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23 दिन में मिला न्याय: मासूम से हैवानियत के दोषी को उम्रकैद की सजा, 50 हजार रुपये का जुर्माना भी
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 01 Apr 2026 02:49 AM IST
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सार
पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए वारदात के पांच दिन बाद ही चार्जशीट दाखिल कर दी थी। कोर्ट ने महज 18 कार्यदिवस में दोषी के खिलाफ सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष के विशेष लोक अभियोजक के अनुसार, वारदात 20-21 फरवरी की रात की है। सिद्धार्थनगर जिले की रहने वाली बच्ची अपने परिवार के साथ पीपीगंज थाना क्षेत्र स्थित रिश्तेदारी में आयोजित शादी समारोह में शामिल हुई थी। रात करीब 12 से 2 बजे के बीच मासूम अचानक लापता हो गई थी।
सांकेतिक
- फोटो : सांकेतिक
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विस्तार
पीपीगंज थाना क्षेत्र में छह साल की मासूम के साथ हैवानियत के दोषी अशोक निषाद को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अशोक कुमार यादव ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। कोर्ट ने अशोक की मां मां सुनीता देवी को वारदात में सहयोग और सबूत मिटाने का दोषी माना है।
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उसे चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। उस पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए वारदात के पांच दिन बाद ही चार्जशीट दाखिल कर दी थी। कोर्ट ने महज 18 कार्यदिवस में दोषी के खिलाफ सजा सुनाई।
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अभियोजन पक्ष के विशेष लोक अभियोजक के अनुसार, वारदात 20-21 फरवरी की रात की है। सिद्धार्थनगर जिले की रहने वाली बच्ची अपने परिवार के साथ पीपीगंज थाना क्षेत्र स्थित रिश्तेदारी में आयोजित शादी समारोह में शामिल हुई थी। रात करीब 12 से 2 बजे के बीच मासूम अचानक लापता हो गई।
परिजनों ने तलाश शुरू की तो पंडाल के पीछे आरोपी अशोक निषाद मासूम के साथ दुष्कर्म कर रहा था। परिजनों को देखते ही वह बच्ची को छोड़कर भाग गया। पुलिस ने दुष्कर्म, साक्ष्य छिपाने पॉक्सो एक्ट की धारा में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी गिरफ्तार कर लिया था। जांच के बाद पुलिस ने एक सप्ताह के भीतर ही आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया।
परिजनों ने तलाश शुरू की तो पंडाल के पीछे आरोपी अशोक निषाद मासूम के साथ दुष्कर्म कर रहा था। परिजनों को देखते ही वह बच्ची को छोड़कर भाग गया। पुलिस ने दुष्कर्म, साक्ष्य छिपाने पॉक्सो एक्ट की धारा में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी गिरफ्तार कर लिया था। जांच के बाद पुलिस ने एक सप्ताह के भीतर ही आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी साक्ष्यों, गवाहों और परिस्थितियों का गहन परीक्षण किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह अपराध अत्यंत जघन्य और अमानवीय है, जिसमें किसी भी प्रकार की नरमी की गुंजाइश नहीं है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अशोक निषाद को पॉक्सो एक्ट की धारा छह के तहत आजीवन कारावास, जो उसके शेष जीवनकाल तक प्रभावी रहेगा, दिया जाता है। साथ ही अन्य धाराओं में चार वर्ष की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
वहीं, सह-अभियुक्ता उसकी मां सुनीता देवी को साक्ष्य छिपाने के तहत चार वर्ष की कठोर कारावास की सजा दी गई। महत्वपूर्ण बात यह रही कि अदालत ने दोषियों से वसूली गई पूरी जुर्माना राशि पीड़िता के पुनर्वास, शिक्षा और भविष्य के लिए देने का आदेश दिया। दोनों दोषियों को सजा भुगतने के लिए जिला कारागार भेज दिया गया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अशोक निषाद को पॉक्सो एक्ट की धारा छह के तहत आजीवन कारावास, जो उसके शेष जीवनकाल तक प्रभावी रहेगा, दिया जाता है। साथ ही अन्य धाराओं में चार वर्ष की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
वहीं, सह-अभियुक्ता उसकी मां सुनीता देवी को साक्ष्य छिपाने के तहत चार वर्ष की कठोर कारावास की सजा दी गई। महत्वपूर्ण बात यह रही कि अदालत ने दोषियों से वसूली गई पूरी जुर्माना राशि पीड़िता के पुनर्वास, शिक्षा और भविष्य के लिए देने का आदेश दिया। दोनों दोषियों को सजा भुगतने के लिए जिला कारागार भेज दिया गया है।