सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Nepal Tea Crisis Factories And Gardens Shut Indefinitely After India Enforces Mandatory Quality Testing

UP: चाय पर सख्ती, फैक्टरियां बंद करेंगे नेपाली कारोबारी; 60 हजार श्रमिक और कर्मचारी होंगे प्रभावित; नियम सख्त

अमर उजाला नेटवर्क, सिद्धार्थनगर Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 18 Jun 2026 03:33 PM IST
विज्ञापन
सार

भारत में सख्ती से नेपाली चाय उद्योग संकट में पहुंच गया है। आज से अनिश्चितकालीन बंदी हो गई है। नेपाल का पांच अरब रुपये का निर्यात प्रभावित हो गया है। 60 हजार श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

Nepal Tea Crisis Factories And Gardens Shut Indefinitely After India Enforces Mandatory Quality Testing
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : इंस्टाग्राम
विज्ञापन

विस्तार

भारतीय चाय बोर्ड की ओर से नियमों में बढ़ाई गई सख्ती के कारण नेपाल का चाय निर्यात थम गया है। भारत में आयातित चाय की गुणवत्ता जांच, दस्तावेज सत्यापन और मानक परीक्षण को अनिवार्य कर दिया गया है। कारोबार थमने की वजह से नेपाली चाय उत्पादकों ने बृहस्पतिवार से देशभर की चाय फैक्टरियों और बागानों को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का ऐलान किया है।


दरअसल, मिलावटखोरी रोकने के लिए चाय बोर्ड ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) शुरू किया है। इसके तहत दूसरे देशों से आने वाली चाय की हर खेप की क्वालिटी टेस्टिंग अनिवार्य कर दी गई है। नेपाली चाय उत्पादकों का कहना है कि टेस्ट के नतीजे आने में दो हफ्ते से ज्यादा का समय लगता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


उस दौरान खेप बेची नहीं जा सकती। अगर कोई सैंपल टेस्ट में फेल हो जाता है, तो चाय या तो वापस लेनी पड़ती है या नष्ट करनी पड़ती है। नेपाल टी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने झापा जिले के भद्रपुर में बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बंदी की घोषणा की।
विज्ञापन

एसोसिएशन के महासचिव शुक्र दहल ने कहा कि भारत द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था के कारण नेपाली चाय का निर्यात बाधित हो गया है, इससे पूरे उद्योग पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नेपाल में उत्पादित सीटीसी और ऑर्थोडॉक्स चाय का वार्षिक कारोबार करीब 12 से 14 अरब नेपाली रुपये का है। 

 

इसमें लगभग पांच अरब रुपये की चाय भारत को निर्यात की जाती है। भारत नेपाली चाय का सबसे बड़ा बाजार है और निर्यात प्रभावित होने से उत्पादकों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। 
 

एसोसिएशन ने नेपाल सरकार से वैकल्पिक बाजार की तलाश के लिए तत्काल पहल करने की मांग की है। उनका कहना है कि बांग्लादेश, पाकिस्तान सहित अन्य देशों में नेपाली चाय के निर्यात की संभावनाएं हैं लेकिन इसके लिए सरकार को व्यापारिक और कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
 

60 हजार श्रमिक और कर्मचारी होंगे प्रभावित
चाय नेपाल के प्रमुख कृषि आधारित उद्योगों में शामिल है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 60 हजार श्रमिकों और कर्मचारियों को रोजगार मिलता है। यह क्षेत्र सरकार को प्रतिवर्ष लगभग एक अरब रुपये का राजस्व भी उपलब्ध कराता है।

उद्योग से जुड़े संगठनों ने चेतावनी दी है कि, यदि भारत के साथ उत्पन्न निर्यात संबंधी समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो इसका असर हजारों श्रमिकों, परिवहन कारोबार और निर्यात शृंखला से जुड़े अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ेगा।

गोरखपुर की मंडी में हर महीने पांच टन नेपाली चाय की खपत
गोरखपुर किराना कमेटी के अध्यक्ष गोपाल जायसवाल ने बताया कि यहां के थोक बाजार में हर महीने नेपाल की पांच टन चायपत्ती आती है। यह चाय नेपाल से सिलीगुड़ी जाती है। जिले के व्यापारी सिलीगुड़ी से माल मंगाते हैं। चेंबर ऑफ ट्रेडर्स के अध्यक्ष अनूप किशोर अग्रवाल ने बताया कि गोरखपुर में नेपाल की चाय का करीब एक करोड़ के आसपास का कारोबार हाेता है। साहबगंज मंडी से आसपास के जिलों के साथ ही बिहार के सीमावर्ती जिलों तक चाय की सप्लाई होती है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed