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'लोग आज भी मुझे सेक्स सिंबल जैसा देखते हैं'

Wed, 12 Aug 2015 03:27 PM IST
Updated Wed, 12 Aug 2015 03:27 PM IST
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John Abraham's exclusive interview

जॉन अब्राहम करीब दो साल बाद टिकट खिड़की पर लौट रहे हैं। अपने लंबे अनुभव से जॉन जान चुके हैं कि दर्शकों को हंसाना कठिन है। मगर इसे एक चुनौती के रूप में लेकर वह फिल्म वेलकम बैक में अज्जू भाई बने हैं। एक गुंडा, जो प्यार में पड़ने के बाद सुधरना चाहता है। जॉन अब्राहम से उनके सिनेमा को लेकर बातचीत की रवि बुले ने।

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वेलकम बैक के पोस्टर में आप कुर्सी पर बैठे हैं और तीन दिग्गज आस-पास खड़े हैं! क्या माजरा है? इस सवाल के जवाब में डॉन कहते हैं, ये अज्जू भाई की कहानी है। वह गुंडा है। उसे प्यार हो जाता है तो वह शरीफ बनना चाहता है।
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शरीफ बनने के लिए उसे उदय और मजनू भाई (अनिल कपूर और नाना पाटेकर) को मनाना पड़ता है। जो गुंडे से शरीफ बन चुके हैं। ये सब फंटर लोग हैं। यही अज्जू भाई का ट्रेक है। वह नाचता-गाता है। हंसता-हंसाता है। इस गुंडे से आप प्यार करेंगे।

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'कॉमेडी करना बहुत मुश्किल काम हैं'

John Abraham's exclusive interview

मद्रास कैफे में कड़ी मेहनत वाला गंभीर रोल करने के बाद क्या आपको लगा कि अब एक कॉमेडी करनी चाहिए? इस पर जॉन कहते हैं कि ऐसा नहीं है। मैं कॉमेडी का बहुत बड़ा फैन हूं। कॉमेडी मेरे लिए एक ड्रग है। अगर आप कॉमेडी करें और टाइमिंग सही तो आप दस बार फिर से वही करना चाहेंगे।

लेकिन कॉमेडी करना बहुत कठिन है। ऐक्शन और रोमांस करना आसान है। मैंने यह सब किया है, इसलिए कह रहा हूं। सच यह है कि लोगों को हंसाना बहुत मुश्किल होता है। गरम मसाला, देसी बॉय्ज, हाउसफुल-2 जैसी फिल्मों से मैंने काफी कुछ सीखा और पहली बार सोलो (अकेला) आया हूं।

लेकिन मेरे आस-पास जो ऐक्टर हैं नाना पाटेकर, परेश रावल, नसीरूद्दीन शाह, अनिल कपूर सब कमाल हैं। जब आप इन ऐक्टरों के साथ काम करेंगे तो आपका लेवल ही बढ़ेगा।

'मेरी पुरानी इमेज आज भी लोग याद रखते हैं'

John Abraham's exclusive interview

आपने अति-आधुनिक होते भारत में सेक्स सिंबल के रूप में करिअर शुरू किया था। फिर ऐक्टर के रूप में जमे और कॉमेडी में भी पहचाने जा रहे हैं। यह बदलाव सहज रहा या फिर कोशिशों से संभव हुआ? इस सवाल पर जॉन जवाब देते हैं।

यह सही है कि मैं ऐसे सेक्स सिंबल के रूप में आया था, जैसा भारत में पहले कभी नहीं था। आज भी ज्यादातर लोग मुझे देखते हैं तो मेरी उसी इमेज को ध्यान में रखते हैं। लेकिन उन्होंने मेरी फिल्में देखीं। जिस्म, दोस्ताना, धूम, न्यूयॉर्क, नौ दो ग्यारह, शूटआउट एट वडाला और बाकी तमाम फिल्में भी पसंद कीं।

लेकिन जब मैंने मद्रास कैफे की और इंडस्ट्री के डायरेक्टरों ने देखा तो उन्हें मेरे टेलेंट पर भरोसा हुआ। यही समय है जब आपको पता लगता है, आपकी उपस्थिति दर्ज हो गई है। सीरियस डायरेक्टर आपके साथ काम करना चाहते हैं। लेकिन मेरे हिसाब से अभी मुझे कॉमेडी का एक और लेवल पार करना है क्योंकि जैसा कि मैंने कहा हंसाना सबसे मुश्किल काम है।

