Gullak: सपनों और खुशियों का ठिकाना ‘गुल्लक’, सात साल बाद भी इन वजहों से अपनी-सी लगती है सीरीज की कहानी
Gullak Series Complete 7 Years: कुछ कहानियां पढ़ने या सुनने के बाद सदा के लिए मन के किसी कोने में बस जाती हैं, कभी ना भूलने वाली यादों का हिस्सा हो जाती हैं। यही बात ‘गुल्लक’ सीरीज पर भी लागू होती है। इस सीरीज को आए हुए 7 साल हो चुके हैं, अब तक 5 सीजन के जरिए इसने दर्शकों को कभी हंसाया, कभी रुलाया तो कभी भावुक किया। जानिए, ऐसी कौन सी बातें थीं, जो इस सीरीज को खास बनाती हैं।
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विस्तार
एक गुल्लक सिर्फ पैसे रखने के लिए नहीं होती थी, यह घर की उन छोटी-छोटी ख्वाहिशों का ठिकाना होती थी, जिन्हें पूरा करने की जल्दी नहीं रहती है। उसमें गिरने वाला हर सिक्का कोई न कोई सपना साथ लिए होता है। कभी नई साइकिल का, कभी पिकनिक का, तो कभी बिना किसी वजह के कुछ खरीद लेने का। धीरे-धीरे सिक्कों की खनक बढ़ती जाती थी और उसके साथ उम्मीदें भी बढ़ने लगती हैं।
अगर इन्हीं बातों को भावनाओं में बदल दिया जाए तो सीरीज ‘गुल्लक’ की कहानी सामने आती है। कहानी में नजर आने वाला मध्यवर्गीय मिश्रा परिवार हमें अपना सा लगता है। उनके सपने, खुशियां, झगड़े से अलग सा रिश्ता महसूस होने लगता है। 27 जून 2019 को पहली बार सीरीज 'गुल्लक' दर्शकों की जिंदगी का हिस्सा बनी थी। सीरीज में जमील खान, गीतांजलि कुलकर्णी, वैभव राज गुप्ता, हर्ष मायर और सुनीता राजवार जैसे उम्दा कलाकार नजर आए थे। यहां जानिए, सात साल बाद भी यह सीरीज और इसकी कहानी क्यों अपनी सी लगती है।
रविवार को पापा बन जाते हैं इंजीनियर
सीरीज ‘गुल्लक’ में संतोष मिश्रा यानी पापा का किरदार निभाने वाले जमील खान को दर्शक रविवार के दिन चाय पीते हुए टूलबॉक्स के साथ देखते हैं। वह महीनों से आवाज कर रहे पंखे को ठीक करते हैं। दरवाजे की कुंडी सीधी करते हैं। पुराना रेडियो भी ठीक करने की फिराक में नजर आते हैं। यह चीजें ठीक हों या ना हों लेकिन संतोष मिश्रा शाम को काफी खुश हो जाते हैं कि आज उन्होंने घर के काम निपटाए। संतोष मिश्रा की तरह ही मध्यवर्गीय परिवारों में अधिकतर पिता भी ऐसा ही करते हैं, कई लोग अपने पिता को ऐसा करते देख चुके हैं। यह सब बातें कई युवाओं की यादों का हिस्सा हैं, यही वजह है कि सीरीज ‘गुल्लक’ के पापा और उनकी हरकतें, चेहरे पर मुस्कान ले आती हैं।
मम्मी पैसे नहीं बचाती घर बचाती हैं
‘गुल्लक’ की शांति मिश्रा यानी मम्मी, बचत करती हैं। घर को कम खर्च में भी सुचारू तौर पर चलाती हैं। अचानक मेहमान आ जाएं, तो अलमारी से अच्छे वाले कप निकलाती हैं। घर में सब्जियां कम हों, तो तेहरी बन जाती है। बच्चों को वह साधारण खाना लगता है, लेकिन मां जानती है कि स्वाद सिर्फ सामग्री से नहीं, नीयत से आता है। शांति मिश्रा की वजह से मिश्रा परिवार मजबूती से मुश्किलों का सामना करता है। ऐसा ही कुछ मध्यवर्गीय मांएं भी करती हैं। वह भी शांति मिश्रा की प्रतिछाया होती हैं। यही वजह है कि ‘गुल्लक’ की मम्मी दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बना लेती हैं।
पानी आने का समय भी एक खास मौका बनता है
मिश्रा परिवार में पानी आने एक तय समय है। ऐसे में शांति मिश्रा को बड़ी चिंता रहती है। पानी आएगा तो ही घर का बाकी काम हो पाएगा। ऐसा ही हाल हम बड़े और छोटे शहरों के मध्यवर्गीय परिवारों में देखते हैं। पानी आने से पहले महिलाएं बाल्टियां, ड्रम और बर्तन तैयार कर लेती है। फिर किसी के घर से आवाज आती है, ‘पानी आ गया’ और इसके बाद पूरा मोहल्ला हरकत में आ जाता था। ‘गुल्लक’ भी ऐसी ही छोटी-छोटी बातों को दिखाती है।
बच्चों के बीच टीवी के रिमोट की लड़ाई
मिश्रा परिवार के दोनों बेटे अनु और अमन बड़े और समझदार हैं लेकिन रिमाेट के लिए लड़ते हैं। यह नजारा और रिमोट के लिए झगड़ा आम घरों में अक्सर बच्चों के बीच होता है। इस चक्कर में भाई-बहन एक-दूसरे को पीट भी देते हैं। इस चक्कर में कई दिन बातचीत नहीं होती लेकिन बाद में सबकुछ ठीक हो जाता है।
हर जगह होती है बिट्टू की मम्मी
सीरीज ‘गुल्लक’ एक किरदार है, बिट्टू की मम्मी। वह मिश्रा परिवार से लेकर मोहल्ले की हर घर की खबर रखती हैं। किसके घर नया फ्रिज आया है, किसके बेटे का रिजल्ट आया है और किसके यहां सुबह-सुबह बर्तन थोड़े ज्यादा जोर से रखे गए हैं, यह सब बिट्टू की मम्मी को पता रहता था। आज की भाषा में इसे प्राइवेसी में दखल कहा जा सकता है लेकिन ऐसी बिट्टू की मम्मी देश में बड़ी संख्या में मिल जाएंगी। यह हम सबकी जिंदगी के आसपास मौजूद रहती हैं।
एक किरदार जो बन गया सबसे खास
सीरीज ‘गुल्लक’ में ड्राॅइंग रूम की मेज पर एक गुल्लक रखी है। उसमें सिर्फ सिक्के नहीं, पूरे परिवार की छोटी-छोटी इच्छाएं जमा होती थीं। फिर घर में वाई-फाई आ गया। मिश्रा परिवार के बेटे अब सिक्कों की खनक से ज्यादा पासवर्ड में दिलचस्पी लेने लगे। शायद इसलिए गुल्लक की जलन दर्शकों को भी महसूस होती है।
यह भावना इसलिए भी दिल को छू जाती है, क्याेंकि हर घर में पुरानी चीज को नई चीजों से बदला जाता है। लेकिन पुरानी चीजों का महत्व कम नहीं होता है। वह जिंदगी का अटूट हिस्सा बनी रहती हैं।