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गोरखपुर में धूमधाम से मना सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह का 353वां प्रकाशपर्व

Thu, 02 Jan 2020 09:59 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: विजय जैन Updated Thu, 02 Jan 2020 09:59 PM IST
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Prakash Parv of Guru Gobind Singh celebration in Gorakhpur
धूमधाम से मनाया गया गुरु पर्व। - फोटो : अमर उजाला
खालसा पंथ के संस्थापक और सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह का 353वां प्रकाशपर्व बृहस्पतिवार को धूमधाम से मोहद्दीपुर गुरुद्वारा में मनाया गया। सुबह जहां अखंड पाठ साहिब, शबद कीर्तन और कवि दरबार का आयोजन हुआ। वहीं, देर शाम अरदास और दीवान की समाप्ति के साथ हुई आतिशबाजी ने माहौल में जोश, उत्साह का संचार किया। इस दौरान ‘जो बोले सो निहाल’, ‘वाहे गुरु जी दा खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह’ और ‘सतनाम वाहेगुरु’ के जयकारों से पूरा गुरुद्वारा परिसर गूंजता रहा।
Prakash Parv of Guru Gobind Singh celebration in Gorakhpur
gurudwara - फोटो : अमर उजाला
मोहद्दीपुर गुरुद्वारा में हजुरी रागी रसपाल सिंह के जत्थे के द्वारा शब्द कीर्तन सुनकर संगत को निहाल किया गया। दीवान की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए गुरुद्वारा पोंटा साहिब, हिमाचल प्रदेश से पधारे रागी कुलविंदर सिंह ने गुरु गोबिंद की महिमा का बखान किया। फरीदाबाद से पधारीं बीबी गुरविंदर कौर के जत्थों ने गुरुबानी सुनाकर माहौल भक्तिमय कर दिया। आखिर में अटूट लंगर का आयोजन हुआ।
Prakash Parv of Guru Gobind Singh celebration in Gorakhpur
मोहद्दीपुर गुरुद्वारा। - फोटो : अमर उजाला
कार्यक्रम का संचालन मनमोहन सिंह लाडे की ओर से किया गया। इस मौके पर मोहद्दीपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश महामंत्री इंजीनियर पीके मल्ल, महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता को सिरोपा देकर सम्मानित किया गया। देवेंद्र सिंह, रजिंदर सिंह चड्ढा, अमृतपाल सिंह, जयपाल सिंह कोहली, राजू, अरविंदर सिंह, धनवंत सिंह धन्ने, अपजीत सिंह हन्नी, पितांबर सिंह, सुरेंदर सिंह कोहली, रसपाल सिंह, रोहताश सिंह, गुरप्रीत सिंह, मानवेंदर सिंह, सुखमीत सिंह, रजिंदर सिंह कोहली आदि मौजूद रहे।
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Prakash Parv of Guru Gobind Singh celebration in Gorakhpur
संगत में कीर्तन सुनती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
विद्वानों के संरक्षक
गुरु गोबिंद सिंह एक लेखक भी थे, उन्होंने स्वयं कई ग्रंथों की रचना की थी। उन्हें विद्वानों का संरक्षक माना जाता था। कहा जाता है कि उनके दरबार में 52 कवियों और लेखकों की उपस्थिति हमेशा बनी रहती थी। इसलिए उन्हें संत सिपाही भी कहा जाता था। गुरु गोबिंद सिंह जयंती पर घरों और गुरुद्वारों में कीर्तन के अलावा खालसा पंथ की झांकियां निकाली जाती हैं। इस दिन खासतौर पर लंगर का आयोजन किया जाता है।
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