वैलकम बैक मेरे लिए बहुत बड़ा मौका

John Abraham's exclusive interview

क्या आपने कॉमेडी को चैलेंज की तरह लिया है और कब कॉमेडी के कठिन होने की बात आपने महसूस की? इस पर जॉन का जवाब है, गरम मसाला के वक्त मुझे पता भी नहीं था कि क्या कर रहा हूं! मैंने अक्षय कुमार से, परेश रावल से बहुत कुछ सीखा। हाउसफुल और देसी बॉय्ज में मैं अक्षय के साथ था। दोस्ताना में अभिषेक बच्चन के साथ था।

लेकिन वेलकम बैक में मुझे लगा कि यह मेरे लिए मौका है। जहां अकेला हूं। मैंने इसे चैलेंज की तरह लिया। फिल्म साइन करते ही अक्षय को फोन किया, ‘गुरुजी मैंने वेलकम बैक साइन की है।’ वेलकम में वह हीरो थे। उन्होंने कहा कि बहुत अच्छा किया। यह फिल्म तुम्हें जो देगी वह कोई और फिल्म नहीं दे सकेगी। अक्षय मेरे लिए बड़े भाई जैसे है। हम एक-दूसरे की कामयाबियों पर बहुत खुश होते हैं।

अभिषेक और अक्षय इंडस्ट्री में मेरे सबसे अच्छे दोस्त

John Abraham's exclusive interview

आपने हेराफेरी-3 में अक्षय की जगह ले ली! इस बारे में उनसे क्या कहा? इस मुश्किल सवाल का जॉन आसान जवाब देते हैं वो कहते हैं, मेरे इंडस्ट्री में कुछ दोस्त हैं, जो काफी करीब हैं। अक्षय और अभिषेक उनमें से हैं। रोहित धवन मेरे काफी नजदीक हैं। अब उसका भाई वरुण भी करीब हो गया है। मैंने अक्षय को हेराफेरी-3 के बारे में बताया तो उसने कहा कि जरूर करो। बहुत अच्छी फिल्म है।

निर्माता के रूप में आपने विक्की डोनर भी कॉमिक टोन के साथ बनाई। क्या वह कॉमेडी को लेकर आपकी सोच का नतीजा थी? इस पर जॉन कहते हैं, मेरी दोनों फिल्में (विक्की डोनर और मद्रास कैफे) एक मैसेज के साथ थी। विक्की डोनर भले ही दर्शकों के लिए कॉमेडी थी, लेकिन हमने उस स्पर्म डोनेशन जैसे गंभीर विषय को लेकर बनाया था।

डॉक्टर के रूप में अन्नु कपूर का किरदार छोड़ दें तो फिल्म को लेकर हमारा ट्रीटमेंट कहीं कॉमिक नहीं था। मैं उस फिल्म की स्क्रिप्ट के पहले से पंद्रहवें ड्राफ्ट तक क्रिएटिव रूप से शामिल था। एक प्रोड्यूसर के रूप में मैं बिल्कुल अलग ‘जानवर’ हूं। कंटेंट मैं खुद क्रिएट करता हूं और उसमें वक्त लगता है। मद्रास कैफे में मुझे छह साल लगे थे।

ज्यादा फिल्मों से दर्शक ऊब जाते हैं

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मद्रास कैफे के करीब दो साल बाद आपकी फिल्म आ रही है। ऐसा नहीं लगता कि यह गैप ज्यादा है? इस पर जॉन का कहना है कि, अगर कोई रोज आपके घर आएगा तो आप उसे नहीं पूछेंगे। परंतु अगर मेहमान साल दो साल बाद आएगा तो आप उसका स्वागत करेंगे, उसे रुकने को कहेंगे।

मुझे लगता है कि बॉक्स ऑफिस पर दो साल बाद आने की वजह से लोग मेरा स्वागत करेंगे। मैं खुद में खुश हूं। मुझे लाइफ में कोई टेंशन नहीं है। लेकिन इस बीच तो आप फिल्में शूट करते रहे हैं! जी हां, मेरी रॉकी हैंडसम जनवरी 2016 में आएगी। इसके बाद ढिशुम जुलाई में। फोर्स-2 अक्तूबर में। इन सारी फिल्में में मैं प्रोड्यूसर या को-प्रोड्यूसर हूं।

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