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सत्यजीत रे: भारतीय सिनेमा को पूरी दुनिया में पहुंचाया, घर लाकर दिया गया था 'ऑस्कर'

Fri, 23 Apr 2021 06:32 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: अपूर्वा राय Updated Fri, 23 Apr 2021 06:32 PM IST
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Satyajit ray death anniversary: A tribute to Satyajit Ray versatile Director Writer
सत्यजीत रे - फोटो : इंस्टाग्राम

2 मई 1921 को जन्में सत्यजीत रे की आज पुण्यतिथि है। उनका निधन आज ही के दिन साल 1992 में हुआ था। सत्यजीत रे की गिनती महान निर्देशकों में होती है। उन्होंने अपने अपने जीवन में कुल 37 फिल्में बनाई थी लेकिन आज भी लोग उन्हें उनके योगदान के लिए याद करते हैं। भारतीय सिनेमा को सत्यजीत रे ने ही पूरी दुनिया में पहुंचाया। वह एक लेखक, पब्लिशर, इलुस्ट्रेटर, कॉलीग्राफर, ग्राफिक डिजाइनर और फिल्म क्रिटिक भी थे।



 

Satyajit ray death anniversary: A tribute to Satyajit Ray versatile Director Writer
Satyajit Ray - फोटो : सोशल मीडिया
सत्यजीत रे का शुरुआती जीवन कठिनाइयों में बीता। पिता की बचपन में ही मौत हो गई थी। अर्थशास्त्र पढ़ने के बाद वे शांति निकेतन गए। सत्यजीत रे को 1950 में लंदन जाने का मौका मिला। यहां उन्होंने कई फिल्में देखीं। साथ ही सपना देखा भारतीय सिनेमा को ऊचाईयों पर ले जाने का।
 
Satyajit ray death anniversary: A tribute to Satyajit Ray versatile Director Writer
सत्यजीत रे - फोटो : सोशल मीडिया

ऐसे शुरू किया करियर
सत्यजीत रे ने अपने करियर की शुरुआत साल 1943 में बतौर जूनियर विजुलायजर की। जहां से उन्हें 18 रुपये वेतन के तौर पर मिलत थे। इसके बाद उन्होंने डिजाइनिंग में भी हाथ आजमाया। उन्होंने जवाहर लाल नेहरू की किताब डिस्कवरी ऑफ इंडिया का डिजाइन भी किया। कपंनी के काम से लंदन गए सत्यजीत से वहां के सिनेमा से इतने प्रभावित हुए कि निर्देशक बनने की ठान ली। उनकी पहली फिल्म थी पाथेर पांचाली। इस फिल्म को कांस फिल्म फेस्टिवल में भी खूब सराहा गया।

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सत्यजीत रे, वहीदा रेहमान - फोटो : Social Media

उन्होंने ज्यादातर फिल्में बंगाली में ही बनायी। उनकी पहली फिल्म 'पाथेर पांचाली' ने कई अवार्ड जीते। हिन्दी में उन्होने 'शतरंज के खिलाड़ी' जैसी फिल्म बनाई। जो हिन्दी सिनेमा की यादगार फिल्म है।सत्यजीत रे को भारतीय सिनेमा का सबसे बेहतर डायरेक्टर कहा जाता है। 'द गॉडफादर' जैसी फिल्मों के डायरेक्टर फ्रांसिस फॉर्ड कोपोला सत्यजीत रे के फैन थे। 1991 में प्रदर्शित आंगतुक सत्यजीत रे के सिने करियर की अंतिम फिल्म थी। तीस मार्च 1992 को भारतीय फिल्मकार सत्यजीत रे को ऑनररी लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से नवाजा गया था। 

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सत्यजीत रे - फोटो : SELF

सिनेमा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए ही उन्हें विशेष ऑस्कर सम्मान दिया गया था। यही वो साल था जब सिनेमा का ये सितारा हमें हमेशा के लिए छोड़कर चला गया। सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए सत्यजीत रे को ऑस्कर देने के लिए कमेटी के अध्यक्ष भारत आए। सत्यजीत रे बीमारी के कारण यात्रा नहीं कर सकते थे। फिल्मों में उनके योगदान के लिए सन 1992 में उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न भी दिया गया।

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