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Gorakhpur News: टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठन, संघर्ष जारी रखने का ऐलान
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Thu, 18 Jun 2026 02:21 AM IST
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गोरखपुर। वर्ष 2009 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ लगातार विरोध दर्ज करा रहा है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के तरफ से एक सितंबर 2025 को दिए गए आदेश के बाद से ही संगठन ने इसका विरोध शुरू कर दिया था और आगे भी यह आंदोलन जारी रहेगा।
शिक्षकों का कहना है कि केंद्र सरकार 2009 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने के लिए अध्यादेश जारी किया जाए, जिससे हजारों शिक्षकों की चिंता दूर हो सके। उनका कहना है कि यदि नई योग्यता को पूर्व में नियुक्त कर्मचारियों पर लागू करने का सिद्धांत अपनाया जाता है, तो यह नियम केवल शिक्षकों पर ही नहीं बल्कि पहले से नियुक्त आईएएस, न्यायाधीश, डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए।
बोले शिक्षक
टीईटी किसी भी दशा में स्वीकार नहीं करेंगे। किसी भी सिस्टम को बीच में नहीं बदलना चाहिए। जब हमारी नियुक्ति हुई थी, तभी हम सारे नियमों का पालन करके ही अपने विभाग में आए थे। हमारा संगठन इसके लिए लड़ेगा और हर हाल में संसद से कानून बनवा के टीईटी को वापस करवाया जाएगा।
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- तारकेश्वर शाही, प्रदेश मंत्री जिलाध्यक्ष, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ 2009 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता का हम विरोध कर रहे हैं। वर्ष 2009 से पहले शिक्षकों की नियुक्ति उस समय सरकार के तरफ से निर्धारित शैक्षिक योग्यताओं के आधार पर हुई थी। ऐसे में वर्षों बाद नई योग्यता को पूर्व प्रभाव से लागू करना न्यायसंगत नहीं है। भारत सरकार को 2009 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने के लिए अध्यादेश जारी करना चाहिए।
- ज्ञानेंद्र ओझा,
मंडलीय मंत्री, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
2011 के पहले के वाले शिक्षकों के लिए यह बहुत बड़ी चुनौती है, जो शिक्षक रिटायर होने के करीब पहुंच गए हैं उनसे टीईटी की परीक्षा देने को कहना कहीं से भी उचित नहीं है। राज्य सरकार के पहल के बाद शिक्षकों को अनुभव के आधार पर कुछ छूट दी जानी चाहिए। आदेश आने के बाद देखा जाए कि राज्य सरकार शिक्षकों को क्या रहात देती है। फिलहाल शिक्षकों कि एक बड़ी समस्या के तरफ सरकार का ध्यान गया है। आम शिक्षक इससे खुश हैं कि एक संवेदनशील मामले पर सीएम की नजर है। जरूर शिक्षकों के हित के लिए कुछ सही फैसला लिया जाएगा।
- संजीव कुमार राय,
जिलाध्यक्ष, जूनियर हाई स्कूल
शिक्षकों का कहना है कि केंद्र सरकार 2009 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने के लिए अध्यादेश जारी किया जाए, जिससे हजारों शिक्षकों की चिंता दूर हो सके। उनका कहना है कि यदि नई योग्यता को पूर्व में नियुक्त कर्मचारियों पर लागू करने का सिद्धांत अपनाया जाता है, तो यह नियम केवल शिक्षकों पर ही नहीं बल्कि पहले से नियुक्त आईएएस, न्यायाधीश, डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए।
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बोले शिक्षक
टीईटी किसी भी दशा में स्वीकार नहीं करेंगे। किसी भी सिस्टम को बीच में नहीं बदलना चाहिए। जब हमारी नियुक्ति हुई थी, तभी हम सारे नियमों का पालन करके ही अपने विभाग में आए थे। हमारा संगठन इसके लिए लड़ेगा और हर हाल में संसद से कानून बनवा के टीईटी को वापस करवाया जाएगा।
- तारकेश्वर शाही, प्रदेश मंत्री जिलाध्यक्ष, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ 2009 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता का हम विरोध कर रहे हैं। वर्ष 2009 से पहले शिक्षकों की नियुक्ति उस समय सरकार के तरफ से निर्धारित शैक्षिक योग्यताओं के आधार पर हुई थी। ऐसे में वर्षों बाद नई योग्यता को पूर्व प्रभाव से लागू करना न्यायसंगत नहीं है। भारत सरकार को 2009 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने के लिए अध्यादेश जारी करना चाहिए।
- ज्ञानेंद्र ओझा,
मंडलीय मंत्री, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
2011 के पहले के वाले शिक्षकों के लिए यह बहुत बड़ी चुनौती है, जो शिक्षक रिटायर होने के करीब पहुंच गए हैं उनसे टीईटी की परीक्षा देने को कहना कहीं से भी उचित नहीं है। राज्य सरकार के पहल के बाद शिक्षकों को अनुभव के आधार पर कुछ छूट दी जानी चाहिए। आदेश आने के बाद देखा जाए कि राज्य सरकार शिक्षकों को क्या रहात देती है। फिलहाल शिक्षकों कि एक बड़ी समस्या के तरफ सरकार का ध्यान गया है। आम शिक्षक इससे खुश हैं कि एक संवेदनशील मामले पर सीएम की नजर है। जरूर शिक्षकों के हित के लिए कुछ सही फैसला लिया जाएगा।
- संजीव कुमार राय,
जिलाध्यक्ष, जूनियर हाई स्कूल