बॉलीवुड के चर्चित और मशहूर डायरेक्टर विजय आनंद की आज डेथ एनिवर्सरी है। विजय आनंद ने 70-80 के दशक में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लिए कई शानदार फिल्मों का निर्माण किया था। उन्होंने दुनिया को ‘काला बाजार’, ‘तेरे घर के सामने’, ‘गाइड’, ‘ज्वेल थीफ’, ‘जॉनी मेरा नाम’, ‘तेरे मेरे सपने’ ‘कोरा कागज’ जैसी कई सुपरहिट फिल्में दी। फिल्मी करियर के अलावा गोल्डी की निजी जिंदगी भी काफी चर्चा में रही तो चलिए आपको रूबरू कराते हैं अभिनेता विजय आनंद की जिंदगी से जुड़ी कुछ अनसुनी बातों से...
Vijay Anand: भाई को बनाया स्टार, भांजी से की शादी, विवादों में रही इस फिल्ममेकर की जिंदगी
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विजय आनंद ने अपने करियर में रोमांटिक, कॉमेडी, फैमिली ड्रामा, थ्रिलर हर तरह की फिल्में बनाईं। ठीक इसी तरह उनकी रियल लाइफ भी काफी उतार-चढ़ाव से भरी रही। 22 जनवरी 1934 को पंजाब के गुरदासपुर में जन्मे विजय आनंद को गोल्डी आनंद के नाम से भी जाना जाता था। उन्होंने लीक से हटकर फिल्में बनाईं और फिल्म इंडस्ट्री में मशहूर निर्देशक के रूप में पहचान स्थापित की। विजय अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके दो बड़े भाई डायरेक्टर-प्रॉड्यूसर चेतन आनंद और अभिनेता-निर्देशक देव आनंद थे। इन तीन भाइयों ने साथ मिलकर ‘नवकेतन फिल्म्स’ शुरू की थी। यह एक ऐसा प्रॉडक्शन हाउस था, जो अपनी फिल्मों की बेहतरीन कहानियों और यादगार संगीत के लिए जाना जाता है।
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विजय आनंद ने सिर्फ 23 साल की उम्र में नौ दो ग्यारह बनाकर डायरेक्टर के रूप में अपनी पहचान बना ली थी। फिल्म गाइड की सफलता के बाद उन्होंने तेरे मेरे सपने (1971) बनाई, जो नहीं चली। इससे विजय आनंद को गहरा धक्का लगा और वह डिप्रेशन में आ गए। विजय आनंद ओशो की शरण में चले गए। अपना नाम स्वामी विजय आनंद भारती रख लिया। भगवा कपड़े और गले में बड़ी माला पहनने लगे थे। यहां तक कि अपने स्टूडियो में प्रवचन भी देने लगे थे। हालांकि, जल्द ही उनका मोह ओशो से भंग हो गया और फिर से सांसारिक जिंदगी में लौट आए।
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फिल्मों की बदौलत विजय आनंद ने दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। फिल्म और एक्टिंग के अलावा वह अपनी पर्सनल लाइफ की वजह से भी सुर्खियों में रहे। खासतौर पर अपनी शादी को लेकर उन्हें काफी विवादों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपनी बड़ी बहन की बेटी यानी सगी भांजी से शादी करके तमाम रिवाजों को ताक पर रख दिया। बड़ी बहन की बेटी सुषमा से इस शादी पर पूरा परिवार उनसे नाराज हो गया। वहीं, समाज में भी हंगामा मच गया। 1978 में उनकी यह दूसरी शादी थी, जो उस समय काफी विवादों में रही थी। हालांकि, बाद में परिवार ने इस विवाह को स्वीकार कर लिया।
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विजय आनंद ने ‘हकीकत, ‘कोरा कागज’, ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया। एक दौरान ऐसा भी आया, जब विजय आनंद तनाव का शिकार हो गए थे। फिर वह आध्यात्म की ओर चले गए थे। 23 फरवरी साल 2004 में दिल का दौरा पड़ने से विजय आनंद का निधन हो गया। आज विजय आनंद हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी अमिट छाप आज भी लोगों के बीच मौजूद है।
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