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Gorakhpur News: एंबुलेंस चालक ने बीआरडी से दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया नवजात
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पादरी बाजार (गोरखपुर)। कुशीनगर से गोरखपुर आए परिजनों ने एंबुलेंस चालक पर नवजात बच्चे को मेडिकल कॉलेज के बजाय दूसरे अस्पताल में भर्ती कराने का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि शाहपुर क्षेत्र के संगम चौराहा स्थित हिमांशु अस्पताल में भर्ती नवजात को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए कहने पर अस्पताल प्रबंधन ने 40 हजार रुपये जमा करने की बात कही।
रुपये नहीं होने पर महिला परिजन के रोते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद परिजन बिना कार्रवाई के चले गए।
जानकारी के अनुसार, कुशीनगर जनपद के पडरौना निवासी सुनीता को पिछले सप्ताह शुक्रवार को प्रसव पीड़ा हुई थी। परिजनों ने उन्हें पडरौना के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उन्होंने बच्चे को जन्म दिया। नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने पर डॉक्टरों ने उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी। परिजन एंबुलेंस से नवजात को लेकर गोरखपुर के लिए निकले थे।
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आरोप है कि रास्ते में एंबुलेंस चालक ने मेडिकल रोड स्थित अस्पताल में बेहतर इलाज का भरोसा दिलाते हुए बच्चे को शाहपुर के संगम चौराहा स्थित हिमांशु अस्पताल में भर्ती करा दिया। परिजनों का आरोप है कि छह दिनों के इलाज के दौरान दवा और अन्य खर्च के नाम पर 43 हजार रुपये लिए गए। बुधवार को नवजात की हालत में सुधार नहीं होने पर परिजनों ने दूसरे अस्पताल में ले जाने के लिए छुट्टी मांगी तो अस्पताल प्रबंधन ने 40 हजार रुपये जमा करने के बाद ही डिस्चार्ज करने की बात कही।
रुपये की व्यवस्था नहीं होने पर महिला परिजन रोते हुए संगम चौराहा पहुंच गई, जहां किसी ने उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
दो अन्य परिवारों ने भी लगाए आरोप
इसी अस्पताल में भर्ती दो अन्य नवजातों के परिजनों ने भी इलाज को लेकर आरोप लगाए हैं। कुशीनगर के मठिया माफी, दुदही निवासी जितेंद्र यादव ने बताया कि पांच दिन पहले उनकी पत्नी ने निजी अस्पताल में दो बच्चों को जन्म दिया था। वहां के डॉक्टरों की सलाह पर दोनों बच्चों को हिमांशु अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती कराया गया। जितेंद्र का आरोप है कि हालत में सुधार नहीं होने पर दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए छुट्टी मांगी गई तो 40 हजार रुपये की मांग की गई, जबकि 10 हजार रुपये पहले जमा किए जा चुके हैं। वहीं पिपरा चौकी क्षेत्र के पीके निषाद ने बताया कि बच्चे के इलाज में करीब 70 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ है।
अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों से किया इनकार
हिमांशु अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर एसके शर्मा ने बताया कि तीनों नवजातों का इलाज एनआईसीयू में विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में चल रहा है। भर्ती के समय एक मरीज के परिजनों ने आर्थिक स्थिति कमजोर होने की जानकारी दी थी। किसी भी मरीज से अतिरिक्त रुपये नहीं लिए गए हैं।
पीड़ित पक्ष द्वारा कोई तहरीर नहीं दी गई है। तहरीर मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-रवि सिंह, सीओ गोरखनाथ
रुपये नहीं होने पर महिला परिजन के रोते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद परिजन बिना कार्रवाई के चले गए।
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जानकारी के अनुसार, कुशीनगर जनपद के पडरौना निवासी सुनीता को पिछले सप्ताह शुक्रवार को प्रसव पीड़ा हुई थी। परिजनों ने उन्हें पडरौना के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उन्होंने बच्चे को जन्म दिया। नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने पर डॉक्टरों ने उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी। परिजन एंबुलेंस से नवजात को लेकर गोरखपुर के लिए निकले थे।
आरोप है कि रास्ते में एंबुलेंस चालक ने मेडिकल रोड स्थित अस्पताल में बेहतर इलाज का भरोसा दिलाते हुए बच्चे को शाहपुर के संगम चौराहा स्थित हिमांशु अस्पताल में भर्ती करा दिया। परिजनों का आरोप है कि छह दिनों के इलाज के दौरान दवा और अन्य खर्च के नाम पर 43 हजार रुपये लिए गए। बुधवार को नवजात की हालत में सुधार नहीं होने पर परिजनों ने दूसरे अस्पताल में ले जाने के लिए छुट्टी मांगी तो अस्पताल प्रबंधन ने 40 हजार रुपये जमा करने के बाद ही डिस्चार्ज करने की बात कही।
रुपये की व्यवस्था नहीं होने पर महिला परिजन रोते हुए संगम चौराहा पहुंच गई, जहां किसी ने उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
दो अन्य परिवारों ने भी लगाए आरोप
इसी अस्पताल में भर्ती दो अन्य नवजातों के परिजनों ने भी इलाज को लेकर आरोप लगाए हैं। कुशीनगर के मठिया माफी, दुदही निवासी जितेंद्र यादव ने बताया कि पांच दिन पहले उनकी पत्नी ने निजी अस्पताल में दो बच्चों को जन्म दिया था। वहां के डॉक्टरों की सलाह पर दोनों बच्चों को हिमांशु अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती कराया गया। जितेंद्र का आरोप है कि हालत में सुधार नहीं होने पर दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए छुट्टी मांगी गई तो 40 हजार रुपये की मांग की गई, जबकि 10 हजार रुपये पहले जमा किए जा चुके हैं। वहीं पिपरा चौकी क्षेत्र के पीके निषाद ने बताया कि बच्चे के इलाज में करीब 70 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ है।
अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों से किया इनकार
हिमांशु अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर एसके शर्मा ने बताया कि तीनों नवजातों का इलाज एनआईसीयू में विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में चल रहा है। भर्ती के समय एक मरीज के परिजनों ने आर्थिक स्थिति कमजोर होने की जानकारी दी थी। किसी भी मरीज से अतिरिक्त रुपये नहीं लिए गए हैं।
पीड़ित पक्ष द्वारा कोई तहरीर नहीं दी गई है। तहरीर मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-रवि सिंह, सीओ गोरखनाथ