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Gorakhpur News: जेट्टी के दो पिलरों में दरार, रस्सी बांधकर संभाला जा रहा भार
Mon, 13 Jul 2026 02:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 13 Jul 2026 02:51 AM IST
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गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कराई गई रामगढ़झील की जेट्टी की संरचनात्मक सुरक्षा जांच में खामियां मिलने के बाद गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने एहतियाती कदम उठाए हैं। करीब 200 टन वजनी लेक क्वीन क्रूज का भार अब दो के बजाय पांच पिलरों पर वितरित कर दिया गया है। पहले क्रूज को केवल दो पिलरों से एंकर किया जाता था। जांच में यही दोनों पिलर कमजोर पाए गए हैं।
वर्ष 1987 में पर्यटन विभाग की ओर से निर्मित जेट्टी की तकनीकी जांच में अधिकांश ढांचा सुरक्षित पाया गया। हालांकि जिन दो पिलरों का उपयोग क्रूज को बांधने के लिए किया जा रहा था, उनमें संरचनात्मक कमजोरी सामने आई। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक लगातार एंकरिंग का दबाव पड़ने से इन पिलरों की स्थिति प्रभावित हुई।
जांच रिपोर्ट के बाद जीडीए ने तत्काल क्रूज की रस्सियों का भार पांच पिलरों में बांट दिया, ताकि किसी एक पिलर पर अधिक दबाव न पड़े। अब तकनीकी विशेषज्ञ यह आकलन कर रहे हैं कि कमजोर पिलरों की मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित बनाया जा सकता है या नई व्यवस्था विकसित करना अधिक उपयुक्त होगा।
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अधिकारियों की मानें तो दो पिलरों की मरम्मत करने से जेट्टी के अन्य हिस्सों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में नई जेट्टी के निर्माण, क्रूज के लिए अलग एंकरिंग पिलर तैयार करने और झील में फ्लोटिंग जेट्टी के माध्यम से यात्रियों की आवाजाही की व्यवस्था जैसे विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
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वर्ष 1987 में पर्यटन विभाग की ओर से निर्मित जेट्टी की तकनीकी जांच में अधिकांश ढांचा सुरक्षित पाया गया। हालांकि जिन दो पिलरों का उपयोग क्रूज को बांधने के लिए किया जा रहा था, उनमें संरचनात्मक कमजोरी सामने आई। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक लगातार एंकरिंग का दबाव पड़ने से इन पिलरों की स्थिति प्रभावित हुई।
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जांच रिपोर्ट के बाद जीडीए ने तत्काल क्रूज की रस्सियों का भार पांच पिलरों में बांट दिया, ताकि किसी एक पिलर पर अधिक दबाव न पड़े। अब तकनीकी विशेषज्ञ यह आकलन कर रहे हैं कि कमजोर पिलरों की मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित बनाया जा सकता है या नई व्यवस्था विकसित करना अधिक उपयुक्त होगा।
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अधिकारियों की मानें तो दो पिलरों की मरम्मत करने से जेट्टी के अन्य हिस्सों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में नई जेट्टी के निर्माण, क्रूज के लिए अलग एंकरिंग पिलर तैयार करने और झील में फ्लोटिंग जेट्टी के माध्यम से यात्रियों की आवाजाही की व्यवस्था जैसे विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।