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कितनी सफल होंगी 10-20 मिनट की ये फिल्में
रेनू/फीचर डेस्क
Updated Mon, 29 Jul 2013 11:08 AM IST
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आजकल बॉलीवुड में ढाई या तीन घंटे की फिल्म नहीं, बल्कि शॉर्ट यानी दस से तीस मिनट तक की फिल्में बनाई जा रही हैं। फिल्म `बॉम्बे टॉकीज’ इसी का एक उदाहरण है। इसमें 20-20 मिनट की कई फिल्में शामिल थीं।
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अनुराग कश्यप की `शॉर्ट्स’ नामक फिल्म भी ऐसी ही फिल्म है। इसमें छोटी अवधि की पांच फिल्में हैं। इन फिल्मों के नाम 'सुजाता', 'एपिलॉग’, 'ऑडैसिटी', 'मेहफूज’ और `शोर’ हैं।
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इन पांचों फिल्मों को लोगों और आलोचक दोनों ओर से खूब सराहना मिली है। ये पांचों फिल्में पांच अलग-अलग कहानियों पर आधारित हैं। जिसे पांच अलग नए निर्देशकों ने बनाया है। सभी नए निर्देशकों को एक कॉन्टेस्ट के जरिए अनुराग कश्यप और उनकी टीम ने चुना।
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अलग तरह के सिनेमा से जुड़ने की इच्छा रखने वाले निर्देशकों, कलाकारों और निर्माताओं के लिए इस लघु फिल्म फॉरमेट ने कई रास्ते खोल दिए हैं। इन फिल्मों को लोगों तक पहुंचाने वाले क्लब व कंपनियों के लिए भी छोटे बजट में कई अवसर मिलने लगे हैं।
उन्हीं में से एक है 'शामियानाः एक शार्ट फिल्म क्लब' जिसे साइरस डस्टर ने सन् 2000 में 20 सदस्यों के साथ शुरू किया था, आज यही फिल्म क्लब 5,000 सदस्यों का है। साइरस अपनी इस सफलता की वजह इन छोटी फिल्मों को देते हैं।
वह कहते हैं, `इन लघु फिल्मों का भविष्य में सफर बहुत लंबा चलने वाला है। क्योंकि बाजार में लघु फिल्में बनाने वाले निर्देशकों के लिए असीम संभावनाएं हैं।’ इन दिनों शामियाना को रोजाना लगभग हर दो घंटे में एक प्रोजेक्ट मिल जाता है।
लेंसमैंगोप्स पिक्चर कंपनी ने पहले फ्री में यूट्यूब के जरिए लघु फिल्मों को प्रदर्शित करना शुरू किया था। अब इस मार्केट को देखकर इन फिल्मों को ऑनलाइन देखने के लिए 1 से 1.50 डॉलर से भी ज्यादा की राशि तक मिलने लगी है। टेलीविजन पर शॉर्ट फिल्म मेकिंग प्रतियोगिता के चलते यह और बढ़ रहा है।
लीक से हटकर नए-नए विषयों पर बनने वाली, कम समय और कम बजट की ये लघु फिल्में फिल्म निर्माण के क्षेत्र में आने वाले कल को बयां कर रही हैं।