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नेपाल से ग्राउंड रिपोर्ट: दुकानें खुलीं, ग्राहक गायब, सड़कों पर जगह-जगह मलबा, नो एंट्री से वाहनों की कतारें

Sat, 29 Aug 2026 07:38 PM IST
Akash Dubey अमर उजाला ब्यूरो, नेपाल
अमर उजाला ब्यूरो, नेपाल Published by: Akash Dubey Updated Sat, 29 Aug 2026 07:38 PM IST
सार

26 अगस्त को जब जलप्रलय आई तो त्रिशुली नदी से नारायणी नदी तक करीब पानी सात से आठ घंटे में पहुंचा था। इस बार ग्लेशियर के पास करीब पांच लाख करोड़ लीटर पानी के जमा होने का अनुमान है। 

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Ground report from Nepal Shops open, customers missing debris strewn across roads
नेपाल बाढ़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कभी लोगों की चहल-पहल, पर्यटकों की आवाजाही और दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ से गुलजार रहने वाला गजुरी बाजार शुक्रवार को खामोशी की चादर में लिपटा नजर आया। दुकानें खुली थीं लेकिन खरीदारी करने वाला कोई नहीं था। होटल के दरवाजे खुले थे, कुर्सियां खाली पड़ी थीं। जिस शहर में लोग परिवार के साथ छुट्टियां मनाने आते थे, कुछ पल सुकून के बिताते थे वहां अब सिर्फ चिंता, डर और अनिश्चितता दिखाई दे रही है।

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शुक्रवार को जलस्तर बढ़ने और अलर्ट की खबर फैलते ही बाजार का माहौल पूरी तरह बदल गया। ज्यादातर होटल खाली हो गए हैं और होटलों से वेटर भी घर चले गए। बिजली गुल है और शाम ढलते ही अंधेरा छा गया। दिन में भी सड़क पर भी पहले जैसी आवाजाही नहीं रही। स्थानीय दुकानदार बार-बार आसमान और नदी की ओर देखते नजर आए। उनके चेहरे पर एक ही सवाल था, आगे क्या होगा? गजुरी में कुछ दुकानें खुलीं जरूर रहीं, लेकिन ग्राहक नदारद थे।
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दुकानदार किरण महिलानू का कहना था कि सुबह तक उम्मीद थी कि स्थिति सामान्य रहेगी लेकिन अलर्ट के बाद लोगों ने बाजार से दूरी बना ली है। हम लोग जाएं तो कहां? चिंता भरे स्वर में कहा, “कुछ समझ नहीं आ रहा है। दुकानदार सुशीला बोलीं, अलर्ट हुआ है कि शाम तक पानी तेजी से बढ़ेगा। अगर अगले तीन दिन ऐसे ही हालात रहे तो हम लोगों का सब कुछ बर्बाद हो जाएगा। यहां पिकनिक स्पॉट जैसा माहौल रहता है पर, अब वीरान पड़ा है। आपदा का असर सिर्फ नदी के किनारे तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और उनकी रोजी-रोटी तक पहुंच चुका है।
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सड़क पर जगह-जगह मलबा, नो एंट्री से वाहनों की लंबी कतारें
जलप्रवाह के बाद जगह-जगह सड़कों पर मलबा आ गया है जिसके चलते नो एंट्री लागू है। वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। काठमांडो जाने वाले लोग गजुरी, फुर्के खोला में फंसे हुए हैं। सामान लेकर आए ट्रक चालक भी परेशान हैं कि अगर यही हाल रहा तो रुपये खर्च हो जाएंगे। यहां गूगल पे भी नेटवर्क न होने से काम नहीं कर रहा है। खाने के लाले पड़ जाएंगे।

गजुरी में लगा स्वास्थ्य शिविर और लंगर
आपदा के बीच मानवता की तस्वीर भी सामने आई है। गजुरी में नगर पालिका का ओर से स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों का उपचार किया जा रहा है। वहीं, कुछ लोगों ने आपसी सहयोग से लंगर भी शुरू कर दिया है। समाजसेवी सुधीर खरेल ने बताया कि बृहस्पतिवार से लोगों को भोजन कराया जा रहा है। अब तक 1200 लोगों ने भोजन किया है। जब तक हालात सामान्य नहीं होता जाता है, हम लोगों को भोजन कराएंगे।



दोबारा ग्लेशियर टूटा तो चार घंटे में कुशीनगर तक दिखेगा असर, अगले 24 घंटे अहम
नेपाल में जलप्रलय की आशंका के बीच अब अगले 24 घंटे को बेहद अहम माना जा रहा है। नेपाल सरकार ने भी अर्ली वार्निंग सिस्टम के जरिए अगले 24 घंटे में ज्यादा सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। इसी बीच अनुमान जताया गया है कि इस बार अगर ग्लेशियर टूटा तो पानी का वेग 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से भी तेज हो सकता है। पोखरा के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक शांति कंदेल के मुताबिक, नेपाल ही नहीं भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी बाढ़ का खतरा है क्योंकि तीन से चार घंटे में पानी भारत की सीमा में प्रवेश कर सकता है।

