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Gorakhpur News: गोरखपुर में कुपोषण के खिलाफ जंग तेज, जुलाई से सितंबर तक चलेगा अभियान
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गोरखपुर। जिले में कुपोषण के खिलाफ विशेष अभियान जुलाई से शुरू होकर सितंबर तक चलेगा। कुपोषण के खिलाफ जंग के लिए शुरू किए जा रहे संभव अभियान 6.0 की निगरानी की जिम्मा संयुक्त परियोजना निदेशक उपेंद्र उपाध्याय को दिया गया है। वह गोरखपुर और विंध्याचल मंडल की जिम्मेदारी संभालेंगे।
अभियान की प्रभावी निगरानी के लिए शासन स्तर पर मंडलवार नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इसका आदेश बुधवार को जारी किया गया।
निदेशालय, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार, उत्तर प्रदेश की ओर से जारी आदेश के अनुसार इस वर्ष की थीम गर्भावस्था से बाल्यावस्था तक पोषण सुरक्षा रखी गई है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, नवजात शिशुओं और बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग और बाल विकास विभाग संयुक्त रूप से कार्य करेंगे तथा जीवनचक्र आधारित रणनीति के माध्यम से लाभार्थियों तक सेवाएं पहुंचाई जाएंगी।
जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या 6369 है, जबकि अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 1121 है। इस विशेष अभियान के माध्यम से गोरखपुर मंडल के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में कुपोषण की दर में उल्लेखनीय कमी लाने तथा पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
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अभियान की प्रभावी निगरानी के लिए शासन स्तर पर मंडलवार नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इसका आदेश बुधवार को जारी किया गया।
निदेशालय, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार, उत्तर प्रदेश की ओर से जारी आदेश के अनुसार इस वर्ष की थीम गर्भावस्था से बाल्यावस्था तक पोषण सुरक्षा रखी गई है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, नवजात शिशुओं और बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग और बाल विकास विभाग संयुक्त रूप से कार्य करेंगे तथा जीवनचक्र आधारित रणनीति के माध्यम से लाभार्थियों तक सेवाएं पहुंचाई जाएंगी।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या 6369 है, जबकि अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 1121 है। इस विशेष अभियान के माध्यम से गोरखपुर मंडल के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में कुपोषण की दर में उल्लेखनीय कमी लाने तथा पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।