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Gorakhpur News: कचरा निकालने वाली फैक्टरियों की सूची में गड़बड़ी, नए सिरे से कराएं सर्वे
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गोरखपुर। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) में 4.0 एमएलडी के प्रस्तावित कामन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) को लेकर गीडा सभागार में बुधवार को एडीएम प्रशासन वैभव शर्मा की अध्यक्षता में बैठक हुई। इस दौरान उद्यमियों ने अपनी समस्याएं बताकर कई आपत्तियां ला दीं। उद्यमियों ने कहा कि पहले सीईटीपी की स्थापना के पूर्व नए सिरे से प्रदूषण विभाग जांच कर कचरा निकालने वाली इकाइयों को चिह्नित कर लें। जिन 55 यूनिटों को कचरा निकालने के लिए प्रदूषण विभाग ने चिह्नित किया है, उनमें से कई ने दावा किया कि उनकी यूनिट से कचरा नहीं निकलता है।
गीडा में हुई बैठक में जयपुर के कंसलटेंट ने सबसे पहले सीईटीपी को लेकर प्रजेंटेशन दिया। बताया कि बृहस्पतिवार को प्रदेश स्तर पर होने वाली बैठक में सभी बिंदुओं को रखा जाएगा। बैठक में कंसलटेंट ने बताया कि सीईटीपी के निर्माण और 15 साल तक अनुरक्षण पर 94 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके साथ ही 15 साल तक सीईटीपी संचालन में उद्यमियों पर 41 करोड़ रुपये का बोझ आएगा। इस खर्च को कचरा निकालने वाले 55 यूनिटों को वहन करना होगा।
इसके बाद उद्यमियों की तरफ से आपत्ति आने लगी। लघु उद्योग भारती के प्रांतीय अध्यक्ष दीपक कारीवाल ने कहा कि सीईटीपी संचालन गीडा के हित में है। कचरा को लेकर आपत्ति को देखते हुए प्रदूषण विभाग नए सिरे से जांच कर यूनिटों की नई सूची तैयार कर लें। इसके बाद कंसलटेंट ने बताया कि प्रति किलोलीटर कचरा साफ करने का खर्च 26 रुपये आएगा। इस पर दीपक कारीवाल ने कहा कि इसके लिए प्रत्येक यूनिट में दो तरह के मीटर लगाने की जरूरत होगी। इससे साफ हो जाएगा कि यूनिट कितना और किस स्तर का कचरा निस्तारित कर रहा है। उसी के हिसाब से शुल्क लिया जा सकता है।
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चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह ने कहा कि 55 की सूची में कई छोटी इकाइयां हैं जो सीईटीपी संचालन का खर्च नहीं दे सकती हैं। इस पर सुझाव आया कि गीडा उद्यमियों से कई प्रकार का टैक्स लेता है। ऐसे में आधा खर्च गीडा प्रशासन को वहन करना चाहिए। खर्च को लेकर उठे सवाल के बीच कंसलटेंट ने बताया कि बिजली का खर्च कम करने के लिए डीपीआर में एक मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाने का प्रस्ताव है।
गीडा में हुई बैठक में जयपुर के कंसलटेंट ने सबसे पहले सीईटीपी को लेकर प्रजेंटेशन दिया। बताया कि बृहस्पतिवार को प्रदेश स्तर पर होने वाली बैठक में सभी बिंदुओं को रखा जाएगा। बैठक में कंसलटेंट ने बताया कि सीईटीपी के निर्माण और 15 साल तक अनुरक्षण पर 94 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके साथ ही 15 साल तक सीईटीपी संचालन में उद्यमियों पर 41 करोड़ रुपये का बोझ आएगा। इस खर्च को कचरा निकालने वाले 55 यूनिटों को वहन करना होगा।
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इसके बाद उद्यमियों की तरफ से आपत्ति आने लगी। लघु उद्योग भारती के प्रांतीय अध्यक्ष दीपक कारीवाल ने कहा कि सीईटीपी संचालन गीडा के हित में है। कचरा को लेकर आपत्ति को देखते हुए प्रदूषण विभाग नए सिरे से जांच कर यूनिटों की नई सूची तैयार कर लें। इसके बाद कंसलटेंट ने बताया कि प्रति किलोलीटर कचरा साफ करने का खर्च 26 रुपये आएगा। इस पर दीपक कारीवाल ने कहा कि इसके लिए प्रत्येक यूनिट में दो तरह के मीटर लगाने की जरूरत होगी। इससे साफ हो जाएगा कि यूनिट कितना और किस स्तर का कचरा निस्तारित कर रहा है। उसी के हिसाब से शुल्क लिया जा सकता है।
चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह ने कहा कि 55 की सूची में कई छोटी इकाइयां हैं जो सीईटीपी संचालन का खर्च नहीं दे सकती हैं। इस पर सुझाव आया कि गीडा उद्यमियों से कई प्रकार का टैक्स लेता है। ऐसे में आधा खर्च गीडा प्रशासन को वहन करना चाहिए। खर्च को लेकर उठे सवाल के बीच कंसलटेंट ने बताया कि बिजली का खर्च कम करने के लिए डीपीआर में एक मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाने का प्रस्ताव है।