'जर्सी' ने तोड़ दी थी शाहिद कपूर की उम्मीद; अब तक अधूरी है यह किरदार अदा करने की ख्वाहिश, एक्टर का खुलासा
Shahid Kapoor Exclusive Interview: शाहिद कपूर जब भी बात करते हैं बड़ी ही ईमानदारी से, बिना घुमाए-फिराए अपनी सोच जाहिर करते हैं। अमर उजाला से हुई इस बातचीत में अभिनेता ने अपनी अगली फिल्म, बॉलीवुड की फिल्मों और पीआर सिस्टम पर खुलकर बात की...
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शाहिद की अगली फिल्म 'ओ रोमियो' है। विशाल भारद्वाज निर्देशित इस फिल्म में वो तृप्ति डिमरी के साथ नजर आएंगे। हालिया इंटरव्यू में शाहिद ने यह माना कि इंडस्ट्री में नई कहानियां नहीं लिखी जा रहीं, बल्कि पुराने फॉर्मूला पर ही काम किया जा रहा है।
क्या ‘ओ रोमियो’ की स्क्रिप्ट सुनते वक्त कोई डर था?
हां, एक बात की चिंता जरूर थी। मैं नहीं चाहता था कि फिल्म इतनी ज्यादा प्रयोगात्मक हो जाए कि लोग उसे समझ ही न पाएं। मैं यह यकीन करना चाहता था कि फिल्म सिर्फ क्रिटिक्स तक ही नहीं, बल्कि आम लोगों तक भी पहुंचे। हालांकि, जब मैंने कहानी सुनी तो लगा कि इसमें रोमांस है, एक्शन है, थ्रिल है। ऐसा कुछ नहीं है जो लोगों को इससे दूर करे। उल्टा, यह कहानी लोगों को पकड़कर रखने वाली थी। ऊपर से इस पर विशाल भारद्वाज का टच। सब कुछ बहुत सही लगा तो समझ गया कि ये फिल्म छोड़ नहीं सकता।
तृप्ति डिमरी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
जब हमने स्क्रिप्ट सुनी थी तभी मुझे और विशाल सर दोनों को यही फीलिंग आई थी कि इस रोल के लिए तृप्ति से बेहतर कोई नहीं हो सकता। ये उनके लिए एक बहुत ताकतवर किरदार है। मैंने उनकी ज्यादातर फिल्में देखी हैं, उनका काम देखा है। उन्होंने इस किरदार को पूरी गहराई और ईमानदारी के साथ निभाया है।
क्या आपको लगता है इंडस्ट्री में क्रिएटिविटी कम हो गई है? हम बस फॉर्मूला फिल्मों के चक्कर में फंस गए हैं?
जैसी फिल्में मुझे पहले मिलती थीं, उसके मुकाबले अब काफी बदलाव आ गया है। अब मुझे हर तरह के रोल ऑफर होते हैं। लेकिन हां, एक समस्या है। आजकल अच्छी लिखाई बहुत कम हो रही है। ऐसी स्क्रिप्ट्स बहुत कम मिलती हैं जो सच में नई हों, अलग हों और ताजा लगें। आज ज्यादातर फिल्में एक-दूसरे की कॉपी जैसी लगती हैं। राइटर्स को नई और बेहतर कहानियां लिखनी होंगी। किसी और की हिट फिल्म का फार्मूला उठाकर फिल्में बनाना बंद होना चाहिए। ये बात स्क्रिप्ट पढ़ते ही महसूस हो जाती है। पिछले कुछ समय में कुछ हिंदी फिल्मों ने बहुत अच्छा किया है, ये सच है। लेकिन ऐसी अच्छी फिल्में अभी भी बहुत कम बन रही हैं।
कई बार लोगों ने कहा आपका करियर 'खत्म' हो गया है। इससे आपने क्या सीख ली और नई पीढ़ी के एक्टर्स को क्या कहना चाहेंगे?
बहुत बार कहा गया लेकिन मेरी चमड़ी थोड़ी मोटी है। फर्क पड़ता है, दर्द होता है लेकिन मैं जल्दी उससे बाहर निकल आता हूं। जिंदगी में कोई आपको पंच मारेगा तो आप गिरोगे ही। सवाल ये है कि आप कितनी जल्दी उठते हो। अगर आप खुद को पीड़ित मानते रहोगे, तो आगे नहीं बढ पाओगे। सीखना जरूरी है। नई पीढ़ी के एक्टर्स को यही कहूंगा कि सबसे जरूरी है कि आपको खुद पता हो कि आप क्या करना चाहते हो। अगर आप सिर्फ वही करते रहोगे जो चल रहा है, तो करियर भी असुरक्षित रहेगा और जिंदगी भी। सक्सेस और फेलियर आते-जाते रहते हैं, लेकिन अगर फैसले सिर्फ रिजल्ट देखकर लिए, तो काम का मजा खत्म हो जाता है।
इंडस्ट्री में पीआर के जरिए चलाए जा रहे कैंपेन और नेगेटिविटी पर आपकी क्या राय है?
सीधी सी बात है, मैंने कभी ये सब किया नहीं और मैं इन चीजों से बहुत दूर ही रहता हूं। मुझे लगता है ये बहुत फालतू चीजें हैं। क्रिएटिव लोग बच्चे जैसे होते हैं, उनकी क्रिएटिविटी बहुत नाजुक होती है, उसे बचाकर रखना चाहिए। जब आप ऐसी गलत हरकतों में पड़ जाते हो, तो आपकी क्रिएटिविटी भी खराब हो जाती है। मेरे साथ भी ये वर्षों से होता आ रहा है। मैं बहुत अच्छे से वाकिफ हूं कि इंडस्ट्री में क्या-क्या चलता है। लेकिन मेरा तरीका हमेशा यही रहा है कि जिसे जो करना है करने दो। मैं किसी के गेम से प्रभावित नहीं होता। मैं अपना काम अपने हिसाब से करता हूं। जरूरी है कि आप दूसरों के नियमों पर मत खेलो। खेलना है तो अपने नियमों पर खेलो। जिंदगी में खुश रहना जरूरी है। खुद के बारे में अच्छा महसूस करना जरूरी है।
वो कौन सा किरदार जिसे करने की इच्छा अब भी बाकी है?
कई हैं। सशस्त्र बल वाला किरदार करना चाहता हूं। डांस पर आधारित फिल्म करना चाहता हूं। एक पूरा डार्क किरदार भी बिना किसी सफाई के। और, एक ऐसी फिल्म भी जिसमें कोई मुझे सीरियसली न ले, बस मजा हो।
क्या आपने 'हैदर' के लिए फीस नहीं ली थी?
हां, ये सच है। क्योंकि अगर मैं अपनी पूरी फीस लेता, तो फिल्म का बजट बिगड़ जाता। हमारा लक्ष्य था कि जितना भी पैसा है वो फिल्म पर लगे इसलिए मैंने फीस नहीं ली।
किस फिल्म से बहुत उम्मीद थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली?
'जर्सी'। वो फिल्म मेरे दिल के बहुत करीब है। दुर्भाग्य से रिलीज के दो दिन पहले कोविड की वजह से उसे रोकना पड़ा। उसके बाद उसे दोबारा प्रमोट और री-ब्रांड करना बहुत मुश्किल हो गया पर मैं उस फिल्म से आज भी उतना ही जुड़ा हुआ हूं। वो मेरे लिए बहुत खास है।