Lagaan: ‘घनन घनन’ गाने को बिना बादलों के कैसे शूट किया गया? फिल्म ‘लगान’ के सिनेमैटोग्राफर ने सुनाया किस्सा
Movie Lagaan Complete 25 Years: आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘लगान’ को 25 साल पूरे हो चुके हैं। इस फिल्म से जुड़े सिनेमैटोग्राफर अनिल मेहता ने कुछ अनसुने किस्से हाल ही में साझा किए हैं।
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फिल्म ‘लगान’ ने हाल ही में अपनी सिल्वर जुबली मनाई है। इस फिल्म से जुड़े सिनेमैटोग्राफर अनिल मेहता ने कई किस्से, यादें और अनुभव हालिया एक इंटरव्यू में साझा किए हैं। कितनी मुश्किलों का सामना उन्हें फिल्म की शूटिंग के वक्त करना पड़ा, यह भी बताया है।
आमिर खान ने किया पूरा सपोर्ट
आशुतोष गोवारिकर निर्देशित और आमिर खान की प्रोड्यूस फिल्म ‘लगान’ से जुड़ी बातें अनिल मेहता ने पीटीआई के साथ एक इंटरव्यू में साझा की हैं। वह कहते हैं, ‘मेरे लिए यह खोजने का सफर था। यह पता लगाना कि क्या करना है? कैसे करना है? और क्या कहना है? ये सब काम के दौरान ही समझ में आया। हम सचमुच कैंप में गए बॉय स्काउट्स की तरह थे। हर कोई यह ढूंढ रहा था कि इसे सही तरीके से कैसे किया जाए। यह आसान काम नहीं था। उस समय यह मेनस्ट्रीम मीडियम का हिस्सा नहीं था, हम अनजान इलाके में थे।’
अनिल मेहता ने आगे कहा, ‘हर कोई खोज में लगा था और इस खोज की अच्छी बात यह थी कि हम सब मिलकर इसे ढूंढ रहे थे, जिसमें आमिर भी शामिल थे, जो एक बहुत एक्टिव प्रोड्यूसर थे। वे भी हमारे साथ बॉय स्काउट की तरह घूमते थे।’
अनिल मेहता ने फिल्म की लोकेशन चुनने के बारे में भी बताया। उन्होंने बताया कि आशुतोष गोवारिकर और देसाई ने शुरू में नासिक के पास एक लोकेशन चुनी थी, लेकिन भुज की यात्रा ने सब कुछ बदल दिया। अनिल कहते हैं, ‘यह एक सुखद संयोग जैसा था। नितिन कह रहे थे कि मैं इस टीले पर मंदिर बना सकता हूं। मैं कह रहा था कि हम दूसरे टीले को बैकड्रॉप में रखकर फाइनल मैच करवा सकते हैं, ताकि भीड़ स्टेडियम की तरह बैठ सके। हमारे पास गांव बसाने के लिए काफी समतल जमीन भी थी। बस वह सुबह जादुई थी क्योंकि सब कुछ एक साथ हो रहा था।’
मुश्किल था ‘घनन घनन’ गाना शूट करना
अनिल मेहता आगे कहते हैं, ‘लाइटिंग, कैमरा और कोरियोग्राफी टीमों ने मिलकर ‘घनन घनन’ गाने की शूटिंग के लिए बादल छाए होने और बारिश वाले मौसम का भ्रम पैदा किया। फिल्म में यह गाना उस पल को दिखाता है जब चंपानर गांव के ऊपर काले बादल छा जाते हैं और सूखे से परेशान गांव वाले खुशी से झूम उठते हैं, लेकिन फिर बिना एक भी बंद बारिश हुए बादल हट जाते हैं। अगर आप गाना देखेंगे, तो पाएंगे कि जमीन पर कोई परछाई नहीं है। जबकि दर्शकों को बादल छाए होने का अहसास होता है, लेकिन यह असली नहीं है।’
अनिल आगे कहते हैं, ‘हमें भुज के बीच में बादल नहीं मिलने वाले थे इसलिए हमने यह समाधान निकाला। कोरियोग्राफर ने सुझाव दिया कि इसे 4-5 शॉट्स में करते हैं, ये सभी लंबे शॉट्स हैं।’