26 अगस्त को जब जलप्रलय हुआ तो त्रिशुली नदी से नारायणी नदी तक पानी सात से आठ घंटे में पहुंचा था। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक शांति कंदेल ने बताया कि इस बार ग्लेशियर के पास करीब पांच लाख करोड़ लीटर पानी के जमा होने का अनुमान है। ऐसे में अगर जलप्रलय आया तो पानी का वेग और तेज होगा। इसके अलावा पहली बार में नदियों में पानी नहीं था इसलिए पानी फैला और आगे बढ़ा। इस बार हालात बदले हुए हैं। नदी में पानी पहले से लबालब है। ऐसे में भारत-नेपाल सीमा तक करीब चार घंटे में पानी पहुंच सकता है। वे कहते हैं, इसका असर महराजगंज, कुशीनगर और बिहार के कुछ जिलों में देखने को मिल सकता है।



फिर जलप्रलय की आहट से होश उड़े, तीन गांवों में सेना ने खाली कराए घर-मकान
एक बार जलप्रलय की आहट और प्रशासन की ओर से जारी हाई अलर्ट ने लोगों के होश उड़ा दिए हैं। काठमांडो जाने वाले मुख्य मार्ग पर पोखरा महानगर पालिका और पुलिस प्रहरी ने गजुरी के पास रास्ता ब्लॉक कर दिया है। इससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं हैं और बहुत सारे सैलानी फंस गए हैं।

शुक्रवार दोपहर में सेना और पुलिस की ओर से नदी में पानी बढ़ने का अलर्ट जारी करने से मलेखु, फुर्के खोला और गजुरी क्षेत्र में हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं। सेना के जवानों ने मकान-दुकान खाली करा दिए। तीनों गांवों में लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। नदी की तेज होती धारा और लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को नदी और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की चेतावनी दी है। चेतावनी जारी होते ही इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।



तेज बहाव में बह गया पुल, आवागमन ठप
मलेखु बाजार से करीब एक किलोमीटर आगे स्थित एक पुल बाढ़ के तेज बहाव की चपेट में आकर बह गया। पुल के बह जाने से दोनों ओर का आवागमन बाधित हो गया है। पानी की धारा इतनी तेज है कि आसपास जाना भी जोखिम भरा बताया जा रहा है। पुल के बहने की खबर के बाद स्थानीय लोगों में भी दहशत फैल गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे। मलेखु क्षेत्र नेपाल-भारत सीमा से करीब 200 किलोमीटर अंदर स्थित है। मलेखु पूरे नेपाल में अपनी स्थानीय त्रिशूली नदी की ताजी मछलियों के लिए बेहद प्रसिद्ध है। यहां से लोग काठमांडू और अन्य शहरों के लिए यात्रा करते समय रुकना पसंद करते हैं। यहां बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। नदी का पानी बढ़ने के साथ ही निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। प्रशासन की ओर से लगातार लोगों को सतर्क रहने और नदी किनारे नहीं जाने की सलाह दी जा रही है। सेना और पुलिस की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रहीं हैं।



घर-दुकान छोड़ ऊंचाई की ओर जाते दिखे लोग
बाढ़ का खतरा बढ़ते ही स्थानीय लोगों ने अपने घरों और दुकानों से जरूरी सामान निकालना शुरू कर दिया। कई परिवार सुरक्षित ठिकाने की तलाश में ऊंचाई वाले स्थानों की ओर जाते दिखाई दिए। जिन लोगों के पास वाहन या अन्य साधन थे, वे सामान लेकर निकल गए, जबकि कई लोग पैदल ही सुरक्षित स्थानों की ओर जाते नजर आए।
सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, मरीजों और ऐसे लोगों को हो रही है जो स्वयं सुरक्षित स्थान तक पहुंचने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे लोगों की मदद के लिए सेना और पुलिस के जवान मौके पर पहुंच रहे हैं। जवानों ने कई बुजुर्गों और मरीजों को खुद सहारा देकर या सुरक्षित साधनों से ऊंचाई वाले इलाकों तक पहुंचाया।



चारों तरफ पानी और दहशत का माहौल...आने वाले घंटे अहम
बाढ़ का मंजर देखकर स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। तेज बहती नदी, बढ़ता जलस्तर और टूटते-बिखरते संपर्क मार्गों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लोगों की जान बचाना है। पुलिस प्रमुख प्रहरी उपरीक्षक नवीन कार्की ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन तथा सुरक्षा बलों के निर्देशों का पालन करें। नदी का जलस्तर और मौसम की स्थिति देखते हुए आने वाले घंटों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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