों को किस तौर पर लिया है, ये भी देखना जरूरी है।
लव और सेक्स के बीच कंन्फ्यूज नहीं होना चाहिए
13 14 साल का लड़का मंदार जब ब्लू फिल्म देखते हुए पकड़ा जाता है तो वो बोलता दिखाया गया है- "वो पोस्टर के चक्कर में मिस्टेक हो गया सर, मेरे को लगा छोटा चेतन लगी है'
तब पुलिस वाला लड़के से कहता है 'तू छोटा चेतन देखने आया था या छोटा चेतन बड़ा करने' यानी पुलिसवाला ऐसे लड़कों की नब्ज पहचानता है।
13-14 साल के लड़के मंदार को पता है कि किस तरह की लड़कियां जल्दी पट जाती हैं तभी तो वो हमउम्र लड़कों को ज्ञान देता है--सैकेंड बेस्ट पर लाइन मारो...वहां फटने के चांस ज्यादा होते हैं। हीरो के ये अल्फाज- लव और सेक्स के बीच कंन्फ्यूज नहीं होना चाहिए...इट्स ए फिजिकल नीड।
हीरो कामुकता के मारे लड़कियों के अन्तवस्त्रों की दुकान पर जा पहुंचा और कपड़ों को छू छू कर देख रहा है। ऐसे में दुकानदार कहता है साहब दबाओ मत खराब हो जाएगी।
ऐसे में हीरो का जवाब कि इसमें दबाने जैसा क्या है। अनुराग में जिस बोल्ड अंदाज में डॉयलाग फिल्म में शामिल किए हैं उन्हें ट्रेलर में दिखाकर दरअसल अनुराग ऐसे दर्शकों को लॉलीपॉप थमा रहे हैं जो सेक्स प्रधान फिल्में पसंद करते हैं।
सेक्सी सविता भाभी का जिक्र
फिल्म के ट्रेलर में जमकर सेक्स सीन हैं और उतने ही बोल्ड और द्विअर्थी संवाद भरे पड़े हैं। फिल्म में ज्योत्सना भाभी का भी एक किरदार दिखाया गया है। कामुक कथाओं की सेक्सी सविता भाभी इससे काफी मिलती जुलती है।
सविता भाभी का सांकेतिक जिक्र करके अनुराग ने उस दर्शक वर्ग को भी खींचने का प्रयास किया है जो कामुक कथा कामुक सीडी और डीवीडी देखने के आदी है।
फिल्म की हीरोइन राधिका आप्टे पहले ही कह चुकी है कि फिल्म का विषय बोल्ड है और ऐसे में इसमें बोल्ड सीन न हों तो गलत होगा।
राधिका का कहना है कि फिल्म में जिस तरह के किरदार हैं, ऐसे किरदार हर किसी मोहल्ले में मिल जाएंगे। कॉलेज जाती लड़कियां और अकेले रहते लड़के किस तरह की जिंदगी जीते हैं, ये फिल्म उसका शानदार उदाहरण है।
लेकिन राधिका शायद भूल गई कि कॉलेज के लड़के और लड़कियां सरेआम डबल मीनिंग शब्दों का प्रयोग नहीं करते। लेकिन अनुराग कश्यप ने अपनी इस सेक्स प्रधान फिल्म को उस वर्ग के लिए बनाया है जो खुली जिंदगी के पैरोकार हैं और समाज और जिंदगी में सेक्स की अहमयित को ज्यादा खास मानते हैं।