महज सात साल की उम्र में स्टेज पर पहुंचना और थिएटर करना, वो भी घरवालों की मर्जी के खिलाफ। उसके बाद फिल्मों में एंट्री और देखते-देखते ही 250 से अधिक फिल्में और भारतीय सिनेमा की पहचान बन जाना। ये कोई फिल्मी कहानी नहीं है बल्कि भारतीय सिनेमा के दिग्गज और तमिल सिनेमा के सुपरस्टार शिवाजी गणेशन की असल जिंदगी का फलसफा है।
Sivaji Ganesan: 7 साल की उम्र में शुरू किया थिएटर, पहली ही फिल्म में बीच शूटिंग से निकालना चाहते थे मेकर्स
Sivaji Ganesan Death Anniversary: इंडियन सिनेमा के दिग्गज और तमिल सुपरस्टार शिवाजी गणेशन की आज पुण्यतिथि है। जानते हैं उनके बारे में।
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गणेशमूर्ति बने शिवाजी गणेशन
शिवाजी गणेशन की खासियत थी कि वो लंबी-लंबी कठिन लाइनें भी बड़ी आसानी से याद कर लेते थे और बोल लेते थे। शुरू में थिएटर में बच्चे और महिलाओं की भूमिका निभाने वाले गणेशन जल्द ही नाटकों में मुख्य भूमिका में भी नजर आने लगे। साल 1945 में उन्होंने मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी के जीवन पर बना एक नाटक ‘शिवाजी कांडा हिंदू राज्यम’ किया। इसमें उन्होंने शिवाजी की भूमिका निभाई। ये नाटक काफी पसंद किया गया और शिवाजी के किरदार में गणेशन की इतनी तारीफ हुई कि बाद में उन्होंने अपना नाम ही ‘शिवाजी गणेशन’ कर लिया। जिसके बाद वो इसी नाम से पहचाने गए।
1952 में ‘पराशक्ति’ से किया फिल्मी दुनिया में डेब्यू
कई साल तक थिएटर करने के बाद साल 1952 में शिवाजी गणेशन की पहली फिल्म ‘परमशक्ति’ रिलीज हुई। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही और कई थिएटर्स में 175 दिनों से भी ज्यादा दिन तक चली।
शिवाजी गणेशन को पहली फिल्म से निकालना चाहते थे मेकर्स, करुणानिधि ने लिखी थी स्क्रिप्ट
कृष्णा-पंजू की जोड़ी द्वारा निर्देशित ‘पराशक्ति’ के डिस्ट्रीब्यूटर पीए पेरुमल मुदलियार थे। पीए पेरुमल मुदलियार शिवाजी गणेशन की थिएटर के दिनों में निभाई गई नूर जहां की भूमिका से काफी प्रभावित हुए थे। इसके बाद उन्होंने गणेशन को फिल्म का ऑडिशन देने के लिए फ्लाइट के टिकट भेजकर मद्रास बुलाया। हालांकि, ‘पराशक्ति’ की शुरुआत गणेशन के लिए अच्छी नहीं रही।
जब शूटिंग शुरू हुई और फिल्म के काफी हिस्से की शूटिंग हो चुकी थी, तो मेकर्स गणेशन के दुबले-पतले शरीर से नाखुश थे और उनकी जगह के.आर. रामासामी को लेना चाहते थे। लेकिन पेरुमल ने इनकार कर दिया। यही नहीं गणेशन के कई सीन भी पसंद नहीं थे, जिन्हें दोबारा से फिल्माया गया। ऐसा बताया जाता है कि ‘पराशक्ति’ के लिए शिवाजी गणेशन को 250 रुपए की महीने भर की सैलरी मिली थी। यही नहीं शिवाजी गणेशन की इस पहली फिल्म की स्क्रिप्ट एम. करुणानिधि ने लिखी थी, जो बाद में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने।
दीं कई यादगार फिल्में
इसके बाद शिवाजी गणेशन ने एक के बाद एक कई यादगार और सुपरहिट फिल्में दीं। जिनमें ‘वीरपांडिया कट्टाबोमन’, ‘पसमलर’, ‘उथमा पुथिरन’, ‘पालुम पजहमम’, ‘इरुम्बु थिराई’, ‘पडिक्कधा मेधाई’, ‘पावा मन्निप्पु’, ‘पडिथल मट्टुम पोधुमा’, ‘आलयामणि’, ‘इरुवर उल्लम’, ‘अन्नाई इल्लम’, ‘आनंदवन कट्टलाई’, ‘कप्पलोटिया थमिजान’, ‘काई कोडुथा धीवम’, ‘पुथिया परवई’ और उनकी 100वीं फिल्म ‘नवरात्रि’ शामिल हैं। शिवाजी ने अपने करियर में फैमिली ड्रामा से लेकर रोमांटिक, कॉमेडी और क्राइम-थ्रिलर जैसी हर तरह की भूमिकाएं निभाईं और सबमें सफलता हासिल की।
इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड जीतने वाले पहले भारतीय
शिवाजी गणेशन को 1960 में आई उनकी फिल्म ‘वीरपांडिया कट्टाबोमन’ के लिए काहिरा इजिप्ट में आयोजित एफ्रो-एशियन फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला था। इंटरनेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में अवॉर्ड जीतने वाले शिवाजी गणेशन पहले भारतीय थे। यह फिल्म आज भी तमिल सिनेमा की कल्ट फिल्मों में शामिल है।
ट्रेंड सेटर बनी ‘पसमलर’
शिवाजी गणेशन की सबसे प्रसिद्ध ब्लॉकबस्टर फिल्म है 1961 में आई ‘पसमलर’। इस फिल्म को तमिल सिनेमा में एक ट्रेंड सेटर फिल्म माना जाता है। इसे आज भी तमिल सिनेमा की सबसे यादगार और कल्ट फिल्मों में गिना जाता है। इस फिल्म ने शिवाजी गणेशन की इमेज को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और भी लोकप्रियता दिलाई।
उथमा पुथिरन में निभाया पहली बार डबल रोल
1958 में आई ‘उथमा पुथिरन’ में शिवाजी गणेशन पहली बार डबल रोल में नजर आए थे। उस दौर में डबल रोल वाली फिल्में बनाना काफी मुश्किल माना जाता था। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई और शिवाजी गणेशन के करियर के लिए एक टर्निंग प्वॉइंट बनी।
अपनी सौवीं फिल्म में निभाईं 9 भूमिकाएं
1964 में आई ‘नवरात्रि’ शिवाजी गणेशन की 100वीं फिल्म थी। सबसे खास बात ये है कि अपनी सौवीं फिल्म में शिवाजी गणेशन ने 9 भूमिकाएं निभाई थीं, जो अपना आप में एक चुनौती है। यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर सफल हुई थी।