कैसी है अनुराग कश्यप की नई फिल्म 'अग्ली'?
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बच्चों के अपहरण के 80 फीसदी मामलों में फिरौती की कॉल नहीं आती। लेकिन जिन मामलों में आती भी है तो उनमें क्या होता है, निर्देशक अनुराग कश्यप की फिल्म अग्ली में आप इसे खूब अच्छे से देख सकते हैं। फिल्म के मुख्य भूमिकाओं में राहुल भट्ट, रोनित रॉय व तेजस्विनी कोल्हापुरे हैं।
गैंग्स ऑफ वासेपुर में अनुराग ने बाहरी दुनिया की क्रूरता दिखाई थी, जबकि अग्ली में वह इंसान के अंदर की क्रूरता, छल, स्वार्थ और कपट के रहस्यों से पर्दा उठाते हैं।
यूं तो अब लगभग सभी मान चुके हैं कि रिश्ते, प्रेम और दोस्ती केवल शब्दों में सिमटने लगे हैं, लेकिन अगर कुछ ठोस बचा दिखता भी है तो फिल्म में अनुराग उस पर चोट करके बताते हैं कि सतह कितनी कमजोर पड़ चुकी हैं। जरा-सी खरोंच के साथ सब कुछ बिखर जाता है।
परिवारिक खींचतान की शिकार एक मासूम की कहानी
अग्ली दस-बारह साल की बच्ची कली के अपहरण के साथ उसके अभिभावकों/परिजनों के बीच आपसी दुश्मनी, खींचतान, स्वार्थ, लालच और रिश्तों की कमजोरियों को सामने ले आती है। कली मां (तेजस्विनी) के साथ सौतेले पिता (रोनित रॉय) के संग रहती है, जो पुलिस अफसर है। फिल्मों में हीरो बनने का स्ट्रगल कर रहा कली का पिता (राहुल भट्ट) उसे हर सप्ताहांत में साथ ले जाता है।
ऐसे ही एक सप्ताहांत में वह कली को जब कार में छोड़ कर अपने मित्र से मिलने जाता है तो बच्ची गायब हो जाती है। यहां से सारे पात्र क्रमशः एक-दूसरे के विरुद्ध खड़े हो जाते हैं और धीरे-धीरे यह बात खुलने लगती है कि वे बच्ची को ढूंढने की कोशिश करते हुए आपसी हिसाब-किताब बराबर करने में ज्यादा व्यस्त हैं। पुलिस की भूमिका भी इस खोजबीन मे लगातार हास्यास्पद होती जाती है।
साल के अंत में अनुराग कश्यप का डार्क तोहफा
अनुराग इंसानी मन की परतों की सर्जरी करते हैं और जो कुछ सामने आता है, वह बड़ा ही घिनौना मालूम पड़ता है। फिरौती की रकम के लिए 10 लाख रुपये की कॉल आती है और वह सबके निजी लालच की सीढ़ियां चढ़ते हुए 60 लाख तक पहुंच जाती है। सवाल यह भी है कि क्या परिस्थितियां व्यक्ति को गिरने के लिए मजबूर करती हैं? फिल्म के सारे किरदार हालात की मार के आगे मजबूर हैं। सब कमजोर हैं। किसी का चरित्र ठोस नहीं दिखता।
अनुराग के फैन्स के लिए यह साल के आखिर में डार्क तोहफा है। आप इसे यह सोच कर नहीं देख सकते कि इससे मनोरंजन होगा। किरदारों की जिंदगियों की घिनौनी सच्चाइयां इसमें हैं। फिल्म में थ्रिल है, मगर वह रोमांचित नहीं करता। थ्रिल के साथ आप सहमे-से अपनी आत्मा में डूबते चले जाते हैं। सहम जाते हैं। अपने समय से, अपने समाज से। जिस समय और समाज में आप खुद को असुरक्षित मसूस करते हैं तब उसमें बच्चे कितने सुरक्षित हो सकते हैं?